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पाकिस्तानी संस्था को जमीन आवंटन का मामला : कांग्रेस नेताओं ने घेर लिया बृजमोहन को, बोले- उनके दावे ही झूठे, वे खुद जमीन के खिलाड़ी...

महामंत्री चंद्रशेखर शुक्ला ने कहा कि बृजमोहन सिर्फ राजनीति और धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए थोथी राजनीति कर रहे हैं. वैसे भी वे जमीन के खिलाड़ी हैं. झलकी में उनका जमीन का मामला है. उनके भाई ने समता कालोनी में बीच सड़क की जमीन पर कब्जा किया.

पाकिस्तानी संस्था को जमीन आवंटन का मामला : कांग्रेस नेताओं ने घेर लिया बृजमोहन को, बोले- उनके दावे ही झूठे, वे खुद जमीन के खिलाड़ी...
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रायपुर. पाकिस्तानी संस्था को सरकारी जमीन आवंटन के विवाद में कई कांग्रेसी नेता कूद पड़े हैं. संचार विभाग के चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने बृजमोहन अग्रवाल के दावे को सिरे से ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि दावत-ए-इस्लामी संस्था छत्तीसगढ़ में पंजीकृत संस्था है. ये संस्था पिछले 15 साल से काम कर रही है. बोरियाकला में 25 एकड़ जमीन रिक्त नहीं है.

आरपी सिंह ने कहा कि बृजमोहन वरिष्ठ नेता हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस संस्था को कोविड काल में अच्छा काम करने का प्रमाणपत्र दिया था. भाजपा का झुकाव शुरू से पाकिस्तान की ओर है.

दावत-ए-इस्लामी को जमीन देने के विवाद में महामंत्री चंद्रशेखर शुक्ला का भी बड़ा बयान सामने आया है. महामंत्री चंद्रशेखर शुक्ला ने कहा कि बृजमोहन सिर्फ राजनीति और धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए थोथी राजनीति कर रहे हैं. वैसे भी वे जमीन के खिलाड़ी हैं. झलकी में उनका जमीन का मामला है. उनके भाई ने समता कालोनी में बीच सड़क की जमीन पर कब्जा किया.

पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का दावा है कि पाकिस्तान से जुड़े संगठन दावत-ए-इस्लामी को छत्तीसगढ़ सरकार किसी भी स्थिति में जमीन देने पर तुली हुई है. एक आवेदन नस्तीबद्ध करने की बात की जा रही है, लेकिन एक और आवेदन अभी जिंदा है. इस आवेदन पर बहुत तेजी से काम हो रहा है. अग्रवाल ने कहा कि दावत-ए- इस्लामी द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण हेतु बोरियाखुर्द प.ह.न. 71 में 10 हेक्टेयर भूमि आवंटन की मांग 31 जनवरी 2021 को की गई थी.

इसके बाद 22 दिसंबर 2021 को न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार रायपुर द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक /अ-19(5) वर्ष 2020-21 के तहत अधिसूचना जारी की गई. 13 जनवरी 2022 को आपत्ति पेश करने की अंतिम तिथि थी. शासन एवं प्रशासन को ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि आपत्ति की तिथि के पहले आवेदन निरस्त करना पड़ा. जो आवेदक सालभर जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी करते रहे, उन्हीं आवेदक ने एक दिन में ही अपना आवेदन क्यों वापस लिया. इससे यह स्पष्ट परिलक्षित है कि शासन प्रशासन षड्यंत्र के तहत पाकिस्तानी संस्था को जमीन आवंटन के लिए लगा हुआ था और जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो आवेदकों को बुलाकर रात्रि में उनसे वापसी का आवेदन लेकर प्रकरण को बैक डेट में निरस्त करने का ढोंग किया गया.

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