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शिकायत अज्ञात की, पर एफआईआर नामजद, खैरागढ़ की राजनीति गरमाई

मतगणना कक्ष में हंगामा करने के मामले में भाजपा नेता विक्रांत सिह सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। प्रशासन के बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया है, क्योंकि प्रशासन का कहना है कि अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत की गई थी। वहीं एफआईआर में व्यक्ति विशेष का नाम आने के बाद से प्रशासन भी सोच में पड़ गया है। पढ़िए ख़बर का विश्लेषण..

शिकायत अज्ञात की, पर एफआईआर नामजद, खैरागढ़ की राजनीति गरमाई
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गौर करने वाली बात यह है कि प्रशासन ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत किया था, लेकिन थाने में दर्ज एफआईआर में भाजपा नेताओं के नाम शामिल है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शिकायत में आरोपियों का नाम किसने और क्यों जोड़ा।

खैरागढ़: मतगणना कक्ष में हंगामा करने के मामले में भाजपा नेता विक्रांत सिह सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। पहले रिकाऊंटिंग के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में जाना फिर प्रशासन की शिकायत पर भाजपा नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज होने से राजनीतिक माहौल बिगड़ गया है। कांग्रेस-भाजपा आमने सामने हो गए है। किसी भी तरह के तनाव से निपटने के लिए पुलिस लगातार शहर में पेट्रोलिंग कर रही है। इधर अपराध पंजीबद्ध होने के बाद से भाजपा नेता गायब हो गए है। पार्टी के बड़े कार्यकर्ता नजर नहीं आ रहे और मोबाईल भी कवरेज से बाहर या बंद बता रहा है। पता चला है कि गैर जमानती मामला होने की वजह से सभी डरे हुए हैं। सभी आरोपियों के नाम सामने नहीं आ रहे हैं। एफआईआर में अन्य का जिक्र किया गया है जिससे विरोध करने वाले नेताओं को अन्य की सूची में डालने का डर बना हुआ है। यही वजह है कि भाजपा नेता और बड़े कार्यकर्ता गायब हो गए हैं।

क्रॉस वोटिंग का भी डर

परिणाम बराबर होने के बाद से दोनों पार्टियों के नेता शहरी सत्ता पर कब्जा जमाना चाह रहे है, किन्तु वह किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाह रहे है, यहीं वजह है कि मतगणना केंद्र के भीतर से नेता विजेताओं को लेकर निकल गए। दोनों पार्टियों के पास 10-10 पार्षद होने की वजह से अध्यक्ष चुनने के लिए एक क्रॉस वोट की जरूरत है।

सुरक्षा या टूटने का डर ?

चुनाव जीतने वाले कांग्रेस प्रत्याशियों के घरों पर जवानों की तैनाती कर दी है। प्रशासन सुरक्षा के लिहाज से जवानों को तैनात करना बता रहा है तो सवाल उठ रहा है कि विजयी प्रत्याशियों के घर वालों की सुरक्षा का ख्याल रखा गया है या फिर पार्षदों को टूटने से बचाने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस-भाजपा के 10-10 पार्षद जीते हैं। दोनों को अध्यक्ष बनाने के लिए एक-एक पार्षद की जरूरत है। ऐसे में जोड़ तोड़ की राजनीति संभव है क्योंकि चुनाव में जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस पार्षदों को अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया है। उनसे किसी तरह से संपर्क नहीं हो रहा है लेकिन उनके पारिवारिक सदस्य घर पर है यानि जोड़-तोड़ की राजनीति परिजनों के माध्यम से संभव है। यहीं वजह है कि कांग्रेस पार्षदों के घर पर पहरा लगा दिया गया है।

प्रशासन का कहना शिकायत अज्ञात लोगों के खिलाफ की गई

प्रशासन के बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया है, क्योंकि प्रशासन का कहना है कि अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत की गई थी। प्रशासन की ओर से किसी भी व्यक्ति की पहचान नहीं की गई है। वहीं एफआईआर में व्यक्ति विशेष का नाम आने के बाद से प्रशासन भी सोच में पड़ गया है। भाजपा नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी पार्टी इसे षड्यंत्र बता रही है तो सत्ता के नेता करनी का फल बता रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि प्रशासन ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत किया था, लेकिन थाने में दर्ज एफआईआर में भाजपा नेताओं के नाम शामिल है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शिकायत में आरोपियों का नाम किसने और क्यों जोड़ा। पता चला है कि नामजद आरोपियों में उनके नाम भी शामिल हैं जो मौके पर मौजूद ही नहीं थे। विडियो में भी नजर नहीं आ रहे।

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