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बच्चे 3, गोद लेने वाले 174, न्यूजीलैंड-यूएई से भी संतान के लिए अर्जी

कोरोना संकटकाल में निराश्रित बच्चों को गोद लेने की तमाम अर्जियां काफी समय से धूल खा रही हैं। संक्रमण के खतरे से बचने की मजबूरी के बीच संतान सुख के सपने देखने वालों की उम्मीदों काे गहरा झटका लगा है। राज्य में 3 निराश्रित बच्चों के लिए ही रायपुर दफ्तर में 174 लोगों ने गोद लेने अर्जियां दाखिल की हैं, पर तीन साल बाद भी इन अर्जियों पर कोई फैसला नहीं हाे पाया है। जो बच्चे अर्जियां लगने के समय एक-डेढ़ साल के थे, बाल संरक्षण गृह में अब उनकी उम्र चार साल से अधिक हो चुकी है।

बच्चे 3, गोद लेने वाले 174, न्यूजीलैंड-यूएई से भी संतान के लिए अर्जी
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मनीष बाघ. रायपुर. कोरोना संकटकाल में निराश्रित बच्चों को गोद लेने की तमाम अर्जियां काफी समय से धूल खा रही हैं। संक्रमण के खतरे से बचने की मजबूरी के बीच संतान सुख के सपने देखने वालों की उम्मीदों काे गहरा झटका लगा है। राज्य में 3 निराश्रित बच्चों के लिए ही रायपुर दफ्तर में 174 लोगों ने गोद लेने अर्जियां दाखिल की हैं, पर तीन साल बाद भी इन अर्जियों पर कोई फैसला नहीं हाे पाया है। जो बच्चे अर्जियां लगने के समय एक-डेढ़ साल के थे, बाल संरक्षण गृह में अब उनकी उम्र चार साल से अधिक हो चुकी है।

मौजूदा स्थिति में छत्तीसगढ़ में बच्चों को गोद लेने सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेश में रहने वाले परिवारों ने भी दिलचस्पी लेकर दो बच्चे गोद लिए हैं। दो बच्चों को विदेशी सरजमीं पर भेजने कागजी दस्तावेज दुरुस्त जरूर हुए हैं, लेकिन कोर्ट से फैसला आने की देर होने से फिलहाल परिजनों को बच्चा सुपुर्द करने की कार्यवाही लटक गई है। पिछले ढाई साल में किसी भी बच्चे को गोद में देने न तो नए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया हो पाई है और न ही पुराने आवेदनों पर कोई फैसला हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने रायपुर जिले में कोविड काल के पहले तक 13 बच्चों के लिए लगाई गई अर्जियों पर कारा के माध्यम से बच्चों को गोद में सौंपा है। अभी 13 बच्चे हैं, जिनमें 3 निराश्रित बच्चों के गोद लेने योग्यता रखने के बाद उनके लिए आवेदन मंजूर किए गए हैं। इन आवेदनों की सुनवाई बाकी रह गई है।

सेंट्रलाइज्ड सिस्टम गड़बड़ाया

कोरोना संक्रमण की वजह से पूरा सेंट्रलाइज्ड सिस्टम गड़बड़ाने से सालों पहले आवेदन करने वालों की सुनवाई नहीं हो पाई है। कारा के माध्यम से देश-विदेश में रहने वालों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। विदेश से भी अर्जियां लगी हैं। दिल्ली में फैसला होने के बाद बच्चों को सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया पूरी हो तो ही आवेदकों को अर्जियों का लाभ मिल सकेगा।

8 बच्चों को गोद देने की मनाही भी

महिला एवं बाल विकास विभाग के पास मौजूद 8 बच्चे ऐसे भी हैं, जिन्हें गोद देने के मसले पर परिजनों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए मनाही की है। फिलहाल ये बच्चे महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण सुरक्षित हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन बच्चों के रिश्तेदार या फिर माता-पिता में से कोई अभी मौजूद हैं। ऐसे में उनके अभिमत नहीं मिलने से आवेदन खारिज किए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार वालों ने बच्चों की परवरिश के लिए उन्हें मातृछाया में भेजा है।

6 साल तक के बच्चे का प्रावधान

महिला एवं बाल विकास विभाग में आवेदकों ने 6 साल या फिर इससे कम उम्र की आयु वाले बच्चों को गोद लेने आवेदन किए हैं। मौजूदा स्थिति में गोद की पात्रता रखने वाले तीन बच्चे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग छत्तीसगढ़ शासन की ओर से 6 साल से 18 साल तक के बच्चों की भी परवरिश का जिम्मा सौंपने नए नियम शामिल किए गए हैं। इस नियम में ऐसे बच्चे, जो बालक-बालिका संरक्षण केंद्र पहुंचे हैं, उनके लिए आवेदन अलग से स्वीकृत किए जाने प्रावधान हैं।

डेढ़ सौ से ज्यादा आवेदन

कोरोना संक्रमण काल में गोद लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। सुनवाई में देर होने की वजह से फाइलें रुकी हुई हैं। जिले में डेढ़ सौ से ज्यादा अर्जियां आ चुकी हैं।

- अशोक पांडे, कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास

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