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छत्तीसगढ़ : पटवारी, बीईओ समेत 3 रिश्वत लेते गिरफ्तार, एसीबी टीम की कार्रवाई

एसीबी की टीम ने रायपुर, अंबिकापुर और बिलासपुर कुल 3 जगहों पर भ्रष्टाचारियों पर कसा शिकंजा। पढ़िए पूरी खबर-

एडीजी की संपत्ति की तलाश में एसीबी की टीम ने कटक में डाला डेरा
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एसीबी (प्रतीकात्मक फोटो)

रायपुर। एंटी करप्शन ब्यूरो ने छत्तीसगढ़ भर में कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है। एसीबी की टीम ने रायपुर, अंबिकापुर और बिलासपुर कुल 3 जगहों पर भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसा है। एसीबी की टीम ने रिश्वत मांगने के आरोप में बिलासपुर के जिला पंचायत रुर्बन मिशन समन्वयक, विकास खंड शिक्षा अधिकारी सूरजपुर तथा बेमेतरा से पटवारी को गिरफ्तार किया गया है।

पहला मामला बिलासपुर जिले के भदौरा ग्राम का है, जहां प्रार्थी विजय कुमार राजगीर पिता डीआर राजगीर उम्र 50 साल ने एसीबी बिलासपुर में शिकायत की थी कि, केंद्र सरकार की रुर्बन मिशन योजना के तहत ग्राम पंचायत भदौरा के लिए स्टाम्प डेम, स्कूल पानी टंकी में शेड निर्माण एवं गांव में 3 वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए स्वीकृत राशि लगभग ₹14 लाख में से पहली किस्त रिलीज करने की एवज में जिला पंचायत समन्वयक रूर्बन मिशन के समन्वयक नवीन कुमार देवांगन ने 5% की राशि 35,000 की रिश्वत मांगी है। इस पर 7 जुलाई को नवीन कुमार देवांगन को प्रार्थी से ₹35,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।

दूसरा मामला सरगुजा के अंबिकापुर का है, जहां प्रार्थी ओम प्रकाश योगी, प्रधान पाठक, पूर्व माध्यमिक शाला रेलवे कॉलोनी, करौंदी जिला सूरजपुर ने एसीबी कार्यालय अंबिकापुर में शिकायत की थी कि लॉकडाउन अवधि का वेतन निकालने की आवाज में सूरजपुर बीईओ कपूरचंद साहू प्रार्थी ने आधा वेतन अर्थात ₹30,000 रिश्वत की मांग कर रहा था। रिश्वत की रकम कुछ कम करने का आग्रह करने पर 25,000 रूपये की घूस की मांगी थी। शिकायत पर कपूरचंद साहू को सूरजपुर के अंबिका पेट्रोल पंप परिसर एसबीआई एटीएम के सामने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

तीसरा मामला बेमेतरा के नवागढ़ थाना क्षेत्र का है, जहां प्रार्थी नरेंद्र चतुर्वेदी ने एसीबी रायपुर एसपी आरिफ शेख के समक्ष शिकायत की थी कि प्रार्थी के पिता की मौत के बाद पिता के नाम से आधारित कृषि भूमि का फौती उठाकर अपने घर में माता और भाई के नाम पर दर्ज कराने के एवज में पटवारी लोचन साहू ने 7,500 रुपए रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत की रकम ज्यादा होने के कारण 2,800 रूपये में सहमति हुई थी। इसके बाद पटवारी को 2,800 रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।

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