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यहाँ तो बहुमत के फेर में फंस गई कुर्सी, भाजपा 10 सीट, कांग्रेस 9 सीट, एक वार्ड में टाई...!

नगर निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद सभी को चौंका दिया है। अब शहरी सत्ता की कुर्सी बहुमत के फेर में फंसती नजर आ रही है। क्योंकि फिलहाल किसी भी पार्टी को बहुमत के जादुई आंकड़ा 11 सीट तक नहीं पहुंच पाई है। जहां 20 सीटों में से 10 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। वही कांग्रेस 9 सीट पाने में कामयाब रही है। इधर वार्ड नंबर 4 का परिणाम कांग्रेस-भाजपा के बीच टाई हो गया है। उधर बहुमत के लिए भाजपा को सिर्फ एक सीट हासिल करने की जरूरत है, वही कांग्रेस को बहुमत के लिए दो सीटों की जरूरत है।

यहाँ तो बहुमत के फेर में फंस गई कुर्सी, भाजपा 10 सीट, कांग्रेस 9 सीट, एक वार्ड में टाई...!
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खैरागढ़। नगर निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद सभी को चौंका दिया है। अब शहरी सत्ता की कुर्सी बहुमत के फेर में फंसती नजर आ रही है। क्योंकि फिलहाल किसी भी पार्टी को बहुमत के जादुई आंकड़ा 11 सीट तक नहीं पहुंच पाई है। जहां 20 सीटों में से 10 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। वही कांग्रेस 9 सीट पाने में कामयाब रही है। इधर वार्ड नंबर 4 का परिणाम कांग्रेस-भाजपा के बीच टाई हो गया है। उधर बहुमत के लिए भाजपा को सिर्फ एक सीट हासिल करने की जरूरत है, वही कांग्रेस को बहुमत के लिए दो सीटों की जरूरत है।

वार्ड नंबर 4 का परिणाम भी अहम

शहरी सत्ता की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए वार्ड नंबर 4 राजफेमली का परिणाम अहम होने वाला है। क्योंकि यह वार्ड टाई हो गया है। अगर परिणाम भाजपा की खाते में गई तो स्पष्ट बहुमत मिल जाएगा। वही परिणाम कांग्रेस के पक्ष में जाती है, तो कांग्रेस-भाजपा को शहरी सत्ता की कुर्सी पर कब्जा जमाने के के लिए एक-एक सीट की जरूरत होगी।

जोड़-तोड़ की राजनीति भी संभव?

शहरी सत्ता में काबिज होने के लिए सीटों की जोड़तोड़ के लिए राजनीति भी संभव है। क्योंकि वार्ड 04 अगर कांग्रेस के पक्ष में गई तो दोनों पार्टियों के पास 10-10 सीटें हो जाएंगी। ऐसे में बहुमत के सीटों के जादुई आंकड़ा पाने के लिए कांग्रेस-भाजपा को एक सीट अपने पक्ष में लाना पड़ेगा। तभी शहरी सत्ता में काबिज होंगे। अगर वार्ड 4 भाजपा के पक्ष में जाता है, तो फिर जोड़तोड़ की कहानी ही खत्म हो जाएगी। क्योंकि भाजपा के पास बहुमत की 11 सीट आ जाएगी। टाई वाली वार्ड नंबर चार राजफेमली का परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हुई है। क्योंकि शहरी सत्ता में अध्यक्ष बैठाने बहुमत 11 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में वार्ड नंबर 4 अगर कांग्रेस की झोली में जाती है, तो अध्यक्ष को लेकर पेंच फंस जाएगा। वही भाजपा के पक्ष में परिणाम गया तो बहुमत में आ जाएगी। वही शहरी सत्ता में अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमा लेंगे।

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