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तहसीलदार व नजूल निरीक्षक के साथ मिलकर हड़पी जमीन, पूर्व पार्षद समेत 3 के खिलाफ केस दर्ज

एफआईआर दर्ज होने के 20 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली है उधर आरोपी कर रहे अग्रिम जमानत का प्रयास। पढ़िए पूरी खबर-

तहसीलदार व नजूल निरीक्षक के साथ मिलकर हड़पी जमीन, पूर्व पार्षद समेत 3 के खिलाफ केस दर्ज
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डोंगरगढ़। पूर्व पार्षद समेत 3 लोगों के खिलाफ जमीन हड़पने का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने तहसीलदार व नजूल निरीक्षक के साथ मिलकर आवासीय भूमि हड़प ली। बुधवारीपारा निवासी धनसिंह जंघेल की शिकायत पर डोंगरगढ पुलिस थाने में पूर्व पार्षद दीपक ठाकुर, बीजेपी नेता राजनारायण चंदेल व अवंति विहार रायपुर निवासी चंदा बाई लोधी के खिलाफ 7 सितम्बर को धारा 420, 467,468 व 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। मामला दर्ज होने के बाद सभी आरोपी फरार है। एफआईआर दर्ज होने के 20 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली है उधर आरोपी अग्रिम जमानत का प्रयास कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

प्रार्थी धनसिंह जंघेल ने बताया कि धनसिंह जंघेल तीन भाई थे दीनदयाल जंघेल, मनोहर जंघेल और धनसिंह जंघेल। करीब 50 साल पहले इनके पिता रिघु राम जंघेल ने 3598 वर्गफुट आवासीय भूमि खरीदी थी, जिस जमीन पर तीनों भाइयों का अधिकार था इसलिए इस जमीन में से 1800 वर्गफुट भूमि सभी भाइयों ने मिलकर रायपुर निवासी चंदा बाई पति पूरनलाल लोधी को 20 जुलाई 1977 में बेच दी। इसके बाद 1798 वर्गफुट जमीन तीनो भाइयों के अधिकार में शेष बची थी।

प्रार्थी का आरोप है कि तत्कालीन तहसीलदार व नजूल निरीक्षक के साथ सांठगांठ कर 30 जुलाई 2012 को एक नया नामांतरण क्रमांक 97 जारी किया गया जिसमें क्रेता कॉलम क्रमांक 14 में दीपक ठाकुर पिता शत्रुघ्न सिंह ठाकुर मुलतानी पारा के नाम पर 1798 वर्गफुट जमीन नामांतरण कर दी गई। जबकि भूमि स्वामी ने उक्त जमीन को आज तक ना तो किसी के पास बेचा और ना ही गिरवी रखा बल्कि आज तक उक्त जमीन का टैक्स नगर पालिका में जमा करते आ रहे हैं।

कैसे रचा गया षडयंत्र

प्रार्थी का कहना है कि पूर्व पार्षद दीपक ठाकुर, चंदा बाई लोधी व राजनारायण चंदेल के द्वारा षडयंत्र पूर्वक कूटरचना कर 20 जुलाई 1977 के माध्यम से तत्कालीन तहसीलदार व नजूल निरीक्षक के साथ मिलीभगत कर दूसरी बार 14 मई 2012 को फिर से विक्रय पत्र सम्पादित कर अवैधानिक रूप से चंदा बाई का नाम नामांतरण कराकर चंदा बाई लोधी का आम मुख्तयार राजनारायण चंदेल बनकर अपने मित्र दीपक ठाकुर के नाम पर 3 जुलाई 2012 को बैनामा राशि 9 लाख 81 हजार रुपये में विक्रय पत्र संपादित किया तथा दीपक ठाकुर ने पुनः नामांतरण पंजी में 23 जुलाई 2012 को नामांतरण कराने में सफल हो गया। तीनों आरोपियों के द्वारा शासकीय दस्तावेजो में कूटरचना कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर षड्यंत्र कर फ्रॉड किया गया है, जिसकी जानकारी उपरोक्त दस्तावेजों की नकल प्राप्त होने पर हुई।

राजनीतिक दबाव के चलते अब तक नहीं मिला न्याय

प्रार्थी धनसिंह जंघेल ने बताया कि उनके द्वारा बीजेपी शासनकाल में कई बार सक्षम अधिकारी, राज्यपाल, मुख्यमंत्री व गृह मंत्री को भी आवेदन के माध्यम से शिकायत की कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई गई थी लेकिन राजनारायण चंदेल व दीपक ठाकुर बीजेपी के सदस्य होने के कारण उनके आवेदन को अनदेखा कर सही तरीके से जांच नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें आज तक न्याय नहीं मिल पाया और आर्थिक व मानसिक क्षति का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी उम्र 74 वर्ष की हो चुकी है और वे काफी वृद्ध हो चुके हैं उसके बावजूद उन्हें अपनी ही संपत्ति को बचाने के लिए दर-दर की ठोकरे खानी पड़ रही हैं।

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