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भाड़ा वृद्धि नहीं करने पर बस मालिकों ने जल समाधि लेने की दी चेतावनी

बस संचालक भाड़ा वृद्धि करने की मांग को लेकर राज्य सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में आ गए हैं। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर बस किराए में बढ़ोतरी नहीं होने पर सोमवार से पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

यात्री किराया नहीं बढ़ाया तो अनिश्चितकालीन चक्काजाम, खारून में लेंगे जल समाधि
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बस  (प्रतीकात्मक फोटो)

बस संचालक भाड़ा वृद्धि करने की मांग को लेकर राज्य सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में आ गए हैं। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर बस किराए में बढ़ोतरी नहीं होने पर सोमवार से पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन करने की चेतावनी दी है। साथ ही 13 जुलाई से अनिश्चितकाल के लिए बस संचालन बंद करने की चेतावनी के साथ 14 जुलाई को खारुन नदी में जल समाधि लेने की चेतावनी दी है।

छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के सैयद अनवर अली के मुताबिक डीजल में केंद्र के साथ राज्य सरकार 68 प्रतिशत तक वैट के रूप में वसूल कर रही है। इसके साथ ही इंश्योरेंस में 40 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने के साथ मोटर पार्ट्स में जीएसटी 18 से बढ़कर 28 प्रतिशत तक होने सहित टोल टैक्स की बढ़ोतरी ने बस मालिकों की कमर तोड़ दी है। इस वजह से बस संचालन करने में मुनाफा होने के बजाय नुकसान होने की बात कही। बस ऑपरेटरों ने 40 प्रतिशत तक भाड़ा वृद्धि करने की मांग की है।

अन्य राज्यों का हवाला देकर भाड़ा वृद्धि करने दबाव

बस ऑपरेटरों के मुताबिक वर्ष 2018 में 10 प्रतिशत बस भाड़े में वृद्धि की गई है। इसके बाद से भाड़े में किसी तरह से वृद्धि नहीं की गई है। ऑपरेटरों के अनुसार वर्ष 2010 की तुलना में डीजल के रेट में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर उन पर पड़ रहा है। बस ऑपरेटरों ने पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा है कि इन राज्यों में पिछले तीन वर्षों में बस भाड़े में 35 से 45 प्रतिशत तक वृद्धि की जा चुकी है। उसी तर्ज पर ऑपरेटरों ने भाड़ा वृद्धि करने की मांग की है।

एक लाख से ज्यादा बेरोजगारी का दंश झेल रहे

छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के अध्यक्ष के मुताबिक राज्य में करीब नौ हजार बसें संचालित हो रही हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले 16 महीने में महज 10 प्रतिशत बसें संचालित हो रही हैं। एक बस में कंडक्टर, ड्राइव्हर, क्लीनर सहित 12 कर्मचारी काम करते हैं। बसों का संचालन नहीं होने से एक लाख से ज्यादा कर्मचारी बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर हैं।


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