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बृजमोहन बोले- दावत-ए-इस्लामी का एक आवेदन अब भी जिंदा

भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल प्रदेश सरकार को जमीन आबंटन मुद्दे पर लगातार घेर रहे हैं, अग्रवाल ने कहा- भूपेश सरकार पाक के आंतकी संगठन को जमीन देने पर तुली है, एक दिन पहले पत्रकारवार्ता के माध्यम से जब हमने पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी के नाम पर राजधानी रायपुर के बोरियाखुर्द में 25 एकड़ जमीन आवंटन व प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई, तो आनन-फानन में शासन एवं प्रशासन ने रात्रि में 1 जनवरी के तारीख में उक्त जमीन के प्राप्त आवेदन को रद्द करने का बयान जारी करवाया। परंतु वस्तुस्थिति इसके विपरीत है। पढ़िए पूरी ख़बर..

बृजमोहन बोले- दावत-ए-इस्लामी का एक आवेदन अब भी जिंदा
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रायपुर: भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, पाकिस्तान से जुड़े संगठन दावत-ए-इस्लामी को छत्तीसगढ़ सरकार किसी भी स्थिति में जमीन देने पर तुली हुई है। एक आवेदन नस्तीबद्ध करने की बात की जा रही है, लेकिन एक और आवेदन अभी जिंदा है। इस आवेदन पर बहुत तेजी से काम हो रहा है।

अग्रवाल ने कहा कि दावत-ए- इस्लामी द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण हेतु बोरियाखुर्द प.ह.न. 71 में 10 हेक्टेयर भूमि आवंटन की मांग 31 जनवरी 2021 को की गई थी। इसके बाद 22 दिसंबर 2021 को न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार रायपुर द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक /अ-19(5) वर्ष 2020-21 के तहत अधिसूचना जारी की गई। 13 जनवरी 2022 को आपत्ति पेश करने की अंतिम तिथि थी। शासन एवं प्रशासन को ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि आपत्ति की तिथि के पहले आवेदन निरस्त करना पड़ा। जो आवेदक सालभर जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी करते रहे, उन्हीं आवेदक ने एक दिन में ही अपना आवेदन क्यों वापस लिया। इससे यह स्पष्ट परिलक्षित है कि शासन प्रशासन षड्यंत्र के तहत पाकिस्तानी संस्था को जमीन आवंटन के लिए लगा हुआ था और जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो आवेदकों को बुलाकर रात्रि में उनसे वापसी का आवेदन लेकर प्रकरण को बेक डेट में निरस्त करने का ढोंग किया गया।

प्रशासन मौन क्यों?

अग्रवाल ने कहा, पाकिस्तानी आतंकी संस्था के लिए जमीन आंबटन की इतनी तत्परता क्यों? किसके कहने पर? और किसलिए? प्रदेश में ढाई-ढाई साल से हजारों की संख्या में जमीन आवंटन के आवेदन जहां हैं वहीं पड़े हुए हैं। फिर इस अकेले प्रकरण में इतनी तत्परता क्यों दिखाई गई? यह आवेदन तो शासन द्वारा निरस्त किए गए दावत-ए-इस्लामी के आवेदन से अलग है। इस पर प्रशासन मौन क्यों हैं। आखिर मासा एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी दावत-ए-इस्लामी के लिए जमीन क्यों मांग रही है? सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए और यह भी बताना चाहिए की इस आवेदन का क्या हुआ?

ये आवेदन अब भी जिंदा

अग्रवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर जहां दावत-ए-इस्लामी को जमीन देने के उनके 31 जनवरी 2021 के आवेदन के आधार पर जारी अधिसूचना को निरस्त किया गया है। वहीं एक आवेदन 28 दिसंबर 2021 को माशा एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संचालक मोहम्मद अनवारुत हसन ने अनुविभागीय दंडाधिकारी रायपुर को किया, जिसके नोट में मठपुरैना कब्रिस्तान के बाजू में दावत-ए-इस्लामी को खसरा नं. 199/1 का भाग आवंटित करने की भी मांग की गई है। 28 दिसंबर 2021 को ही आवेदन को प्रदेश के परिवहन आवास एवं पर्यावरण वन मंत्री ने एसडीएम रायपुर को अनुशंसित किया। 29 दिसंबर को ही पत्र डिस्पैच होकर एसडीएम से होते एडिशनल तहसीलदार तक पहुंच गया। 29 दिसंबर को एडिशनल तहसीलदार ने प्रकरण दर्ज कर इश्तहार प्रकाशन के लिए भी अनुशंसा कर दी।

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