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मलेशिया-इंडोनेशिया से आयात पर ब्रेक, तेल की कीमतों में आग, 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

कोविड संक्रमण के चलते विदेशों से तिलहन का आयात बंद होने का असर खाद्य तेलों पर पड़ा है। खाद्य तेलों की कीमतों में आग लग गई है। खाद्य तेल की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। त्योहरी सीजन गुजर जाने के बाद भी तेल की कीमतों में तेजी जारी है। इसके साथ ही विदेशों से आयात होने वाले तिलहन में इनपोर्ट ड्यूटी बढ़ने की वजह से तेल की कीमतों में तेजी आने की बात कारोबारी बता रहे हैं।

मलेशिया-इंडोनेशिया से आयात पर ब्रेक, तेल की कीमतों में आग, 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
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रायपुर. कोविड संक्रमण के चलते विदेशों से तिलहन का आयात बंद होने का असर खाद्य तेलों पर पड़ा है। खाद्य तेलों की कीमतों में आग लग गई है। खाद्य तेल की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। त्योहरी सीजन गुजर जाने के बाद भी तेल की कीमतों में तेजी जारी है। इसके साथ ही विदेशों से आयात होने वाले तिलहन में इनपोर्ट ड्यूटी बढ़ने की वजह से तेल की कीमतों में तेजी आने की बात कारोबारी बता रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत में बड़े पैमाने पर इंडोनेशिया तथा मलेशिया से पॉम आयल का आयात किया जाता है। पिछले सात महीने से मलेशिया तथा इंडोनेशिया से पॉम ऑयल का आयात नहीं होने से सनफ्लाॅवर, सोयाबीन सहित मूंगफली तेल तथा राइसब्रान तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। कारोबारियों के मुताबिक देश में अर्जेंटाइना सहित दक्षिण अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया से सनफ्लाॅवर के साथ सोयाबीन का आयात किया जाता है। कोरोना संक्रमण की वजह से इन देशों से सनफ्लाॅवर, सोयाबीन, तथा पॉम ऑयल का आयात महज 40 प्रतिशत रह गया है। इस वजह से भी तेलों की कीमतों में इजाफा होने की बात स्थानीय कारोबारी बता रहे हैं।

चीन में तेल का आयात बढ़ा

स्थानीय तेल कारोबारियों के मुताबिक चीन में कोरोना के दूसरी लहर शुरू होने के बाद चीन ने अपने देश में खाद्य तेल का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इस वजह से जिन देशों से भारत में तेल का आयात होता था। उन देशों ने महंगी कीमत पर चीन को खाद्य तेल बेचना शुरू कर दिया है। इस वजह से भी तेल की कीमतों में इजाफा होने की बात कारोबारी बता रहे हैं।

इस वजह से भी तेल की कीमतों में तेजी

कारोबारियों के अनुसार लोगों को शुद्ध खाद्य तेल मिले, इस उद्देश्य से तेलों में किसी तरह की ग्लाइंडिंग पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है। इस वजह से सरसों तेल की कीमतें आसमान पर हैं। ग्लाइंडिंग में रोक की वजह से सरसों तेल के साथ फल्ली तेल की कीमतों में तेजी आई है।

हरी सब्जियों से लेकर दाल तक सस्ती

ठंड शुरू होने के साथ ही बाजार में हरी सब्जियों की बंपर आवक है। इसके चलते दीपावली के पहले दालों की जो कीमत थी, उसमें 10 से 15 रुपए तक की गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में बाजार में राहर दाल 70 से 95 रुपए तक बिक रही है। इसी तरह से उड़द दाल सौ की जगह 85 से 90 रुपए पर बिक रही है। मूंग दाल की कीमत बाजार में वर्तमान में सौ से लुढ़ककर 95 रुपए पर पहुंच गई है। जबकि गेंहू की कीमत स्थिर है।

समर्थन मूल्य से बढ़ी खाद्य तेलों की कीमतें

कारोबारियों के मुताबिक केंद्र सरकार ने किसानों की हितों को ध्यान में रखते हुए सभी प्रकार के तिलहन के समर्थन मूल्य में वृद्धि की है। सरसों का समर्थन मूल्य 45 सौ से बढ़ाकर 48 सौ रुपए कर दिया गया है। जबकि सोयाबीन का समर्थन मूल्य 44 से बढ़ाकर 45 सौ रुपए कर दिया है। बढ़े हुए समर्थन मूल्य की वजह से भी तेल की कीमतों में इजाफा होने की बात कारोबारी कह रहे हैं।

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