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पक्षी विहार केंद्र बनाने के लिए सर्वे, प्रशिक्षण के बाद पर्यटकों को गाइड करेंगे ग्रामीण

दुर्ग जिले के गिधवा-परसदा तथा बलौदी गांव में राष्ट्रीय स्तर के बर्ड सेंटर बनाने बाॅम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के डायरेक्टर डॉ. बिवाश पांडव, वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञ एवं सांइटिस्ट डॉ. रजत भार्गव दूसरे दिन गिधवा-परसदा गांव सर्वे करने के लिए पहुंचे। गांव में पहुंचकर दोनों विशेषज्ञों ने आसपास की भौगाेलिक स्थिति का निरीक्षण किया।

पक्षी विहार केंद्र बनाने के लिए सर्वे, प्रशिक्षण के बाद पर्यटकों को गाइड करेंगे ग्रामीण
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पक्षी विहार (प्रतीकात्मक फोटो)

दुर्ग जिले के गिधवा-परसदा तथा बलौदी गांव में राष्ट्रीय स्तर के बर्ड सेंटर बनाने बाॅम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के डायरेक्टर डॉ. बिवाश पांडव, वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञ एवं सांइटिस्ट डॉ. रजत भार्गव दूसरे दिन गिधवा-परसदा गांव सर्वे करने के लिए पहुंचे। गांव में पहुंचकर दोनों विशेषज्ञों ने आसपास की भौगाेलिक स्थिति का निरीक्षण किया। साथ ही ग्रामीणों से संपर्क कर आसपास के छोटे-बड़े बांध पहुंचकर वहां की स्थिति का अवलोकन किया।

दुर्ग वनमंडल के डीएफओ धमशील गणवीर के मुताबिक एक्सपर्ट की टीम ने गिधवा-परसदा से सटे गांव नगधा, मुरकुटा का दौरा किया। एक्सपर्ट के अनुसार बलौदी की तरह इन गांवों में भी राष्ट्रीय स्तर का बर्ड सेंटर बनाने अनुकूल माहौल है। एक्सपर्ट के अनुसार बलौदी के साथ गिधवा-परसदा में जलाशय के साथ कई बांध हैं जिसकी वजह से यहां भारी संख्या में देशी के साथ विदेशी पक्षियों का प्रवास होता है। इसी आधार पर पूरे इलाके को चिन्हांकित कर राष्ट्रीय स्तर का बर्ड सेंटर बनाने का काम किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर के बर्ड सेंटर बनाने बाॅयो-डायवर्सिटी के अफसरों से विचार-विमर्श एक्सपर्ट की टीम करेगी।

इंटरप्रेटेशन सेंटर बनेगा

वन अफसर के मुताबिक गिधवा-परसदा के साथ बलौदी में पक्षियों के बारे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी देने इंटरप्रेटेशन सेंटर बनाया जाएगा। यहां लोगों को पक्षियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही क्षेत्र में कितने और किन-किन प्रजातियों के पक्षी कहां-कहां से आते हैं, इस संबंध में लोगों को जानकारी दी जाएगी।

ग्रामीणों को करेंगे प्रशिक्षित

वन अफसर के मुताबिक बर्ड सेंटर बनाने स्थानीय ग्रामीणों को एक महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रामीणों को पक्षियों की सुरक्षा करने के साथ उनकी प्रजाति के बारे में जानकारी दी जाएगी। ग्रामीणों को पक्षियों के वैज्ञानिक नाम के साथ स्थानीय नाम के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों को पक्षी देखने आने वाले पर्यटकों के लिए गाइड के रूप में तैयार किया जाएगा।


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