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BIG-BREAKING: आज चिटफंड कंपनियों की प्रापर्टी नीलाम: डेढ़ करोड़ सीधे पीड़ितों के खाते में

आज (गुरुवार) को बीएन गोल्ड की अमलीडीह स्थित प्रापर्टी और दिव्यानी की पुराना धमतरी रोड पर स्थित बंद पड़े ऑफिस की नीलामी होगी। राजधानी में इन 16 चिटफंड कंपनियों की 8 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। लेकिन कंपनियों ने संपत्ति नीलामी के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इस वजह से कंपनियों की संपत्ति नीलाम नहीं हो पा रही। अफसरों का कहना है कि कोर्ट से आदेश मिलने के बाद जल्द ही इन संपत्तियों की भी नीलामी की जाएगी। पढ़िए बड़ी ख़बर..

BIG-BREAKING: आज चिटफंड कंपनियों की प्रापर्टी नीलाम: डेढ़ करोड़ सीधे पीड़ितों के खाते में
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रायपुर: राजधानी में पहली बार 2 फ्राॅड चिटफंड कंपनी की डेढ़ करोड़ की प्रापर्टी बेचकर उस रकम को पैसे जमा करने वाले पीड़ितों में बांटे जाएंगे। गुरुवार को बीएन गोल्ड की अमलीडीह स्थित प्रापर्टी और दिव्यानी की पुराना धमतरी रोड पर स्थित बंद पड़े ऑफिस की नीलामी होगी। राज्य के एक-दो शहरों में प्रापर्टी नीलाम कर पीड़ितों को मुआवजा दिया जा चुका है। रायपुर में पहली बार कार्रवाई नीलामी तक पहुंची है। प्रशासनिक अफसरों के अनुसार अमलीडीह में बीएन गोल्ड की 3 अलग-अलग प्रापर्टी है। इसी की खरीदी का जबरदस्त क्रेज है। इन तीनों प्रापर्टी के लिए 23 लोग बोली में शामिल हो रहे हैं। इन सभी ने अलग-अलग 9-9 लाख बतौर एडवांस जमा करवाया है। तहसील ऑफिस में दोपहर 12 बजे से ही बोली लगने लगेगी। इन कंपनियों ने करीब 20 करोड़ से ज्यादा की ठगी की है, लेकिन लंबी छानबीन के बाद उनकी केवल डेढ़ करोड़ की ही प्रापर्टी का पता चला है। उसी को नीलाम करने की प्रक्रिया की जा रही है। चिटफंड कंपनियों की जमीन खरीदने के लिए 3 जनवरी तक आवेदन मंगाए थे।

जिन लोगों ने एडवांस रकम जमा की है वे ही इस बोली में शामिल हो सकते हैं। नियमों के अनुसार जमीन की कीमत का 10 फीसदी बतौर एडवांस डीडी बनाकर तहसील कार्यालय में जमा करना है। जमीन खरीदने के लिए शहर के कुछ बड़े बिल्डरों के साथ दूसरे जिले के कारोबारियों ने भी दिलचस्पी दिखाई है। कंपनी में पैसा गंवाने वाले जिन पीड़ितों ने तहसील में रकम वापसी के लिए आवेदन दिया था, उन्हीं को रकम दी जाएगी। इन जमीनों की बिक्री के बाद जो रकम वापस मिलेगी उसे इन कंपनियों में रकम गंवाने वाले पीड़ितों को वापस की जाएगी। इसके लिए पीड़ितों की पहचान की जा चुकी है। पर एक-एक पीड़ित को कितनी-कितनी रकम दी जाएगी, ये तय नहीं है।

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