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बड़ी उपलब्धि : 'छत्तीसगढ़ मॉडल' ने फिर लहराया परचम, देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में प्रदेश चौथे क्रम पर

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भी देशव्यापी आर्थिक मंदी से छत्तीसगढ़ राज्य की अर्थव्यवस्था अछूती रही. तब भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर पूरी तरह नियंत्रित रही. अब नये आंकड़ों के मुताबिक जहां देश में बेरोजगारी दर लगातार चिंताजनक उछाल पर है, वहीं छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर केवल 2.1 प्रतिशत है.

बड़ी उपलब्धि : छत्तीसगढ़ मॉडल ने फिर लहराया परचम, देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में प्रदेश चौथे क्रम पर
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रायपुर. सेंटर फॉर मेजरिंग इंडियन इकोनॉमी संगठन (सीएमआईई) द्वारा हाल ही में जारी किए गए बेरोजगारी के आंकड़ों ने एक बार फिर विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल की सफलता का परचम बुलंद कर दिया है. आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ 2.1 प्रतिशत के साथ देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में चौथे क्रम पर है. दिसंबर 2021 की स्थिति के अध्ययन के बाद सीएमआईई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश की बेरोजगारी दर दिसंबर महीने में 7.91 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यह 4 माह का उच्चतम स्तर है.

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भी देशव्यापी आर्थिक मंदी से छत्तीसगढ़ राज्य की अर्थव्यवस्था अछूती रही. तब भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर पूरी तरह नियंत्रित रही. अब नये आंकड़ों के मुताबिक जहां देश में बेरोजगारी दर लगातार चिंताजनक उछाल पर है, वहीं छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर केवल 2.1 प्रतिशत है.

नये आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में 3.4 प्रतिशत, उत्तरप्रदेश में 4.9 प्रतिशत, असम में 5.8 प्रतिशत, झारखंड में 17.3 और बिहार में 16 प्रतिशत बेरोजगारी की दर रही है. रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल जनवरी 2021 की स्थिति में देश में बेरोजगारी दर 6.52 फीसदी थी जिसमें शहरी बेरोजगारी 8.1 प्रतिशत और ग्रामीण बेरोजगारी 5.81 प्रतिशत थी.

वहीं दिसंबर 2021 की स्थिति में देश में बेरोजगारी की दर 7.91 प्रतिशत रही जिसमें शहरी बेरोजगारी 9.3 प्रतिशत और ग्रामीण बेरोजगारी 7.28 प्रतिशत रही. सेंटर फार मेजरिंग इंडियन इकॉनॉमी संगठन 45 वर्षों से भारतीय अर्थव्यवस्था विदेशी मुद्रा, कृषि, उद्योग आदि क्षेत्रों में सतत अध्ययन करके डेटाबेस का निर्माण करता आया है और इसके द्वारा जारी आंकड़ों को प्रामाणिक माना जाता है.

गौरतलब है कि समावेशी विकास का लक्ष्य निर्धारित करते हुए तीन साल पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के अनुरूप नया मॉडल अपनाया गया है, जिसके तहत गांवों और शहरों के बीच आर्थिक परस्परता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इसी मॉडल के अंतर्गत गांवों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सुराजी गांव योजना, नरवा-गरवा-घुरवा-बारी कार्यक्रम, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, रूरल इंडस्ट्रियल पार्कों की स्थापना, लघु वनोपजों के संग्रहण एवं वैल्यू एडिशन, उद्यमिता विकास जैसी अनेक अभिनव योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जा रहा है.

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