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#BankStrike : MP-CG में जोरदार प्रदर्शन, दिग्विजय सिंह का आंदोलन को समर्थन, देखिए वीडियो

केन्द्र सरकार के निजीकरण (Privatzation) संबंधी नीतियों (Policies) के खिलाफ देशभर में जारी बैंककर्मियों के आंदोलन (Strike) का असर मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में भी दिख् रहा है। बैंककर्मियों ने बैंकों को बंद कर जगह-जगह प्रदर्शन (Protest) करना शुरू कर दिया है। इस हड़ताल को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सपोर्ट किया है। पढ़िए पूरी खबर-

#BankStrike : MP-CG में जोरदार प्रदर्शन, दिग्विजय सिंह का आंदोलन को समर्थन, देखिए वीडियो
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रायपुर/भोपाल। बैंकों के निजीकरण के विरोध में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, अंबिकापुर आदि शहरों में हड़ताल शुरू हो गया है, वहीं मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर, इंदौर, कटनी, होशंगाबाद में भी इसके असर दिख रहे हैं। बैंककर्मियों ने काम बंद करके निजीकरण के विरोध में हड़ताल करना शुरू कर दिया है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के 10 लाख कर्मचारी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ पिछले महीने से ही प्रदर्शन कर रहे हैं और अब 15 एवं 16 मार्च के बैंक कर्मचारियों ने बैंक बंद करके हड़ताल शुरू कर दिया है। सरकारी बैंकों के लाखों कर्मचारी सोमवार और मंगलवार को दो दिनों की हड़ताल पर रहेंगे। दो सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण के विरोध और कई अन्य मांगों को लेकर बैंक कर्मी हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल में ग्रामीण बैंक भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ की बात की जाए तो रायपुर,बिलासपुर सहित कई जगह प्रदर्शन जारी है। हड़ताल के पहले दिन बैंककर्मियों ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर सहित राज्य के कई प्रमुख शहरों में अपने-अपने हिसाब से प्रदर्शन किया है। रायपुर में मोतीबाग में बड़ा प्रदर्शन किया गया है। सेंट्रल बैंक एम्प्लाइज यूनियन के छत्तीसगढ़ महासचिव शक्ति सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि इन आंदोलनों के बाद भी अगर केंद्र सरकार अपने निजीकरण के फैसले को वापस नही लेती तो बैंक यूनियन विशेषकर युवा बैंकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का मन बना चुके हैं। आज के प्रदर्शन में रायपुर व आसपास के 1000 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी पंजाब नेशनल बैंक मोतीबाग के प्रांगण में इकठ्ठा हुए व जोरदार नारों से अपना विरोध प्रदर्शित किया। शक्ति सिंह ठाकुर ने कहा कि निजीकरण ना केवल बैंक कर्मचारियों अपितु आम जनता के लिए भी अहितकारी होगी। चूंकि निजी कम्पनियां केवल लाभ के लिए कार्य करती हैं व उनका लोकहित के कार्यों से कोई सरोकार नही होता हैं। वहीं लोक उपक्रम बैंक्स सरकार की हर योजनाओं को आमजन तक पहुचाने का व बैंकिंग सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुचाने का कार्य करती हैं, इसलिए इस आंदोलन में ना केवल बैंक अधिकारी व कर्मचारी बल्कि आम जनता को भी अपना पूरा समर्थन देना चाहिए। उक्त आंदोलन में छत्तीसगढ़ बैंक एम्प्लाइज यूनियन के महासचिव शिरीष नलगुंडवार,एसबीआई से विजय बख्शी,शकील साजिद, सेंट्रल बैंक से अनिल साखरकर, बैंक ऑफ इंडिया से हर्षवर्धन बिष्ट, बैंक ऑफ बड़ौदा से विजय निमाणी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में स्ट्राइक कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार ने निजीकरण बंद करने की उनकी मांग नही मानी तो वो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण यहां पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक आफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, समेत तमाम सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों पर ताले लटके रह।

दो बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ आज सोमवार और मंगलवार को देशभर में बैंककर्मी हड़ताल पर रहेंगे। दो दिन बैंक बंद रहने से बैंकिंग (Banking) कामकाज प्रभावित रहेगा। हड़ताल के चलते बैंक शाखाओं में पैसा निकालने और जमा करने, चेक क्लीयरेंस और ऋण मंजूरी जैसी सेवाओं (Banking Services) पर असर पड़ेगा।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) बैनर के तले नौ यूनियन ने हड़ताल का आह्वान किया है। ऑल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने 10 लाख बैंककर्मियों के हड़ताल में शामिल होने का दावा किया है।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और केनरा बैंक (Canera Bank) समेत कई सरकारी बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों को जानकारी दे दी है कि सोमवार और मंगलवार को हड़ताल के चलते उनके कार्यालय और शाखाओं में कामकाज पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद बैंकों ने कहा है कि प्रस्तावित हड़ताल के दिन बैंकों और शाखों में बेहतर तरीके से कामकाज करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

दरअसल, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitaraman) ने बजट में ऐलान किया था कि सरकार ने इस साल दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी के निजीकरण का फैसला किया है। सरकार इससे पहले आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को बेच चुकी है। पिछले चार साल में सार्वजनिक क्षेत्र के 14 बैंकों का विलय किया जा चुका है।

वेंकटचलम ने कहा कि 4, 9 और 10 मार्च को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसलिए 15 और 16 मार्च को लगातार दो दिन हड़ताल का फैसला लिया गया है। बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी और अधिकारी इसमें हिस्सा लेंगे।

हड़ताल में यूनाइटेड फ्रंट और बैंक यूनियंस (UFBU) में ऑल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन (AIBOC) नेशनल कंफेडरेशन आफ बैंक इम्प्लॉइज (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक इम्प्लॉइज कंफेडरेशन आफ इंडिया (BEFI) शामिल हैं।

बैंकों के एटीएम हड़ताल के दौरान संचालित रहेंगे। शनिवार और रविवार को भी अवकाश के कारण बैंक बंद थे। इस कारण सेवाओं पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।

सार्वजनिक क्षेत्र की चारों जनरल इंश्योरेंस कंपनियों की सभी यूनियनों ने भी 17 मार्च को हड़ताल की घोषणा की है। LIC की सभी Unions 18 मार्च को काम बंद रखेंगी। देखिए इस खबर से संबंधित एक वीडियो-


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