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जानलेवा मेडिकल कॉलेज : शिशुओं की मौत पर डॉक्टरों की लीपा-पोती, मंत्री जी भी कर गए गोल-माल

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में सात बच्चो की मौत पर रविवार को जमकर बवाल मचा. इस दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव, जिले के प्रभारी मंत्री शिव डहरिया के साथ खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने अस्पताल का दौरा कर अपनी मौजूदगी तो दर्ज करा दी. लेकिन मासूम बच्चों की मौत की असल वजह भी सामने नहीं पाई.

जानलेवा मेडिकल कॉलेज : शिशुओं की मौत पर डॉक्टरों की लीपा-पोती, मंत्री जी भी कर गए गोल-माल
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अम्बिकापुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में सात बच्चो की मौत पर रविवार को जमकर बवाल मचा. इस दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव, जिले के प्रभारी मंत्री शिव डहरिया के साथ खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने अस्पताल का दौरा कर अपनी मौजूदगी तो दर्ज करा दी. लेकिन मासूम बच्चों की मौत की असल वजह भी सामने नहीं पाई. और ना ही किसी को दोषी ठहराया गया. ऐसे में बच्चों की मौत के कारण अब भी सवालों के घेरे में है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर मंत्री, डॉक्टर, जिम्मेदार और मौत के आंकड़े क्या कहते हैं. पढ़िए ये खास रिपोर्ट...

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मातृ एवं शिशु अस्पताल में 36 घंटे मे सात बच्चों की मौत हो चुकी थी. तो उस वक्त प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और प्रभारी मंत्री के आने की तैयारियां जोरों पर चल रही थी. लेकिन हमने उस दौरान मौत की असल वजह जानने का प्रयास किया. जिसके लिए हमने मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग की हेड ऑफ द डिपार्टमेंट डॉक्टर सुमन से सात बच्चों की मौत का कारण जाना. तो उन्होंने पहले बताया कि जिन सात बच्चो की मौत हुई है. इनमें से पांच बच्चे स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में भर्ती थे. जिसमें चार को मेडिकल कॉलेज के बाहर के हेल्थ सेंटर से लाया गया था. इसके अलावा अन्य जिन दो बच्चों की मौत हुई है. वो वार्ड में भर्ती थे. उनमें से एक डेढ़ महीने और एक आठ महीने का था.

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच 24.44 फीसदी की दर से 611 नवजातों की मौत एसएनसीयू वार्ड में उपचार के दौरान हुई थी. जबकि अप्रैल 2021 से 15 अक्टूबर के बीच. पिछले साढ़े सात महीने में ही मौत का आंकड़ा घटने के बजाय 27.99 फीसदी तक बढ़ गया. इस अवधि में 453 नवजातों की मौत हुई. पिछले साढ़े 19 महीने में 1064 नवजातों की मौत हो चुकी है. मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में सरगुजा सहित सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर व कोरिया जिले के गंभीर नवजात भर्ती होते हैं.

पूर्व में भी एसएनसीयू वार्ड में मौतें हुई, मगर 16 तारीख से महज कुछ ही घंटे के भीतर पांच बच्चों की मौत ने सबको हैरान कर दिया था. इधर इन आंकड़ों के बीच खुद स्वास्थ्य मंत्री भी एक साथ इतने बच्चों की मौत पर हैरान हैं. और उनके मुताबिक सामान्य स्थिति में एक साल में 400 बच्चों की मौत होती है. लेकिन अभी जैसे सात बच्चो की मौत हुई है. उसके हिसाब से साल में 1800 बच्चों की मौत के आंकड़े हैं.

स्वास्थ्य मंत्री ने इस संवेदनशील मामले को लेकर रायपुर स्तर की कमेटी से जांच कराने की बात कही है और जांच के बाद दोषिय़ो पर कार्रवाई की बात भी कही गई है. ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री के बाद बच्चों की मौत के ही मामले में अंबिकापुर पहुंचे. जिले के प्रभारी और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था और स्वास्थ्य अधिकारियों से अपडेट लेने के बाद मीडिया से कहा कि अस्पताल में कुछ कमियां है जिसे दूर कर लिया जाएगा. घटना की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी..

इधर बच्चों की मौत मामले को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने भी अपना विपक्षी धर्म निभाते हुए सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने बच्चों की मौत को दुर्भाग्य जनक बताते हुए ये आरोप लगाया है कि सरगुजा में संस्थागत प्रसव में कमी है. जिम्मेदार लोग गंभीर नहीं हैं. इतना ही नहीं भाजपा की ओर से प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि इतने बड़े मामले में किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिससे इस घटना पर गंभीर सवाल खडे होते हैं.

इस मसले को लेकर परिजनों के द्वारा 16 अक्टूबर को अस्पताल के बाहर मुख्य मार्ग में प्रदर्शन और चक्काजाम कर दिया था. जब स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल में मामले की समीक्षा कर रहे थे तब भी मृत बच्चों के परिजनों ने रो रो कर अपनी आप बीती मंत्री जी को बताई थी. बहरहाल अब भी 30 बेड की क्षमता वाले स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट यानी की एसएनसीयू में क्षमता से ज्यादा बच्चों का इलाज किया जा रहा है. मतलब वार्ड बेड की कमी के कारण एक-एक वार्मर मशीन में दो-दो बच्चों को भर्ती किया गया है. ऐसे में प्रदेश की बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल तो उठता है.

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