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आंबेडकर अस्पताल में किलकारियां, 6 माह में 3 हजार डिलीवरी

कोरोना संक्रमण की दहशत के बीच भी आंबेडकर अस्पताल के गायनी विभाग में किलकारी गूंजती रहीं। यहां के चिकित्सकों ने मई से लेकर अब तक तीन हजार डिलीवरी कराई, जिसमें से तीन सौ से ज्यादा महिलाएं कोविड संक्रमित थीं। वर्तमान में गायनी विभाग का संचालन आंबेडकर अस्पताल के साथ जिला अस्पताल पंडरी में भी किया जा रहा है।

आंबेडकर अस्पताल में किलकारियां, 6 माह में 3 हजार डिलीवरी
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रायपुर. कोरोना संक्रमण की दहशत के बीच भी आंबेडकर अस्पताल के गायनी विभाग में किलकारी गूंजती रहीं। यहां के चिकित्सकों ने मई से लेकर अब तक तीन हजार डिलीवरी कराई, जिसमें से तीन सौ से ज्यादा महिलाएं कोविड संक्रमित थीं। वर्तमान में गायनी विभाग का संचालन आंबेडकर अस्पताल के साथ जिला अस्पताल पंडरी में भी किया जा रहा है।

अस्पताल के चिकित्सकों का दावा है कि मध्यभारत के समस्त मेडिकल कॉलेज की तुलना में अब तक आंबेडकर अस्पताल रायपुर में कोविड पॉजिटिव महिलाओं के सर्वाधिक संस्थागत प्रसव हुए हैं। केवल सितंबर में ही कोविड एवं नॉन कोविड को मिलाकर पंडरी अस्पताल एवं स्त्री रोग विभाग के कोविड क्षेत्र में लगभग 1000 प्रसव हुए हैं। यहां रोजाना चालीस से पचास महिलाओं की भर्ती होती है। डॉक्टरों की टीम पंडरी के जिला अस्पताल स्थित गायनी विभाग के अंतर्गत ओपीडी, आईपीडी और डिलीवरी के साथ आंबेडकर अस्पताल में कोविड पॉजिटिव महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी करा रही है। मई में आंबेडकर अस्पताल को जब विशेषीकृत कोविड अस्पताल बनाया गया, तब स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग का स्थानातंरण पंडरी जिला अस्पताल में कराया गया था। वर्तमान में यहां विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के साथ डॉ. रुचि किशोर, डॉ. अविनाशी कुजूर के नेतृत्व में दस डाक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

डॉक्टर मसीहा बनकर आये

मूलत: रीवा निवासी मिश्रा दंपति आंबेडकर अस्प्ताल के गायनी विभाग के डॉक्टरों की टीम के प्रति आभार प्रकट करते-करते हृदय से द्रवित हो उठते हैं। सीमा मिश्रा ने बताया कि तेज बारिश के बीच आधी रात प्रसव का दर्द उठा। मेरे घर पर उस वक्त मेरी 6 वर्षीय बेटी के अलावा कोई और नहीं था। मैंने 112 को आपात कालीन सहायता के लिये फोन किया। इसके कुछ देर बाद 112 की टीम हमें लेने के लिये आ गई थी। जिला अस्पताल पंडरी में डॉक्टरों ने रात को सीजेरियन ऑपरेशन कर मेरी सुरक्षित डिलीवरी कराई।

रिफरल सेंटर की वजह से दबाव

सभी डॉक्टर्स अथक परिश्रम कर रहे हैं और अपनी जान के जोखिम की परवाह न करते हुए मरीज़ों की सेवा कर रहे हैं। प्रायः बिस्तर शत-प्रतिशत भरे होते हैं, जिसके कारण कई बार बिस्तर खाली न होने की समस्या आती है। ऐसे में मरीजों व उनके परिजनों से धैर्य के साथ सहयोग पूर्ण रवैये की अपेक्षा की जाती है।

- डॉ. ज्योति जायसवाल विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग

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