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दम घुटने से हुई थी 47 गायों की मौत, और कोई कारण नहीं...

4 सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट में कही गई बात

दम घुटने से हुई थी 47 गायों की मौत, और कोई कारण नहीं...
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बिलासपुर. तखतपुर ब्लाक के मेड़पार में 47 गायों की मौत की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। चार सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि गायों की मौत दम घुटने से हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के एक दिन पहले यानि 24 जुलाई को गायों को ग्रामीणों की सहमति के बाद जर्जर पंचायत भवन में रखा गया था। 25 जुलाई को इन गायों को जंगल में छोड़ा जाना था, जिससे वे खड़ी फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। पशुओं को रखे गए कमरों का आकार छोटा हाेने और पशुओं की संख्या अधिक होने से पशुओं के सींग आदि से कमरों के खिड़की और दरवाजे बंद हो गए थे। पशुओं के गोबर व मूत्र विसर्जन के कारण उत्पन्न होने वाले गैस से दम घुटने से पशुओं की मौत होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

गौैरतलब है कि 25 जुलाई को तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मेड़पार में 47 गायों की मौत हो गई थी। मौत के कारणों की जांच के लिए कलेक्टर सारांश मित्तर ने एडीएम बीएस उइके की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया था। जांच समिति के अध्यक्ष व अतिरिक्त कलेक्टर ने कलेक्टर को रिपोर्ट सौंप दी है। इस कमेटी में पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के संयुक्त संचालक डॉ. आरके सोनवानी व उप संचालक कृषि शशांक शिंदे के साथ कोटा एसडीएम आनंद रूप तिवारी शामिल थे। मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है।

लगभग 20 ग्रामीणों से की गई पूछताछ

47 मवेशियों की मौत के मामले में कलेक्टर सारांश मित्तर द्वारा गठित जांच टीम ने गांव पहुंचकर करीब 20 ग्रामीणों का बयान भी लिया। सबसे महत्वपूर्ण बयान सरपंच पति रामकुमार मरकाम का रहा, क्योंकि उन्होंने ही बैठक लेकर निर्णय लिया था कि मवेशियों को पुराने पंचायत भवन के कमरे में रखा जाए। जांच अधिकारी को अपने बयान में उन्होंने बताया कि सभी की सहमति से मवेशियों को पंचायत भवन में रखने का निर्णय हुआ था। जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर घटना स्थाल का निरीक्षण करते हुए नजरी नक्शा तैयार कराया। पशु चिकित्सकों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अवलोकन कराने के साथ ही हिर्री थाने में दर्ज एफआईआर भी जांच रिपोर्ट के साथ संलग्न की गई है।

पीएम रिपोर्ट में भी जहरीली गैस ही कारण

25 जुलाई को जब मेड़पार के कांजीहाउस में गायों की मौत का मामला सामने आया तब पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त संचालक डा. आरके सोनवानी की अगुवाई में मौके पर ही कुछ गायों का पोस्टमार्टम किया गया था। पीएम रिपोर्ट में गोबर और मूत्र से निकलने वाली जहरीली गैस को मौत का कारण बताया गया था। कहा गया था कि जहरीली गैस से दम घुटा और 47 गायों की मौत हो गई। यह प्रदेश स्तर पर बड़ा मुद्दा बन गया था। विपक्षी दल भाजपा ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया तो जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भी राज्य सरकार को घेरा था।

फसलों को बचाने कमरे में किया बंद

जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि गायों की दम घुटने से हुई है और जांच में पशुओं की मौत के संबंध में अन्य कोई कारण या बिंदु सामने नहीं आ सके हैं। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दस्तावेजों और ग्रामीणों के साथ बातचीत में साफ हुआ है कि ग्रामीणों ने मिलकर आवारा बताए जाने वाले मवेशियों को पंचायत के जर्जर भवन के कमरे में बन्द कर दिया, ताकि खड़ी फसलों को बचाया जा सके। कमरा छोटा था और मवेशी अधिक थे, इसलिए इन्हें सांस लेने में परेशानी हुई।

दम घुटने से हुई गायों की मौत

जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। इसमें कहा गया है कि गायों की मौत दम घुटने से हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ग्रामीणों ने सहमति से फसल बचाने जर्जर भवन के कमरे में गायों को बन्द किया था। मामले में एफआईआर भी दर्ज है।

- डा. सारांश मित्तर, कलेक्टर

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