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प्रदेश में रोज 461 टन ऑक्सीजन उत्पादन, 21 हजार मरीजों को एक साथ संभाल सकेंगे अस्पताल

तीसरी लहर (third wave)की आशंका के बीच बड़ी खबर, प्रदेश में मेडिकल ऑक्सीजन(medical oxygen) का उत्पादन बढ़कर 461 टन रोजाना हुआ, अब 21 हजार मरीजों को ऑक्सीजन सीधे बेड पर पहुंचाई जा सकती है। प्रदेश में पिछले छह माह में 73 से अधिक आक्सीजन प्लांट (oxygen plants)अस्पतालों में ही तैयार कर लिए गए हैं। इनसे वहीं के सेटअप में कुल 15 हजार मरीजों को बिस्तर में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सकती है। पढ़िए पूरी ख़बर...

प्रदेश में रोज 461 टन ऑक्सीजन उत्पादन, 21 हजार मरीजों को एक साथ संभाल सकेंगे अस्पताल
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रायपुर: ओमिक्रॉन वैरिएंट (Omicron variant)के खतरे को देखते हुए रायपुर में चार हॉस्पिटल पंडरी जिला अस्पताल, माना, आयुर्वेदिक अस्पताल और आयुष यूनिवर्सिटी को अलर्ट मोड(alert mode) पर रखा गया है। केस बढ़े तो यहां मरीजों की भर्ती की जाएगी। इन चारों ही अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हो गए हैं। प्रदेश में प्राइवेट कंपनियों और अस्पताल दोनों के द्वारा मेडिकल आक्सीजन का उत्पादन(production of medical oxygen) हो रहा है। अस्पताल कंपनी मिलाकर दूसरी लहर के दौर में केवल 29 जगहों पर 386 टन से ज्यादा आक्सीजन उत्पादन किया जा रहा था। इसमें इंडस्ट्री के जरिए बनाई जा रही मेडिकल आक्सीजन 100 से 150 टन के लगभग थी। पड़ताल में पता चला है कि कोरोना की दूसरी लहर के पीक के गुजरने के बाद ही कोविड मरीजों की आक्सीजन जरूरत भी घटने लगी।

25 हजार मरीजों को सीधे बिस्तर पर रोजाना अक्सीजन

दूसरी लहर के पीक में प्रदेश में ऑक्सीजन उत्पादन 386.92 टन प्रतिदिन था, जो बढ़कर 461 टन हो चुका है। यही नहीं, प्रदेश के अस्पतालों में अभी 112 से अधिक आक्सीजन प्लांट निर्माणाधीन हैं। ये तीन-चार माह में चालू हो जाएंगे, उसके बाद 25 हजार मरीजों को सीधे बिस्तर पर रोजाना अक्सीजन पहुंचाई जा सकेगी, यानी यहां के अस्पतालों में इतने ऑक्सीजन बेड हो जाएंगे।

आयुर्वेदिक कॉलेज में भी प्लांट शुरु

शहर के बीचों बीच आयुर्वेदिक कॉलेज में भी प्लांट शुरु हो गया है। यहां एक वक्त में 400 से ज्यादा मरीजों के बिस्तरों तक आक्सीजन सीधे पहुंचाने का बंदोबस्त है।

माना प्लांट के जरिए 160 और आयुष यूनिवर्सिटी के प्लांट से 100 से ज्यादा बिस्तर तक आक्सीजन पहुंचाई जा सकती है।

जिला अस्पताल पंडरी प्लांट से 70 से अधिक मरीजों के बिस्तर तक सीधे आक्सीजन पहुंचाई जा सकती है।

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