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चौबीस घंटे जल आपूर्ति की योजना अटकी, फाइल में दबा मॉडल वार्ड का सपना, री-टेंडर की नौबत

स्मार्ट सिटी लिमिटेड का 73 करोड़ का प्रोजेक्ट

चौबीस घंटे जल आपूर्ति की योजना अटकी, फाइल में दबा मॉडल वार्ड का सपना, री-टेंडर की नौबत
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रायपुर. स्मार्ट शहर के रहवासियों को पीने का शुद्ध पानी 24 घंटे सातों दिन लगातार उपलब्ध कराने और पानी की खपत तय करने वाटर मीटर लगाने की अहम योजना 2 साल में रत्तीभर भी सरक नहीं पाई। रायपुर स्मार्ट सिटी ने इस योजना को धरातल पर लाने के लिए प्रयोग बतौर शहर की दो पानी टंकियों को इसमें शामिल किया है, मोतीबाग और गंज पानी टंकी। इन पानी टंकियों से कनेक्ट एरिया में 73 करोड़ खर्च कर लोगों को बिना किसी अवरोध के उनके घराें में शुद्ध पेयजल बारहों महीना पहुंचाना था। पहली बार में यह टेंडर निरस्त हो गया, अब री-टेंडर किया गया है।

9 वार्डों के 50 हजार हाउस होल्ड को मिलता लाभ

रायपुर स्मार्ट सिटी द्वारा एरिया बेस डेवलपमेंट के अंतर्गत आम जनता की मूलभूत जरूरत को पूरा करने के लिए बनाई इस योजना में शहर की दो पानी टंकियों को शामिल किया गया, जिसमें 9 वार्डों के 50 हजार नल कनेक्शनधारी को बारहों महीना चौबीस घंटे पीने के पानी लगातार आपूर्ति होती। वर्तमान में शहर के एक भी वार्ड को नगर निगम मॉडल वार्ड नहीं बना पाया, जहां चौबीस घंटे नलों से पीने का पानी मिलता हो।

पहला टेंडर निरस्त इसलिए री-टेंडर

प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों का कहना है, पहले जो प्रस्ताव बनाया गया उसमें 24 घंटे सातों दिन वाटर सप्लाई के प्लान में स्मार्ट रोड को भी जोड़ा गया था। चूंकि उस समय यह प्राेजेक्ट 400 करोड़ का हो गया। इसलिए व्यवहारिक दिक्कत को देखते हुए पहले टेंडर को निरस्त कर दिया गया। अब 73 करोड़ के नए प्रोजेक्ट के लिए री-टेंडर हुआ है।

दिल्ली से लेनी होगी स्वीकृति

दो साल पूर्व रायपुर स्मार्ट सिटी के द्वारा बनाया गया यह प्रोजेक्ट 73 करोड़ का है। नियमानुसार 50 करोड़ तक प्रोजेक्ट की प्रशासकीय स्वीकृति देने का अधिकारी स्मार्ट सिटी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को है। इससे ज्यादा के प्रोजेक्ट लागत हाेने पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद इन्हीं के माध्यम से दिल्ली की कमेटी में इस प्रस्ताव को रखना होगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही इस पर काम शुरू होगा।

री-टेंडर के बाद स्मार्ट सिटी के इंजीनियर इन चीफ के पास तकनीकी स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलने पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से प्रशासकीय स्वीकृति ली जाएगी। फिर बीओडी के माध्यम से दिल्ली की समिति के समक्ष स्वीकृति के लिए जाएगा।

- संजय शर्मा, प्रबंधक, सिविल, रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड

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