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हाथी का आशियाना बसाने दूसरी जगह शिफ्ट करने पड़ेंगे 191 गांव

लेमरू की जद में 23 कोल ब्लाक पूर्ण और पांच ब्लाक होंगे आंशिक प्रभावित

हाथी का आशियाना बसाने दूसरी जगह शिफ्ट करने पड़ेंगे 191 गांव
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रायपुर. लेमरू एलिफेंट योजना के लिए पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ कार्यालय ने बीते 30 सितंबर को एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के अनुसार लेमरू एलिफेंट परियोजना में 191 गांवों के प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। साथ ही लेमरू की जद में 23 कोल ब्लाक आने की बात कही गई है। साथ ही पांच कोल ब्लाक का उत्पादन आंशिक रूप से प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। उल्लेखनीय है कि हाथी के रहवास केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार ने 1 हजार 9 सौ 95 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल को चिन्हांकित कर लेमरू प्रोजेक्ट बनाना चाहती है।

लेमरू हाथी रिजर्व का क्षेत्र हसदेव और मांड नदी के जल ग्रहण क्षेत्र को शामिल कर बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वर्तमान में कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक हाथी रिजर्व का क्षेत्र 1995 वर्ग किलोमीटर है, जिसकी अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। इस क्षेत्र में मांड रायगढ़ कोल फील्ड के कोर क्षेत्र के 11 ब्लाॅक के साथ 10 किलोमीटर बफर क्षेत्र में 12 और कोल ब्लाॅक आ रहे हैं।

हसदेव अरण्य कोल फील्ड के दो कोल ब्लाॅक कोर में और 5 कोल ब्लाॅक का कुछ हिस्सा बफर क्षेत्र में आ रहे हैं। 1995 वर्ग किलोमीटर में बांगो बांध के उत्तर का हसदेव नदी जल ग्रहण क्षेत्र शामिल नहीं है, जबकि यह मिनी माता बांगो बांध के लिए अत्यंत महत्व का है। इसी तरह मांड नदी का भी महत्वपूर्ण जल ग्रहण क्षेत्र पूरी तरह वर्तमान रिजर्व में शामिल नहीं है, अतः रिजर्व क्षेत्र बढ़ाने का प्रस्ताव है।

कोयला उत्पादन, आपूर्ति में विपरीत प्रभाव नहीं पड़ने का दावा

लेमरू एलिफेंट योजना के तहत हाथी रिजर्व का क्षेत्रफल बढ़ाने से राज्य में कोयला उत्पादन और आपूर्ति में विपरीत प्रभाव नहीं पड़ने का वन अफसरों ने दावा किया है। वन अफसरों ने राज्य की वेबसाइट के हवाले से दावा किया है कि वर्ष 2010 में राज्य में 46 हजार 6 सौ 82 मिलियन टन कोयले का भंडार है। कोयला मंत्रालय की वेबसाइट पर 2018 के आंकड़ों के मुताबिक 57 हजार 2 सौ 6 मिलियन टन कोयले का भंडार छत्तीसगढ़ में है। सीएमपीडीआईएल के ताजा आकड़ों के हिसाब से यह भंडार 58 हजार 5 सौ 89 मिलियन टन है।

आजीविका पर नहीं पड़ेगा असर

लेमरू प्रोजेक्ट को लेकर वन अफसरों ने स्पष्ट किया है कि एलिफेंट रिजर्व बनने से ग्राम की संपत्ति, आजीविका या समुदायिक अधिकार पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही इन क्षेत्रों में लघु वनोपजों का संग्रहण भी जारी रहेगा। साथ ही हाथी रहवास क्षेत्र विकसित करने की धन राशि भी प्रतिवर्ष ग्रामसभा, ग्राम पंचायत को प्राप्त होगी। हाथी रिजर्व क्षेत्र के गठन से ग्रामीणों को भविष्य में विस्थापन से बचाने का दावा किया गया है।

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