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60 दिन में 17 हत्याएं, 80 फीसदी मामलों में परिचित और अपनों ने ही मार डाला

कोरोना लॉकडाउन के बाद अब हत्या और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर वारदातों में तेजी से इजाफा हुआ है। बीते दो महीने में दर्जनभर से अधिक हत्याएं हुई हैं, लेकिन इनकी समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हत्या और हत्या की कोशिश की वारदात को अंजाम देने वाले मृतक और आरोपी पहले से परिचित रहे हैं या फिर दोस्त व आपस में रिश्तेदार थे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

रायपुर. कोरोना लॉकडाउन के बाद अब हत्या और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर वारदातों में तेजी से इजाफा हुआ है। बीते दो महीने में दर्जनभर से अधिक हत्याएं हुई हैं, लेकिन इनकी समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हत्या और हत्या की कोशिश की वारदात को अंजाम देने वाले मृतक और आरोपी पहले से परिचित रहे हैं या फिर दोस्त व आपस में रिश्तेदार थे।

सबसे अहम है, हत्या और हत्या की कोशिश करने की वजह बड़ी रंजिश या विवाद भी नहीं रहा है। घरेलू विवाद, नशाखोरी, मामूली विवाद और चंद रुपयों को लेकर उपजे विवाद में आक्रोशित होकर हत्या की गई है। मरने वालों में हिस्ट्रीशीटर और निगरानी बदमाश भी शामिल हैं। दशकभर में पहली बार ऐसा मौका है, जब महज 60 दिनों में हत्याओं की इतनी वारदातें हुई हैं। हालांकि 90 फीसदी मामलों में आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

हर तीसरे दिन एक हत्या

पुलिस के मुताबिक रायपुर शहर से ग्रामीण इलाके तक बीते दो माह यानी सितंबर और अक्टूबर महीने में 17 हत्याएं हुई हैं। यही नहीं, धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने के भी करीब 17 केस हुए हैं। इस हिसाब से रायपुर जिलेभर में हर तीसरे दिन एक हत्या और हत्या की कोशिश की वारदात हुई है।

13 हत्याओं में दोस्त और रिश्तेदार

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक रायपुर जिलेभर में सितंबर व अक्टूबर में जो 17 हत्याएं हुई हैं, इनमें 13 हत्याएं ऐसी हैं, जिनमें आरोपी व मृतक दोनों पहले से परिचित थे या फिर दोस्त, रिश्तेदार थे। यही नहीं, जानलेवा हमले में भी 12 केस में आरोपी व मृतक परिचित या रिश्तेदार थे और मामूली बात पर आक्रामक होकर वारदात को अंजाम दिए थे।

अब बदमाशों की हाेगी गिरफ्तारी

अफसरों के मुताबिक अब क्राइम कंट्रोल करने पुराने गुंडा-बदमाश और निगरानी बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का सिलसिला शुरू हो गया। सभी सक्रिय बदमाशों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्यवाही कर जेल भेजा जाएगा, ताकि प्रोफेशनल क्राइम पर शिकंजा कसा जा सके।

अधिकतर आरोपी गिरफ्तार

जिलेभर में बीते दो महीने मेें 17 हत्याएं और 17 हत्या की कोशिश जैसी वारदातें हुई हैं। इनमें 80 फीसदी आराेपी और मृतक पहले से परिचित थे या फिर रिश्तेदार थे। 2-3 केस छोड़कर बाकी सभी मामलों में आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

-अजय यादव, एसएसपी, रायपुर

गांजा पीने के विवाद पर हत्या, दो गिरफ्तार

माना कैंप पुलिस ने देवव्रत विश्वास हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली है। गांजा पीते समय उपजे विवाद पर दोनों ने चाकू घोंपकर उसकी हत्या की थी। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया है। पुलिस का कहना है, आरोपी संजयनगर निवासी सजल कर्मकार और नहरपारा पचपेड़ीनाका निवासी दिनेश मानिकपुरी को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से बटनदार चाकू समेत अन्य सामान बरामद किया गया है। दोनों ने आरोपी की हत्या करना स्वीकार किया है। उनके खिलाफ केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

गांजा पीते समय हुआ विवाद

पुलिस के मुताबिक माना कैंप ब्लाक नंबर 11 निवासी देवव्रत विश्वास को उसके दोस्त राजा बाला और मानिक ने फोन कर बुलाया। वह स्कूटी सीजी 04-एलवी-8944 से कोविड सेंटर के पास पहुंचा। वहां उनके साथ शराब पी। इसके बाद वह घर जाने निकल गया। रास्ते में पुलिया के पास दोनों आरोपी गांजा पी रहे थे। मृतक वहां रुककर गांजा पीने लगा। इस दौरान उनके बीच विवाद हो गया। इससे आक्रोशित होकर मृतक वेदव्रत ने चाकू निकाल कर आरोपी सजल पर हमला कर दिया। इसके बाद आरोपी ने चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

गहरी नींद में सो रहे भतीजे की फूफा ने की हत्या, गिरफ्तार

धनेली गांव में फूफा ने अपने भतीजे पर टंगिया से हमला कर हत्या कर दी। पारिवारिक विवाद के बाद गहरी नींद में सो रहे भतीजे पर फूफा ने ताबड़तोड़ हमला कर मौत के घाट उतार दिया और फरार हो गया। शनिवार सुबह बिस्तर पर लाश देख परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। टीआई आरके पांडेय ने बताया कि धनेली गांव निवासी किरण तोंडर की उसके फूफा मयाराम गिलहरे ने टंगिया से हमला कर हत्या की है। आरोपी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से हत्या में प्रयुक्त टंगिया बरामद किया गया है।

गोठान में दोनों करते थे चौकीदारी

पुलिस के मुताबिक धनेली स्थित गोठान में किरण तोंडर और उसका फूफा मयाराम गिलहरे चौकीदारी का काम करते थे। आरोपी मयाराम गिलहरे शराब पीने का आदी था। शराब के नशे में अक्सर फूफा-भतीजे के बीच विवाद होता था। इससे परेशान होकर किरण तोंडर ने गांव के सरपंच से शिकायत की थी, जिससे सरपंच ने मयाराम गिलहरे को नौकरी से निकाल दिया। बाद में मयाराम के आग्रह करने पर सरपंच ने उसे नौकरी पर रख लिया था।

दूसरे दिन फिर हुआ विवाद

पुलिस के मुताबिक मयाराम के नौकरी पर आते ही दूसरे दिन शुक्रवार रात में फूफा-भतीजे के बीच फिर से विवाद हो गया। उनके बीच हाथापाई हो गई। इससे आक्रोशित होकर मयाराम ने किरण की हत्या करने की योजना बनाई। इसके बाद आधी रात गहरी नींद में सो रहे किरण के पास मयाराम टंगिया लेकर पहुंचा और उस पर ताबड़तोड़ हमला कर मौत के घाट उतार दिया।

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