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छत्तीसगढ़ में 15 फीसदी टीका बर्बाद, झारखंड में सबसे ज्यादा

देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी हो गई है। 24 घंटे में एक लाख से कम नए केस सामने आ रहे हैं। केंद्र सरकार कोराना कंट्रोल के लिए पूरा ध्यान टीकाकरण में लगा रही है। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के साथ टीके की बर्बादी रोकने की कवायद चल रही है। केंद्र ने राज्यों को टीके की बर्बादी रोकने को कहा है। इस बीच, जारी आंकड़ाें के अनुसार अब तक झारखंड में सबसे ज्यादा 33.95 फीसदी टीके की बर्बादी हुई है। वहीं छत्तीसगढ़ में 15.79 फीसदी टीके बेकार गए हैं।

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नई दिल्ली/रायपुर. देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी हो गई है। 24 घंटे में एक लाख से कम नए केस सामने आ रहे हैं। केंद्र सरकार कोराना कंट्रोल के लिए पूरा ध्यान टीकाकरण में लगा रही है। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के साथ टीके की बर्बादी रोकने की कवायद चल रही है। केंद्र ने राज्यों को टीके की बर्बादी रोकने को कहा है। इस बीच, जारी आंकड़ाें के अनुसार अब तक झारखंड में सबसे ज्यादा 33.95 फीसदी टीके की बर्बादी हुई है। वहीं छत्तीसगढ़ में 15.79 फीसदी टीके बेकार गए हैं।

केरल और पश्चिम बंगाल में मई माह में कोविड-19 रोधी टीकों की बिल्कुल भी बर्बादी नहीं हुई तथा दोनों राज्यों में टीकों की क्रमश: 1.10 लाख तथा 1.61 लाख खुराकें बचाई गईं। वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कोविड रोधी टीकों की सबसे ज्यादा 33.95 फीसदी बर्बादी झारखंड में हुई। आंकड़ों के मुताबिक केरल में टीकों की बर्बादी का आंकड़ा नकारात्मक 6.37 फीसदी रहा जबकि पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा नकारात्मक 5.48 है। टीकों की बर्बादी का आंकड़ा नकारात्मक होने का अर्थ है कि प्रत्येक शीशी में मौजूद अतिरिक्त खुराक का भी इस्तेमाल करना।

छत्तीसगढ़ में 15.79 फीसदी टीके बेकार गए और मध्य प्रदेश में 7.35 फीसदी टीके बर्बाद हुए। पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में क्रमश: 7.08 फीसदी, 3.95 फीसदी, 3.91 फीसदी, 3.78 फीसदी और 3.63 फीसदी तथा 3.59 फीसदी टीके बेकार गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई माह में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को 790.6 लाख टीकों की आपूर्ति की गई जिनमें से 610.6 लाख टीकाकरण में काम आईं। वहीं 658.6 लाख खुराकों का उपयोग हुआ और 212.7 लाख खुराकें बची। अप्रैल के मुकाबले मई में टीकाकरण कम रहा। तब 898.7 लाख टीकाकरण हुआ, 902.2 लाख का उपयोग हुआ और 80.8 लाख बच गए। भारत में 45 वर्ष से अधिक के 38 फीसदी लोगों को सात जून तक टीके की पहली खुराक दी गई। त्रिपुरा में यह आंकड़ा 92 फीसदी, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ में 65-65 फीसदी, गुजरात में 53 फीसदी, केरल में 51 फीसदी और दिल्ली में 49 फीसदी रहा। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 19 फीसदी, झारखंड और उत्तर प्रदेश में 24-24 फीसदी तथा बिहार में 25 फीसदी रहा।

देश में एक ही दिन में 94,052 नए केस

भारत में एक दिन में कोविड-19 के 94,052 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,91,83,121 हो गई। वहीं, बिहार के मृतक संख्या का एक बार फिर मिलान करने के बाद देश में 24 घंटे में संक्रमण से मौत के 6,148 मामले सामने आए, जिससे मृतक संख्या बढ़कर 3,59,676 हो गई। वैश्विक महामारी के कहर की शुरुआत से लेकर अभी तक एक दिन में संक्रमण से मौत के ये सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। बिहार ने अपने आंकड़ों का एक बार फिर मिलान किया और संक्रमण से राज्य में 9,429 लोगों की मौत की पुष्टि की है। देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या कम होकर अब 11,67,952 है ,जो कुल मामलों का चार प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मामलों में कुल 63,463 की कमी आई है। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर भी बढ़कर 94.77 प्रतिशत हो गई है।

कोरोना प्रसार में दिल्ली-मुंबई रहे सबसे आगे

देश में महानगरों के जरिए ही कोरोना ज्यादा फैला है। पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च ने देश के उन शहरों का एक मैप बनाया है, जहां कोरोना के तेजी से फैलने का खतरा रहता है। इसमें दिल्ली सबसे आगे रही। इसके बाद मुंबई, कोलकाता, आदि शहर रहे। आईआईएसईआर ने देश के 446 शहरों में अध्ययन कर यह मैप तैयार किया है। इन शहरों की आबादी एक लाख से ज्यादा है। इसमें उक्त महानगरों के अलावा बेंगलुरू, हैदराबाद और चेन्नई का नंबर आया। पुणे 10 वें नंबर पर रहा।

नड्डा बोले- दिसंबर तक उपलब्ध होंगे 200 करोड़ डोज

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि आज हर महीने देश में एक करोड़ टीकों का उत्पादन हो रहा है। जुलाई-अगस्त में यह बढ़कर छह से सात करोड़ हो जाएगा। सितंबर तक हमें उत्पादन 10 करोड़ टीके प्रतिमाह हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पहले देश में टीकों के केवल दो उत्पादक थे, जो अब 13 हो गए हैं और दिसंबर तक 19 हो जाएंगे। दिसंबर तक देश में 200 करोड़ टीके उपलब्ध होंगे। यह हमारा रोडमैप है।

केंद्र ने कहा, पहले अनुमति, फिर शेयर करें आंकड़े

इधर, केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को टीकों के भंडार और भंडारण के तापमान पर ई-विन के आंकड़े साझा करने से पहले अनुमति लेने की उसकी सलाह का मकसद विभिन्न एजेंसियों द्वारा इस सूचना का वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किए जाने को रोकना है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रम में इस्तेमाल विभिन्न टीकों के लिए, टीके के इस्तेमाल की प्रवृत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी और ऐसे टीकों के संबंध में तापमान संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल बाजार में हेरफेर करने के लिए किया जा सकता है। इसमें कहा गया है, यह गौर करने वाली बात है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय अब छह से अधिक वर्षों के लिए यूआईपी के तहत इस्तेमाल सभी टीकों के लिए ई-विन इलेक्ट्रॉनिक मंच का इस्तेमाल कर रहा है।

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