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कोरोना घटा तो डंप हुआ 10 करोड़ का सामान, इंजेक्शन और दवाइयां भी एक्सपायरी के करीब

वैश्विक महामारी बनकर पंद्रह माह तक आतंक मचाने वाले कोरोना के नियंत्रण में आने से इससे बचाव के लिए उपयोग किए जाने वाले मास्क, सेनेटाइजर जैसे करीबन दस करोड़ का सामान दवा बाजार में डंप हो गया है। केस कम होने के बाद इनकी पूछ-परख खत्म हो गई है। गोदामों में पड़ी सामग्री एक्सापायरी होने के कगार पर पहुंच रही है।

कोरोना घटा तो डंप हुआ 10 करोड़ का सामान, इंजेक्शन और दवाइयां भी एक्सपायरी के करीब
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रायपुर. वैश्विक महामारी बनकर पंद्रह माह तक आतंक मचाने वाले कोरोना के नियंत्रण में आने से इससे बचाव के लिए उपयोग किए जाने वाले मास्क, सेनेटाइजर जैसे करीबन दस करोड़ का सामान दवा बाजार में डंप हो गया है। केस कम होने के बाद इनकी पूछ-परख खत्म हो गई है। गोदामों में पड़ी सामग्री एक्सापायरी होने के कगार पर पहुंच रही है।

विशेषज्ञों ने कोरोना से बचाव के लिए मुंह और नाक को ढककर रखने और हाथों की लगातार सफाई पर जोर दिया था। इसके बाद अस्पतालों में उपयोग होने वाले मास्क और सेनेटाइजर का उपयोग आम लोगों ने शुरु कर दिया। रातों-रात इन सामानों की बिक्री सौ गुना तक बढ़ गई और बाजार से सामान गायब हो गए कारोबारियों ने इसका फायदा उठाकर अनाप-शनाप दामों में इसकी बिक्री की थी। करीबन पंद्रह माह तक कोरोना बचाव के लिए इस तरह के सामानों का उपयोग हुआ। इसके साथ इस वायरस से लड़ने के लिए विभिन्न तरह की इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाओं और बचाव के लिए उपयोग आनी वाली दवाओं की खपत बढ़ गई थी। डिमांड को देखते हुए दवा कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में कोरोना रक्षक सामानों स्टाक संजोकर कर रखा था। इस बीच कोरोना ढलान पर आ गया और केस कम होने के बाद लोगों ने बचाव के सामानों का उपयोग करना भी कम कर दिया। वर्तमान में दवा बाजार में दस करोड़ का कोरोना बचाव का सामान डंप पड़ा है। विशेषज्ञ मान रहे है कि तीसरी लहर आने की आशंका नहीं है, जिसकी वजह से उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। कंपनियों द्वारा कोरोना से बचाव के लिए सप्लाई किए गए वस्तुओं की वापसी का नियम नहीं है।

सरकारी गोदाम में भी

कोरोना के गंभीर मरीजों के बचाव के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन को जीवन रक्षक माना गया था। आठ सौ में मिलने वाले एक इंजेक्शन को लोग तीस से चालीस हजार रुपए में खरीद रहे थे। स्वास्थ्य विभाग ने सीजीएमएससी के माध्यम से इसकी खरीदी की और चालीस लाख से ज्यादा का इंजेक्शन अभी भी गोदाम में डंप पड़ा है।

डंप दवाएं

कोरोना से लड़ने लिए उपयोग की जाने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, आइवरमेक्टिन, जिंक, विटामिन-सी की दवाओं के अलावा बड़ी मात्रा में इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाओं की मांग नहीं है, जिसकी वजह से दवा गोदामों में यह डंप हो गई है।

डंप सामान

कोरोना बचाव के लिए प्रयोग किए जाने वाले एन-95, सर्जिकल मास्क, सेनेटाइजर, हैंड ग्लव्स, पीपीई किट का भी संक्रमण काल में काफी चलन था। उपयोग भी बंद होने की वजह से दवा बाजार में भी यह बड़ी मात्रा में जाम हो गया है।

मांग बिलकुल खत्म हो चुकी

कोरोना के केस कम हो जाने की वजह से इससे बचाव के लिए उपयोग किए जाने वाली दवाओं और अन्य वस्तुओं की मांग पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जिसकी वजह से करीबन दस करोड़ का सामान बाजार में डंप हो चुका है।

- लोकेश साहू, सचिव, जिला दवा विक्रेता संघ

दवा एक्सपायरी होगी

रेमडेसिविर इंजेक्शन उपयोग खत्म होने की वजह से बड़ी मात्रा में डंप हो चुकी है, जो अगले साल सितंबर में एक्सपायरी हो जाएगा। थोड़ी बहुत मांग सर्जिकल मास्क की ही रह गई है।

- संजय रावत, अध्यक्ष, रायपुर थोक दवा विक्रेता संघ

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