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तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर तंज, बोले राज्य सरकार युवाओं और बेरोजगारों के प्रति बेरहमी की पराकाष्ठा पार कर चुकी

राजद नेता तेजस्वी यादव और राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने पटना में नौकरी की मांग कर रहे छात्रों पर बिहार पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज पर निंदा जताई है। तेजस्वी यादव ने कहा कि अहंकारी नीतीश कुमार सरकार युवाओं व बेरोजगारों के प्रति बेरूखी व बेरहमी की पराकाष्ठा पार कर चुकी है।

nitish government has reached the culmination of ruthlessness towards youth and unemployed tejashwi yadav
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राजद नेता तेजस्वी यादव ने उठाया पटना छात्रों के साथ किये गये पुलिस बल प्रयोग का मुद्दा।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं राजद नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर बीते दिन पटना में नौकरी की मांग कर रहे छात्रों पर किये गये पुलिस बल प्रयोग पर नाराजगी जाहिर की है। तेजस्वी यादव ने कहा कि घोर अहंकारी नीतीश सरकार की बिहार के युवाओं व बेरोजगारों के प्रति बेरूखी व बेरहमी पराकाष्ठा पार कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि बीपीएससी द्वारा प्रकाशित विज्ञापन सं0-02/2017 में सहायक अभियन्ता पद पर नियुक्ति के लिये निकाले गए विज्ञापन के करीब तीन साल बीत गये हैं। वहीं उन्होंने कहा कि लेकिन अभी तक इसका रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया गया है। याद रहे बुधवार को पटना में बिहार युवा कांगेस अध्यक्ष गुंजन पटेल विभिन्न छात्रों के साथ बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान छात्रों पर पटना पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया, उन्हें हिरासत में लेकर जेल भी भेज दिया गया।



राजीव गांधी के दौर में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने को देशद्रोह नहीं माना जाता था: मनोज कुमार झा

राजद से राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का दौर याद किया। मनोज कुमार झा ने पूर्व पीएम राजीव गांधी के दौर को याद करते हुये कहा कि साल 1987 में देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उन्होंने आगे कहा कि हमने अपने प्रथम वर्ष के विभिन्न साथियों के साथ मिलकर उस समय सरकार के कई फैसलों के खिलाफ में सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा कि बैरिकेड तोड़ दिये गये। छात्र पुलिस से भी भिड़ गये थे। इस दौरान पुलिस ने छात्रों को हिरासत में भी लिया था। वहीं उन्होंने कहा कि लेकिन हम सभी प्रदर्शकारी छात्रों को देशद्रोही नहीं कहा गया था। मनोज झा ने कहा कि जब देश और देश की सरकार एक नहीं हुआ करती थी। यानि कि उस समय देश की सरकार के खिलाफ उठायी गई आवाज को देश के साथ नहीं जोड़ा जाता था।




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