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Sunday Special: नशे की लत को पूरा करने के लिए इस्तेमाल की जा रही सिर्फ 5 रुपये में मिलने वाली ये चीज!

Sunday Special: बिहार के सुपौल जिले में नशे की लत को लेकर चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। बिहार में पूर्ण रूप से शराबबंद है। वहीं जिले में नशे के आदी लोगों ने अन्य विकल्पों की ओर रूख कर लिया है। यहां नशे के लिए कफ सीरफ सुलेशन के साथ सनफिक्स का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। यह भी सामने आया हैं कि बच्चों को भी ये चीजें आसानी से अपनी ओर खींच रही हैं।

Sunday Special Youth using Sunfix to cater to drug addicts in Supaul district bihar crime news
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प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार (Bihar) में पूर्ण रूप शराबबंदी कानून (prohibition law) लागू है। इस कारण लोगों तक शराब (alcohol) पहुंचना काफी कठिन है। इसलिए नशे के आदी लोगों ने अपनी लत को पूरा करने के लिए नए विकल्प तलाश लिए हैं। ऐसी ही कुछ बातें बिहार के सुपौल (Supaul) जिले से सामने आ रही है। यहां के ग्रामीण युवाओं (rural youth) के बीच नशे की प्रवृत्ति (drug addiction) खतरनाक तरीके से बढ़ी है। कई तौर से नशे के आदी हो चुके युवक इसे हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा पहुंचते हैं। मीडिया रिपोर्ट से ज्ञात होता है कि इससे पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ सामाजिक, छिनतई, छेड़छाड़, चोरी और व्यभिचार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ग्रामीण इलाकों में भी गली-गली पान मसाला, गुटाखा और सिगरेट आदि सहजता से पाप्त हो जाते हैं। ग्रामीण स्तर पर महुए संग अन्य रसायन के मिश्रण से तैयार होने वाली देशी शराब आसानी से व कम दामों पर उपलब्ध हो जाती है। इसके लिए लोगों को कहीं ज्यादा भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ती है। वहीं अब इसमें 5 रुपये की कीमत पर बिकने वाले सनफिक्स (sunfix) भी शामिल हो गया है।

जानकारी मिल रही है कि अन्य नशीले पदार्थों की तुलना में सनफिक्स की कम कीमत (low price of sunfix) युवाओं को काफी लुभा रही है। वैसे प्रशासन की तरफ से सनफिक्स की बिक्री के संबंध में कई तरह के नियम बनाए गए हैं। बावजूद इसके सनफिक्स सभी के लिए आसानी उपलब्ध हो रहा है। साथ ही इसका इस्तेमाल भी किया जा रहा है। कई दुकानदार 5 रुपये की जगह इस सनफिक्स की कीमत में करीब 10 से 15 गुने की वद्धि करके बेच रहे हैं। आपको बता दें सनफिक्स का खास तौर पर फाइबर चिपकाने के लिए प्रयोग किया जाता है। लेकिन अब सनफिक्स का प्रयोग (use of sunfix) नशे के लिए भी होने लगा है। बताया जाता है कि 5 रुपये के पैकेट में ही दूसरे नशीले पदार्थों के बराबर नशा हो जाता है।

बच्चों के बीच पैर पसार रही ये गलत आदतें

ऐसी बातें भी सामने आईं है कि शहरी व ग्रामीण इलाकों के स्कूली बच्चों व स्कूली छात्राओं व महिलाओं के बीच भी गुटखा, पान मसाला, धूम्रपान की लत बढ़ने लगी है। बेरोजगारी के आलम में मानसिक तनाव के शिकार लोग भी नशे की लत अपनाने लगे हैं। दर्जनों युवा नशे की लत की वजह से कई रोगों का शिकार होकर अकाल कलवित हो चुके हैं। दूसरी ओर सामाजिक संगठनों द्वारा नशा मुक्ति के लिए चलाए जा रहे अभियान एवं प्रयास भी इस प्रवृत्ति की रोक थाम की दिशा में अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। इसके खिलाफ में नशाबंदी व नशा विमुक्ति को लेकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है। डॉक्टरों के अनुसार नशे के तौर पर अलकोहल के ज्यादा सेवन से लीवर स्यानुतंत्र, दृष्टिहीनता की दिक्कत उत्पन्न हो सकती है। वहीं पान मसाला, गुटखा, कफ सीरफ, सुलेशन के सेवन से मुंह व फेफड़े का कैंसर जान लेवा साबित हो सकता है।

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