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Sunday Special : शेरशाह सूरी के मकबरे को दूसरा ताज महल करार देते हैं पर्यटक, जानें इनके कई अन्य बेहतर कार्य

सूरी वंश के संस्थापक शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में कई बेहतर कार्य किए। इसमें से ही एक है इनके द्वारा बनवाया गया मकबरा, जो बिहार के सासाराम में स्थित है। पर्यटक इसको देखते ही दूसरा ताज महल करार देते हैं। सूरी का जन्म पंजाब में रजवाड़ा नामक जगह पर हुआ था।

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सासाराम: शेरशाह सूरी का मकबरा

बिहार (Bihar) का रोहतास (Rohtas) जिला ऐतिहासिक धरोहरों व सूफी संतों के लिए प्रसिद्ध है। रोहतास जिले में हर 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर कोई ऐतिहासिक धरोहर (historic monuments) जरूर नजर पड़ ही जाती है। जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम (sasaram) में स्थित शेरशाह सूरी का विशाल मकबरा (Tomb of Sher Shah Suri) इन्हीं ऐतिहासिक धरोहर में से एक है। शेरशाह सूरी (Sher Shah Suri) का यह मकबरा 52 एकड़ तलाब के बीचो-बीच बनवाया गया है। विश्व की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक माना जाता है सूरी का यह मकबरा। सूरी का यह मकबरा सतह से 122 फीट ऊंचा है। जो खुद में भारतीय-इस्लामी वास्तुकला (Indo-Islamic Architecture) का एक बेजोड़ नमूना है। विश्व में बीजापुर के गुंबद के बाद शेरशाह सूरी के मकबरे का गुंबद दूसरे नंबर है। इस मकबरे को बनवाने में बड़े-बड़े बलुई लाल पत्थर का उपयोग किया गया है।

मकबरे के निर्माण का समय

बताया जाता है कि प्रसिद्ध अफगानी वास्तुकार मीर मोहम्मद अलीवालाग खान ने इस मकबरे की रूपरेखा तैयार की थी। शेरशाह सूरी के शासनकाल 1440 व 1445 ईस्वी के बीच अष्टकोणीय इस मकबरा का निर्माण शुरू हुआ था। शेरशाह सूरी के निधन के उपरांत उनके पुत्र इस्लाम शाह के शासनकाल में इस मकबरे का निर्माण पूरा हुआ।

ऐसे हुई थी शेरशाह सूरी की मौत

कहा जाता है कि जिस वक्त शेरशाह सूरी बिहार का सर्वे सर्वा बन गए। उस वक्त शेरशाह सूरी ने सर्वप्रथम अपने पिता हसन शाह सूरी का मकबरा बनवाया। जिसको नाम सुखा रौजा दिया गया। इसके बाद सूरी ने दिल्ली की सल्तनत संभाली। इस दौरान सूरी द्वारा अपने मकबरे का निर्माण शुरू करवाया गया। पर कालिंजर युद्ध के वक्त बारूदी सुरंग में फटने से शेरशाह सूरी का निधन हो गया। इनके निधन के बाद अधूरे मकबरे का निर्माण कार्य इनके बेटे इस्लाम शाह द्वारा पूर्ण करवाया गया।

शेरशाह सूरी के बारे में जानें

कहा जाता है कि पंजाब में रजवाड़ा नामक जहग पर सूरी वंश के संस्थापक शेरशाह सूरी का जन्म हुआ था। बचपन में इनका नाम फरीद खान था। शेरशाह सूरी बाबर के सैनिक थे। शेरशाह की कार्यकुशलता को देखकर बाबर द्वारा इनको अपनी सेना का सेनापति बना दिया गया। कुछ दिनों बाद शेरशाह सूरी को बिहार का सर्वे सर्वा बना दिया गया। शेरशाह सूरी ने 1940 ईस्वी में हुमायूं को हराकर भारत राज्य पर अपना आधिपत्य कायम कर लिया।

सूरी ने किए थे कई बेहर कार्य

शेरशाह सूरी द्वारा अपने शासनकाल में कई बेहतर कार्य किए गए। शेरशाह सूरी के शासनकाल में ही रुपए का चलन शुरू हुआ। डाक व्यवस्था बेहतर की गई। सूरी ने इस दौरान काबुल से लेकर बांग्लादेश तक लंबी सड़क बनवाई थी। जिसको वर्ततान में ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम से जाना जाता है। आज भी सासाराम में शेरशाह सूरी का मकबरा सूरी वंश के इतिहास को संजोए हुए है। यह मकबरा 52 एकड़ भूमि में फैले तालाब के बीचो-बीच में स्थित है। जिसको देखने के लिए हर वर्ष हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। जो देखते ही शेरशाह सूरी के इस मकबरे को दूसरा ताजमहल (second taj mahal) करार दे देते हैं।

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