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Bihar Assembly Elections 2020: राजीव रंजन प्रसाद बोले - एनडीए में सीट को लेकर कोई विवाद नहीं, उचित समय पर होगा साझा रूप से ऐलान

Bihar Assembly Elections 2020: जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा नीतीश कुमार को जनता ने स्वीकार किया है। लगातार स्नेह दिया है। इसके बाद सवाल का कोई मतलब नहीं बनता है। वहीं उन्होंने कहा कि एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है। एनडीए की ओर से साझा सीटों की घोषणा समय पर कर दी जायेगी।

rajiv ranjan prasad said that the joint seats will be announced on time by the nda
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जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद

बिहार में विधानसभा के चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं। वैसे ही सूबे में सियासी दलों की तैयारियां तेज होती नजर आ रही हैं। इसी कड़ी जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि एनडीए के सीटों को लेकर किसी भी तरह की बयानबाजी निरर्थक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को बिहार की जनता ने स्वीकारा है। साथ ही नीतीश कुमार को सूबे की जनता ने लगतार अपना स्नेह दिया है। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि इसके बाद किसी भी तरह के सवाल का कोई मतलब नहीं बनता है। राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर निःसंदेह एनडीए की ओर से साझा ऐलान समय पर कर दिया जाएगा। साथ ही राजीव रंजन ने दावा किया कि इस बार के विधानसभा चुनावा ने एनडीए 2010 के विधानसभा चुनावों से भी बेहतर प्रदर्शन करने जा रहा है। वहीं उन्होंने इस बार के विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन द्वारा करीब 220 सीटें जीतने का दावा किया है। आपको बता दें बिहार में विधानसभा की कुल 243 सीटें हैं।



राजीव रंजन प्रसाद ने राजग गठबंधन में जदयू को ज्यादा सीटें मिलने का संकेत दिया है। राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि वैसे तो हर पार्टी ज्यादा से ज्यादा विधानसभा की सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छायें रखती हैं। लकिन एनडीए में सीटों नि:संदेह सीटों के बंटवारे पर जनभावानाओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया जायेगा।

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने अन्य ट्वीट के माध्यम से विपक्षी महागठबंध पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब नीतीश कुमार महागठबंधन में नहीं हैं तो फिर महागठबंधन शब्द कहना ही गलत हे। राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि अब यह सिर्फ कुछ दलों का गठबंधन बनकर रह गया है और अब इसमें भी गांठें ज़्यादा हैं। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उनके सहयोगी दल ही सवाल उठा रहे हैं। इसके बाद विपक्षी महागठबंधन पर कहने के लिये कुछ भी शेष नहीं है।

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