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खेदारू मियां ने इंदिरा गांधी को सौंपा था सोने से भरा घड़ा, इनाम की भूमि मिलने का 40 वर्ष तक किया इंतजार, अब हो गई मौत

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा निवासी खेदारू मियां ने आज से 40 वर्ष पहले दिलेरी दिखाते हुए सोने से भरा हुआ घड़ा सरकार को सौंप दिया था। इसपर तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने 20 एकड़ भूमि बतौर इनाम दी। लेकिन खेदारू मियां 40 वर्ष इंतजार करते रहे। वहीं अब इनाम की जमीन की आस में ही उनकी मौत हो गई।

pm indira gandhi gave land patta as reward of honesty returning 10 kg gold Khedaru Miyan died after wait of 40 years for land bihar news
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खेदारू मियां (फाइल फोटो)

बिहार (Bihar) के पश्चिम चंपारण (West Champaran) के बगहा निवासी खेदारू मियां ने आज से 40 वर्ष पहले ऐसे ईमानदारी (Khedaru Mian's honesty) मिसाल पेश की थी। जिसकी चारों ओर चर्चा ओ गई थी। उस वक्त खेदारू मियां महज 30 वर्ष के युवा थे। वहीं खेदारू मियां एक बार फिर से चर्चाओं में आ गए हैं। क्योंकि अब वो नहीं रहे हैं।

जब आप भी खेदारू मियां के ईमानदारी की कहानी सुनेंगे तो हैरान हो जाएंगे। यह किस्सा 1980-81 का है। जब गोड़ियापट्टी के खेदारू नारायणपुर घाट रोड पर एक छोटी सी परचून की दुकान संचालित करते थे। इस बीच खेदारू मियां को अपनी दुकान के पीछे खंडहर में 10 किलोग्राम सोने से भरा हुआ घड़ा (pot of gold) मिली था। खेदारू मियां ने इसी जानकारी प्रशासन को भी दी। साथ मियां ने शर्त रखी कि वह इस सोने से भरे हुए घड़े को खुद अपने हाथों से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Prime Minister Indira Gandhi) को सौंपने की इच्छा रखते हैं।

खेदारू मियां की जिद पर प्रशासन ने तमाम व्यवस्थाएं कीं। इसके बाद खेदारू मियां ने दिल्ली पहुंचकर सोने से भरा हुआ घड़ा अपने हाथ से पीएम इंदिरा गांधी को सौंपा। खेदारू मियां की ईमानदारी की पीएम इंदिरा गांधी ने भी सराहना की और उन्हें बतौर इनाम 20 एकड़ जमीन का पट्टा दिया। इसके बाद वर्षों खेदारू मियां विभिन्न कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर काटे, पर खेदारू मिंयां को इमान की भूमि नहीं मिल सकी। बाद में खेदारू मियां ने इनाम की जमीन को हासिल करने के प्रयास भी छोड़ दिए। इसके बाद खेदारू मियां करीब 40 वर्ष से तंगहाली में जिंदगी की गुजर-बसर कर रहे थे। इस बीच सोमवार को खेदारू मियां का निधन (Khedaru Mian passes away) हो गया।

परिवार के मुताबिक खेदारू मियां को मदनपुर और नौरंगिया में 20 एकड़ जमीन का पट्टा इनाम में मिला था। लेकिन भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर रखा था। इस पट्टे को पाने के लिए खेदारू मियां जिलाधिकारी से लकर पुलिस अधिकारियों के पास तक पहुंचे। शुरू में तो जमीन पर अवैध अतिक्रमण की बात सामने आई थी। फिर उक्त भूमि को जंगल की जमीन बताकर खेदारू मियां को बैरंग लौटा दिया गया।

खेदारू मियां पड़ोस में रहने वाले सरदार मियां का कहना है कि तत्कालीन डीएसपी डीएन कुमार ने सोना समेत घड़ा प्रशासन को सौंपने को कहा था। पर खेदारू मियां ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। फिर खेदारू मियां को दिल्ली लेकर जाया गया। तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के साथ उसनी फोटो भी सभी ग्रामीणों ने देखी थी। रख-रखाव में कमी बरते जाने की वजह से वह तस्वीर अब खराब हो गई।

सोने का घड़ा मिलने के बाद भी बच्चे बनकर रह गए मजदूर

खेदरू मियां की पत्नी हदीसन खातून ने बताया कि जब पति को सोने से भरा हुआ घड़ा मिला था तो हमने पति से उस गगरी को रख लेने के लिए कहा था। पर पति ने ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सौंप दिया। उन्होंने इनाम में पति को जमीन भी दी थी। लेकिन इमान में मिली जमीन का आज तक कोई पता नहीं है। पति कहते थे कि बच्चों को पढ़ा-लिखाकर अधिकारी बनाएंगे। पर गरीबी के कारण सभी मजदूर बनकर रह गए।

परिजनों को भूमि दिलाने का किया जाएगा प्रयास

बगहा एसडीएम दीपक कुमार मिश्रा का कहना है कि यह केस काफी पुराना है। फिर भी मामले की जांच सीओ से कराई जाएगी। यदि खेदारू मियां को ईनाम में 20 एकड़ भूमि मिली होगी तो उस जमीन को परिवार वालों को दिलाने की कोशिश की जाएगी।

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