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CM नीतिश कुमार के करीबी आरसीपी सिंह का JDU ने किया पत्ता साफ, खीरु महतो को बनाया राज्यसभा प्रत्याशी

1984 बैच के आईएएस अधिकारी रहे आरसीपी सिंह (रामचंद्र प्रसाद सिंह) जेडीयू ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया है। उनकी जगह झारखंड के खीरू महतो को टिकट दिया गया है। खीरु महतो को प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा सोमवार को की गई है, लेकिन छह दिन पहले पूरा खाका पार्टी ने तैयार कर लिया था।

CM नीतिश कुमार के करीबी आरसीपी सिंह का JDU ने किया पत्ता साफ, खीरु महतो को बनाया राज्यसभा प्रत्याशी
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1984 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी रहे आरसीपी सिंह (रामचंद्र प्रसाद सिंह) जेडीयू(JDU) ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया है। उनकी जगह झारखंड (Jharkhand) के खीरू महतो को टिकट दिया गया है। खीरु महतो को प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा सोमवार को की गई है, लेकिन छह दिन पहले पूरा खाका पार्टी ने तैयार कर लिया था। 23 मई को पटना पहुंचे खीरू महतो ने जनता दल यूनाइटेड(JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार (National President Lalan Singh and Minister in charge Shravan Kumar) से मुलाकात की थी।

हालांकि, खीरु महतो का पटना दौरा अहम माना जा रहा था। माना जा रहा है कि दौरे के दौरान ही आरसीपी सिंह (RCP Singh) को टिकट कटने और खीरु महतो को प्रत्याशी बनाने की स्क्रिप्ट तैयार हुई थी। हालांकि, जिस तरह जेडीयू के कई नेता बीजेपी (BJP) में शामिल हुए थे। जिसको लेकर काफी चर्चाए चली। इन सभी के बीच ही खीरु महतो पटना पहुंचे थे। खीरु महतो पार्टी के सीनियर लीडर (Senior Leader) है। ये मांडू सीट से विधायक(MLA) भी रह चुके हैं। 2005 में इन्होंने जेडीयू के टिकट पर मांडू सीट से चुनाव(Election) लड़ा था। इसमें चुनाव के दौरान उनकी जीत हुई। नीतिश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) के भरोसेमं​द नेता भी माने जाते है। यहीं वजह है कि सितंबर 2021 में उन्हें झारखंड प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई।

यूपी कैडर से आईएएस रहे आरसीपी सिंह 1996 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा(Union Minister Beni Prasad Verma) के सचिव रहे थे। उसी दौरान ये नीतीश कुमार के संपर्क में आए। ये नीतिश कुमार के करीबी रहे हैं। यहीं वजह है कि रेलमंत्री(Railway Minister) बनने के साथ ही नीतिश कुमार उन्हें अपने विशेष सचिव बनाया। 2005 में नीतीश कुमार ने बिहार की कमान संभालते ही उन्हें प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंप दी। 2016 में आरसीपी सिंह को 2016 में दोबारा राज्यसभा भेजा था। यहां तक आरसीपी सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, जबकि नीतिश ने खुद ही इस्तीफा दिया था।

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