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कोरोना से सबसे कम उम्र के बच्चे ने तोड़ा दम, जानें JLNMCH में क्या बरती गई लापरवाही

बिहार में वैसे तो कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आ रही है। वहीं भागलपुर से सामने आई खबर ने सभी को चिंतित कर दिया है। क्योंकि यहां पर कोरोना महामारी से बिहार के सबसे कम उम्र के बच्चे ने दम तोड़ दिया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार (Bihar) में जहां कोरोना संक्रमण (corona infection) प्रभाव के कम होने की खबरें सामने आ रही थीं। वहीं अब कोरोना वायरस ने भागलपुर में नवजात शिशु को अपना शिकार (new born death due to corona) बना लिया है। इस मौत की अहम वजह अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार भागलपुर (Bhagalpur) जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Jawaharlal Nehru Medical College Hospital) के पीजी शिशु रोग विभाग में भर्ती 20 दिन के नवजात की कोरोना महामारी से मौत (death due to corona pandemic) हो गई। कहा जा रहा है कि बिहार में कोरोना महामारी से यह किसी नवजात की पहली मौत है। अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे मौत के बाद उसकी लाश को कोविड प्रोटोकॉल के तहत पैक कर परिवार वालों सौंप दिया। पीजी शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो के डॉ आरके सिन्हा ने बताया कि बिहार में यह पहला मामला है, जिसमें कोई 20 दिनों का नवजात शिशु कोरोना वायरस की चपेट में आया व उसकी जान चली गई।

अररिया जिले के पीरनगर के रहने वाले राहुल कुमार की पत्नी को 20 दिनों पहले पुत्र पैदा हुआ था। करीब 10 दिन पहले शिशु की मां ने देखा कि बच्चे की सांस फूल रही है व खांसी और ठंड भी है। इसपर तुरंत परिजन नवजात को लेकर पूर्णिया सदर अस्पताल पहुंचे। यहीं पर बीमार नवजात को भर्ती कर दिया गया। यहां पर एंटीजन रैपिड किट से बच्चे की कोरोना जांच की गई। जिसमें शिशु कोरोना संक्रमित मिला। शिशु की हालत को देखते हुए उसे जेएलएनएमसीएच रेफर किया गया। नवजात को लेकर परिजन चार जून को मायागंज अस्पताल पहुंचे। वहीं पर बच्चे को पीजी शिशु रोग विभाग के नीकू (नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट) वार्ड में डॉ सतीश कुमार की यूनिट में भर्ती किया गया। विभागा अध्यक्ष प्रो डॉ आरके सिन्हा के अनुसार जिस समय नवजात को भर्ती कराया गया था। उसका पल्स रेट कम व ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल (एसपीओटू) 97 फीसदी था। 10 जून को नवजात की आरटीपीसीआर जांच कराई गई। जिसमें भी शिशु कोरोना पॉजिटिव पाया गया। शिशु को लगातार ऑक्सीजन पर रखा जा रहा था। ऑक्सीजन फ्लो कम रहने व फेफड़ों में वायरस होने की वजह से शुक्रवार आधी रात को नवजात का एसपीओटू लेवल 65 फीसदी हो गया। काफी प्रयास किए गए, पर शिशु ने शनिवार तड़के 2:10 बजे दम तोड़ दिया।

वेंटिलेटर की कमी के चलते हुई मौत

जेएलएनएमसीएच के पीजी शिशु रोग विभाग में कोरोना संक्रमित शिशु के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं है। यहां की व्यवस्थाओं का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि यहां पर बुखार नापने के लिए थर्मामीटर तक मौजूद नहीं है। ऐसे में यदि किसी नवजात या शिशु का बुखार मापना होता है तो थर्मामीटर किसी और विभाग से लाया जाता है। यही नहीं, यहां पर बच्चों के लिए सेक्सन मशीन, विंग मशीन, ग्लोकोमीटर नहीं हैं। एबीजी मशीन की मांग हुई है, लेकिन अभी तक इंतजार है। गत दो महीनों से यहां लगे दो वेंटिलेटर खराब पड़े हैं। कई बार अफसरों ने भरोसा दिया, पर अभी तक ये वेंटिलेटर ठीक नहीं हो सके हैं। ऑक्सीजन का प्रेशर जो मरीज को मिलना चाहिए, यहां वो नहीं मिल रहा है। ऑक्सीजन फ्लो काफी कम होने के कारण यहां मरीज को जरूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है।

एजेंसी की भारी लापरवाही भी आ रही सामने

यही नहीं, पीजी शिशु रोग विभाग को ऑक्सीजन सही तरह से मिले इसके लिए प्वाइंट को जोड़ने का कार्य किया जाना चाहिए। 7 दिन का समय एजेंसी को दिया गया था पर एजेंसी संचालक सामान दिल्ली तो कभी अन्य जगहों से लाने की बात कहकर कार्य को टाल रहा है। स्थिति यह है कि 6 महीने पहले जो मशीन इलाज के लिए मुहैया कराई गई थी, उसमें ज्यादातर खराबी आ चुकी है। चौंकाने वाली बात तो ये है कि जिस एजेंसी ने मशीन उपलब्ध कराई थी। अब उसी एजेंसी को एक बार फिर से कार्य दे दिया गया है।

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