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बिहार चुनाव 2020 : विपक्षी दलों ने दिल्ली में उठाया कोरोना के बिगड़े हालातों का मुद्दा, आयोग ने कहा कि आप ही बताएं

विपक्षी दलों ने दिल्ली में चुनाव आयोग को ज्ञापन देकर बिहार में बिगड़ते कोरोना वायरस का हवाला देते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। साथ मांग की है कि ऐसा व्यवस्था करें जिससे लोगों का स्वास्थय और लोकतंत्र दोनों सुरक्षित रह सकें। वहीं आयोग ने कोरोना के दौर में प्रचार और पब्लिक मीटिंग कैसे हो इस पर सियासी दलों सुझाव मांगा है। सियासी दल 31 जुलाई तक अपना सुझाव भेज सकते हैं।

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चुनाव आयोग कल लॉन्‍च करेगा डिजिटल वोटर कार्ड

विपक्षी दलों ने दिल्ली में चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर सभी राजनीतिक पार्टियों को समान मौके देकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है। ज्ञापन में कोरोना संक्रमण की भयावह हालात का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि अक्टूबर-नवंबर में बिहार में संक्रमितों की संख्या 10 लाख होगी। बिहार के 13 करोड़ लोगों में 7.5 करोड़ मतदाता हैं, जिनके बीच दो गज की दूरी सुनिश्चित करनी होगी।

ऐसे में आयोग बिहार के लोगों को भरोसा दे कि पूरी चुनाव प्रक्रिया कोरोना संक्रमण के विस्फोट की वजह नहीं बनेगा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि बिहार में तेजी से बिगड़ते हालात के तहत स्वास्थ्य विशेषज्ञ और भागीदारों की राय को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करे। ऐसी प्रणाली का प्रबंध करे, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ लोकतंत्र की भी रक्षा हो सके।

विपक्षियों ने कहा चुनाव खानापूर्ति के तौर पर नहीं, संपूर्णता में हो। बिहार में 34 फीसदी लोगों के पास ही स्मार्ट फोन है। ऐसे में वर्चुअल चुनाव प्रचार अभियान को वैधता प्रदान करना मजाक व लोकतंत्र के प्रति अक्षम्य अपराध है। आयोग से पूछा गया कि क्या इससे स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव संभव है? प्रतिनिधिमंडल में राजद के साथ कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (एमएल), आरएलएसपी, वीआईपी, हम (से), एलजेडी के नेता भी शामिल रहे।

आयोग ने भी कोरोना महामारी के दौर में बिहार विधानसभा के चुनाव में प्रचार व पब्लिक मीटिंग को लेकर सियासी दलों से सुझाव मांगा है। आयोग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के अध्यक्ष एवं महासचिव से कहा कि 31 जुलाई तक वे अपने सुझाव आयोग को भेज दें। आयोग की सबसे बड़ी चिंता इसको लेकर है कि कोरोना महामारी के दौर में बिहार में सियासी दल, प्रत्याशी चुनाव प्रचार कैसे करेंगे। उनकी सभाएं कैसे होंगी। राजनीतिक दलों के सुझाव के आधार पर ही आयोग चुनाव प्रचार व पब्लिक मीटिंग के लिए गाइडलाइन तैयार करेगा। आयोग ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत कई गाइडलाइन व दिशा-निर्देश जारी किया गया है।

राज्य सरकार ने अपने स्तर से भी कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए कई निर्देश व गाइडलाइन जारी किए हैं। कुछ अति आवश्यक गाइडलाइन भी जारी किए गए हैं, जैसे- पब्लिक प्लेस पर मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंस, पब्लिक प्लेस पर निर्धारित दूरी का पालन करना। यहां तक कि एक जगह पर लोगों की भीड़ इकट्ठा करने पर भी रोक है। लोगों के जुटान वाले स्थान पर थर्मल स्कैनिंग व सेनेटाइजेशन को भी आवश्यक किया गया है। आयोग ने कहा कि बिहार में विधानसभा का चुनाव और कुछ उपचुनाव 2020 में होने हैं।

आयोग ने प्रत्येक बूथ पर वोटरों की संख्या तय

बिहार विस चुनाव में इस बार एक बूथ पर करीब 700 वोटर ही होंगे। कोरोना संक्रमण, सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर ही चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया है। अभी तक मतदान केंद्रों पर 1000 या उससे अधिक वोटर हुआ करते थे। राज्य में ऐसे मतदान केंद्रों की संख्या 33000 से अधिक थी। लेकिन कोरोना के कारण आयोग ने प्रत्येक बूथ पर वोटरों की संख्या तय कर दी है।

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