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AES : मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम पीड़ित पहला मरीज मिला, स्वास्थ्य विभाग चिंतित

AES: गर्मी की शुरुआत होने से पहले ही बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम 'एईएस' ने दस्तक दे दी है। इस साल में पहला एईएस पीड़ित मरीज पारू प्रखंड से सामने आया है। मुजफ्फरपुर के एसकेएमसी 'SKMC' अस्पताल की ओर से इस बात की पुष्टि की गई है।

AES : मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम पीड़ित पहला मरीज मिला, स्वास्थ्य विभाग चिंतित
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 मुजफ्फरपुर एसकेएमसी अस्पताल

AES: गर्मियों की दस्तक के साथ ही बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। मुजफ्फरपुर जिले के पारू प्रखंड (Paru Block) में इस साल का पहला एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम 'एईएस' पीड़ित मरीज मिला है। जिससे जिला प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। मुजफ्फरपुर के एसकेएमसी अस्पताल (SKMC Hospital Muzaffarpur) ने इस बात की पुष्टि की है।

मुजफ्फरपुर के एसकेएमसी (SKMC) अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीएस झा ने बताया कि बीते गुरुवार को बाल रोग विभाग में एक बच्चा एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम पीड़ित बच्चा पाया गया। उन्होंने बताया कि एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से निपटने की तैयारियों को लेकर 24 फरवरी को एक समीक्षा बैठक होगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पारू प्रखंड के रहने वाले 2.5 वर्षीय बच्चे आकाश कुमार को करीब 3 दिनों पहले एसकेएमसीएच में ईलाज के लिए भर्ती कराया गया था। बच्चे को उसके परिजन तेज बुखार और चमकी से ग्रस्त होने पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे।परिजनों के बताए अनुसार बच्चे को 3 दिनों पूर्व अचानक बुखार आया था। साथ ही आकाश को चमकी भी आनी शुरू हो गई। बच्चे की स्थिति बिगड़ती देख परिजन उसको तुरंत एसकेएमसीएच अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने बच्चे का ब्लड और अन्य सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे। सैंपल रिपोर्ट देखने के बाद जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सतीश कुमार ने आकाश कुमार में एईएस के लक्षण पाए जाने की पुष्टि की। वहीं बच्चे का ईलाज चल रहा है और उसकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

आपको बता दें मुजफ्फरपुर जिले में प्रति साल बच्चों पर इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम बीमारी कहर बनकर टूटती है। जिसकी वजह से विभिन्न बच्चे बीमार हो जाते हैं। इसके अलावा एईएस की वजह से कई बच्चों की मौतें भी हो जाती हैं। दूसरी ओर एईएस बीमारी का अभी तक कोई मूल कारण नहीं खोजा गया है। बीते साल में बीमार बच्चों की जांच में माइटोकांड्रियाक्षतिग्रस्त होना पाया गया था। इस साल भी इस बीमारी पर रिसर्च करने के लिए जोधपुर और पटना एम्स की टीमें आएंगी। इसके अलावा जिला प्रशासन भी एईएस बीमारी से निपटने के लिए अभी से तैयारियों में जुट गया है। जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर के एसकेएमसी अस्पताल में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) को लेकर आगामी 24 फरवरी को एक समीक्षा बैठक होगी।

साल 2019 में 167 बच्चों की हुईं थी मौतें

मुजफ्फरपुर जिले में साल 2020 में एईएस बीमारी से निपटने में कुछ हदतक सफलता हासिल हासिल हुई है। वर्ष 2020 में जिले में कुल 16 एईएस बीमारी से ग्रस्त मरीज सामने आए थे। जिनमें से 11 बच्चे स्वस्थ्य हो गए थे और तीन बच्चों की मौतें हो गई थी। साल 2019 में कुल 610 मरीज मिले थे। जिनमें से 443 बच्चे ठीक हो गए थे और 167 बच्चों की मौतें हो गईं थीं।

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