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गर्भावस्था में जरूर करना चाहिए योग, होते हैं ये कमाल के फायदे

नियमित योगाभ्यास गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को तो लाभ पहुंचाता है, इससे प्रसव के समय भी समस्या कम होती है। साथ ही गर्भावस्था के बाद भी स्वास्थ्य लाभ जल्द होता है। योग हर आयु वर्ग के लिए लाभकारी है।

गर्भावस्था में जरूर करना चाहिए योग, होते हैं ये कमाल के फायदे

नियमित योगाभ्यास गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को तो लाभ पहुंचाता है, इससे प्रसव के समय भी समस्या कम होती है। साथ ही गर्भावस्था के बाद भी स्वास्थ्य लाभ जल्द होता है। योग हर आयु वर्ग के लिए लाभकारी है। अगर गर्भवती महिलाएं भी कुछ विशेष आसन करें तो गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

साथ ही स्वयं गर्भवती महिला भी स्वस्थ रहती हैं। लेकिन गर्भवती महिलाओं को कुछ निश्चित योगाभ्यास किसी योग एक्सपर्ट की निगरानी में ही करना चाहिए। इसे करते वक्त सावधानी की जरूरत होती है। इस बारे में योगाचार्य ओशिन सतीजा पूरी जानकारी दे रहे हैं-

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सुखासन

विधि: नीचे बैठकर पालथी लगाएं। हाथों को गोद में या घुटनों पर रखें। पीठ, गर्दन और सिर सीधा रखें। इस अवस्था में अनुभव करें कि शरीर में स्थित सातों चक्रों से ऊर्जा निकल रही है और आपको उसका लाभ मिल रहा है। जब तक सहज हो, तब तक यह आसन करें।

लाभ: इससे मन शांत होता है, ऊर्जा का अनुभव होता है। शरीर निरोग रहता है। जिसका असर गर्भस्थ शिशु पर भी सकारात्मक पड़ता है।

तितली आसन

विधि: जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाएं। पीठ, बाहें सीधी रखें। अब घुटनों को मोड़कर तलवों को आपस में मिलाएं। दोनों हाथों से दोनों पैरों के पंजों को कसकर पकड़ें। कुछ इस तरह जिससे अंगुलियां आपस में क्रॉस हों। पैरों को तितली के पंखों की तरह ऊपर-नीचे हिलाएं। सहज श्वांस के साथ गति धीरे-धीरे बढ़ाएं। 15 बार करने के बाद सांस छोड़ते हुए पंजों को छोड़ दें, पैरों को फैलाकर विश्राम की स्थिति में लौट आएं। इस आसन को कमर दर्द, सायटिका, पीठ दर्द होने की स्थिति में न करें।

लाभ: यह आसन गर्भावस्था के तीसरे महीने से करना उपयोगी होता है। इससे शरीर लचीला होता है, शरीर के निचले हिस्से के तनाव में कमी आती है। यह आसन शरीर को प्रसव के लिए तैयार करता है।

पर्वतासन

विधि: हालांकि इसे खड़े होकर किया जाता है लेकिन गर्भवती महिलाएं इसे बैठकर भी कर सकती हैं। इसके लिए पहले सुखासन में बैठें। पीठ सीधी रखें। अब सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। हथेलियों से नमस्कार की मुद्रा बनाएं। कोहनी सीधी हों। कुछ समय इसी मुद्रा में रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं। दो-तीन बार ही ऐसा करें।

लाभ: इससे कमर दर्द में राहत मिलती है और प्रसव के बाद शरीर बेडौल नहीं होता।

उष्ट्रासन

विधि: जमीन पर घुटनों के बल खड़े हो जाएं। दोनों घुटनों, एड़ियों और पंजों को मिला लें। अब सांस भरते हुए, धीरे-धीरे शरीर को पीछे की ओर मोड़ते हुए दोनों हाथों से एड़ियों को छूने की कोशिश करें। ठोड़ी ऊपर की ओर और हाथ सीधे हों। सांस लेते हुए इस स्थिति में 30 सेकेंड से 1 मिनट तक रुकें। धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।

लाभ: इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, रक्तसंचार सुचारू रहता है और थकान का अनुभव भी नहीं होता।

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रखें ध्यान

  • गर्भ के शुरुआती तीन महीनों में खड़े रहने वाले योगासन करने चाहिए।
  • चौथे, पांचवें और छठें महीने के दौरान बहुत हल्के आसन करने चाहिए।
  • इन दिनों खासकर प्राणायाम, मेडिटेशन पर जोर दें।
  • गर्भावस्था के 10वें-15वें हफ्ते तक कोई भी योगासन न करें।
  • गर्भावस्था में पेट पर दबाव डालने वाले आसन से बचें।
  • नौकासन, हलासन, भुजंगासन, चक्रासन, विपरीत शलभासन और अर्द्धमत्स्येन्द्रासन न करें।
  • इनकी बजाय मार्जरिआसन, वीरभद्रासन, बद्धकोणासन, विपरीतकर्णी, कोणासन, ताड़ासन, शवासन और त्रिकोणासन करें।
  • यह सहज प्रसव में तो उपयोगी होते ही हैं, प्रसवोपरांत शीघ्र सामान्य होने में भी सहायक होते हैं।
  • कंधों और कमर के ऊपरी हिस्से को मजबूत करने वाली विधियों पर ज्यादा जोर दें।
  • यौगिक सूक्ष्म व्यायाम और पवन मुक्तासन समूह के आसन करना भी उपयोगी होता है।
  • ऐसे प्राणायाम भी कारगर हैं, जिनमें कुंभक न लगाना पड़ता हो।
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