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योग दिवस: पेट से जुड़ी हर समस्या से निजात दिलाएंगे ये योगासन

योग दिवस (21 जून, 2018) के मौके पर आज हम आपको कुछ खास योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे करने से पेट से जुड़ी हर समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। पाचनशक्ति से जुड़ी समस्या कब्ज का मतलब पेट के साफ न होने से है।

योग दिवस: पेट से जुड़ी हर समस्या से निजात दिलाएंगे ये योगासन
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योग दिवस (21 जून, 2018) के मौके पर आज हम आपको कुछ खास योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे करने से पेट से जुड़ी हर समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। पाचनशक्ति से जुड़ी समस्या कब्ज का मतलब पेट के साफ न होने से है। यह कोई बीमारी नहीं है, लेकिन लंबे समय तक इसका इलाज नहीं किया जाए, तो कई अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।

पेट के साफ नहीं होने के कई कारण होते हैं, जैसे- खाने में पौष्टिकता का अभाव, जंक फूड का अधिक सेवन, मैदे से बनी चीजों का सेवन और कम पानी पीना।

इससे निजात पाने के लिए खान-पान में सुधार के अलावा कुछ यौगिक क्रियाओं का नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है।

पश्चिमोत्तासन

  • इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं।
  • एड़ियां और अंगूठे दोनों पैरों के आपस में मिलाकर रखें।
  • लंबी गहरी श्वांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं।
  • अब श्वास छोड़ते हुए सामने की ओर झुक जाएं तथा दोनों हाथों से पैरों के अंगूठे को पकड़ कर कुछ देर रुकने का प्रयास करें।
  • माथा या फिर नाक को घुटने पर लगाने का प्रयास करें।
  • ध्यान रहे कि घुटना जमीन से ऊपर नहीं उठना चाहिए।
  • कुछ देर अपनी क्षमतानुसार रुकें, उसके बाद वापस आएं।
  • यह इस आसन का एक चक्र हुआ। कम से कम तीन चक्र का अभ्यास करें।

वज्रासन

  • इस आसन को खाना खाने के बाद भी किया जा सकता है।
  • सर्वप्रथम पंजे या एड़ियों के बल बैठें जाएं।
  • नितंब पंजों को स्पर्श करते हुए होने चाहिए।
  • कमर और गर्दन बिल्कुल सीधी रखें तथा दोनों हाथ दोनों जांघों पर रखें।
  • इस अवस्था में कुछ देर रुकें और फिर वापस आ जाएं।

इनके अलावा सूर्य नमस्कार, प्राणायाम में कपाल भांति, नाड़ीशोधन और भ्रस्त्रिका का अभ्यास किया जा सकता है। इन सभी आसनों को करने का सही तरीका पहले किसी योग्य और अनुभवी योगाचार्य से सीख लें तभी इनका अभ्यास करें।

धनुरासन

  • सर्वप्रथम पेट के बल जमीन पर सीधा लेट जाएं।
  • अब दोनों पैरों को घुटने से मोड़ लें तथा दोनों हाथों से दोनों पैरों के टखनों या अंगूठों को पकड़ें।
  • इसके बाद हाथों के सहारे पैरों के घुटने, जांघ तथा धड़ के ऊपरी भाग को कमर तक या फिर यथासंभव उठाने की कोशिश करें।
  • सांस की गति सामान्य रखें।
  • इस अवस्था में कुछ देर तक रुकने के पश्चात वापस पूर्व स्थिति में आएं।
  • यह इस आसन का एक चक्र हुआ। इस आसन का अभ्यास दो चक्र से लेकर पांच चक्र तक किया जा सकता है।

(ये रिपोर्ट डॉ. निधि गर्ग, आयुर्वेद-योगाचार्या से बातचीत के आधार पर बनाई गई है।)

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