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योग दिवस के मौके पर जानें गर्भावस्था में कैसे करना चाहिए योगाभ्यास

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2018) 21 जून को है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को योग दिवस के नाम से भी जाना जाता है। योग दिवस के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि गर्भावस्था में किस तरह योगाभ्यास करना चाहिए। गर्भावस्था में योगाभ्यास करना कई तरह की शारीरिक समस्याओं से छुटकारा दिला सकता है।

योग दिवस के मौके पर जानें गर्भावस्था में कैसे करना चाहिए योगाभ्यास

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2018) 21 जून को है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को योग दिवस के नाम से भी जाना जाता है। योग दिवस के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि गर्भावस्था में किस तरह योगाभ्यास करना चाहिए। गर्भावस्था में योगाभ्यास करना कई तरह की शारीरिक समस्याओं से छुटकारा दिला सकता है।

लेकिन इस दौरान योगासन करते हुए महिलाओं को सजग-सचेत रहने की भी जरूरत होती है। जानिए, गर्भावस्था में योग करने के फायदे और कुछ सावधानियों के बारे में।

यो ग न सिर्फ सामान्य महिलाओं के लिए लाभकारी है बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए भी कारगर है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान एक महिला में कई तरह के शारीरिक बदलाव आते हैं।

ऐसे में उन्हें कभी गैस की समस्या होती है, तो कभी जी मचलाता है, कभी भूख नहीं लगती है, तो कभी जलन की समस्या होती है।

ऐसी स्थिति में अगर गर्भवती महिलाएं योग करती हैं, तो न सिर्फ उनकी शारीरिक समस्याओं का निदान होता है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर होता है।

इसके अलावा गर्भावस्था में योग करने से महिला का तन और मन दोनों संतुलित रहता है। इतना ही नहीं योग से उनकी पाचन शक्ति बढ़ती है, मांसपेशियां मजबूत बनती हैं और हॉर्मोंस में वृद्धि होती है।

गर्भावस्था में योगासन

इन्हें करें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को हर तरह के योगासन करने से बचना चाहिए। कुछ ऐसे आसन हैं, जो प्रसव के पहले और प्रसव के बाद काफी कारगर होते हैं।

ये हैं- सुखासन, माजार्री आसन, उज्जायी सांस के साथ वज्रासन, ताड़ासन, कोणासन, शवासन, वीरभद्रासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तासन, बद्धकोणासन और विपरीतकर्णी आसन।

इन्हें न करें

गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसे आसन भी हैं, जिन्हें करने से बचना चाहिए। दरअसल, इन आसनों से गर्भवती महिला के पेट पर बल पड़ता है जो उनके गर्भ में पले रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। ये आसन हैं- नौकासन, चक्रासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, भुजंगासन, विपरीत शलभासन और हलासन।

सावधानियां

  • गर्भवती महिलाओं को योग करते हुए सामान्य लोगों की तुलना में अतिरिक्त सावधान रहना चाहिए।
  • इसके साथ ही किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही योगाभ्यास करना चाहिए।
  • अगर आप गर्भावस्था के शुरुआती महीने में हैं, तो ऐसे आसन न करें, जो मुश्किल हों और पेट के निचले हिस्से पर अधिक दबाव डालते हों।
  • गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के दौरान खड़े रहने वाले कुछ योगासन करने चाहिए, क्योंकि यह पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, शरीर में रक्त का संचार करते हैं।
  • ऊर्जा प्रदान करते हैं और प्ौरों में होने वाली अकड़न और सूजन को भी दूर करते हैं।
  • गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में ज्यादा फुर्तीले आसन नहीं करने चाहिए। केवल प्राणायाम और ध्यान करना चाहिए।
  • गर्भावस्था के 10वें से 14वें हफ्ते तक कोई भी योगासन नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान ऐसे आसन करें, जो आपके कंधे और कमर के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाएं।

(ये रिपोर्ट योग प्रशिक्षकों से बातचीत के आधार पर बनाई गई है।)

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