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बदलते मौसम में करें ये योगासन, कभी नहीं होगी कोई बीमारी

अभी गर्मी पूरी तरह नहीं आई है। ऐसे बदलते मौसम में कुछ बीमारियों के होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, जैसे-दमा, एलर्जी, जोड़ों में दर्द, खांसी, सर्दी-जुकाम आदि। आप कुछ योगासनों का नियमित अभ्यास कर इनसे बच सकते हैं।

बदलते मौसम में करें ये योगासन, कभी नहीं होगी कोई बीमारी

अभी गर्मी पूरी तरह नहीं आई है। ऐसे बदलते मौसम में कुछ बीमारियों के होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, जैसे-दमा, एलर्जी, जोड़ों में दर्द, खांसी, सर्दी-जुकाम आदि। आप कुछ योगासनों का नियमित अभ्यास कर इनसे बच सकते हैं। इस बारे में आरोग्य भारती संस्था से जुड़े योगोपचार डॉ. प्रशांत कुमार पूरी जानकारी दे रहे हैं।

आजकल के वातावरण, रहन-सहन और खान-पान की वजह से हमारी प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। ऐसे में मौसम में परिवर्तन के दौरान सतर्कता बरतना जरूरी है। अनुलोम-विलोम का अभ्यास इस मौसम में काफी उपयोगी हैं क्योंकि यह हमारे शरीर की नाड़ियों यानी सूक्ष्म ऊर्जा चैनलों को सक्रिय करता है। इसके अलावा कुछ योगासन का नियमित अभ्यास बहुत कारगर है।

भुजंगासन

भुजंगासन से दमा, गुर्दे और यकृत रोगों, कब्ज, गैस रोगों में विशेष लाभ होता है और सांस बेहतर चलती है। लेकिन रीढ़ की हड्डी के रोगी इसे न करें।

भुजंगासन विधि

  • पेट के बल लेटकर अपनी हथेली को कंधे की सीध में लाएं।
  • दोनों पैरों के बीच की दूरी बहुत कम रखते हुए और पैरों को सीधा एवं तना हुआ रखें।
  • अब सांस लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाएं।
  • ध्यान रहे कि कमर पर ज्यादा खिंचाव न आए। पूरी प्रक्रिया के दौरान सांस लेने और छोड़ने की गति धीमी रहे।
  • कुछ पल बाद गहरी सांस छोड़ते हुए पहले पेट, फिर छाती और अंत में सिर को जमीन से लगाकर प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • यह एक चक्र हुआ। शुरुआती दौर में इसे 3 से 4 बार करें लगभग 25 सेकेंड तक के लिए।
  • धीरे-धीरे प्रत्येक चरण में और कुल चक्रों की संख्या बढ़ाते जाएं।

मत्स्यासन

इससे श्वांस नलिका की उष्णता बढ़ती है और म्यूकस बाहर निकल जाता है तथा सांस लेना सहज हो जाता है। पेट रोगों, पाचन प्रणाली और अग्नाशय की परेशानी भी दूर होती है। लेकिन हाई बीपी, अल्सर, हर्निया और सिर दर्द के रोगी इसे न करें।

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मत्स्यासन विधि

  • सीधे लेटकर पद्मासन लगाएं। दोनों हाथ नितंबों के नीचे रखें।
  • गर्दन को मोड़कर माथा जमीन से लगाएं ताकि पीठ थोड़ा ऊपर उठ जाए।
  • अब पैरों के अंगूठों को पकड़ें और कुछ देर रुकें। कोहनियां जमीन से लगी रहें।
  • कुछ पल बाद गर्दन सीधी कर हाथों को फिर से नितंबों के नीचे रखें।
  • गर्दन और धड़ को ऊपर उठाकर गर्दन को बाईं-दाईं ओर 3-3 बार क्लॉक और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाएं।
  • धीरे-धीरे सांस लेते हुए सिर को पीछे की ओर ले जाएं फिर धीरे-धीरे छोड़ते हुए आगे लाएं।
  • पद्मासन खोलकर विश्राम करें। इस आसन से पूर्व सर्वांगासन कर लें तो लाभ और जल्दी होगा।

पवन मुक्तासन

इस आसन से हृदय और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं, पाचन बेहतर होता है और रक्तसंचार सुधरता है। पीठ-कूल्हे के दर्द और एसिडिटी में भी फायदेमंद है।

पवन मुक्तासन विधि

  • पैरों को साथ मिलाकर पीठ के बल लेटें और हाथों को शरीर के साथ जोड़ लें।
  • पहले गहरी लंबी सांस लें और फिर उसे छोड़ते हुए अपने दाएं घुटने को हाथों से पकड़ कर अपनी छाती और पेट पर दबाव बनाएं।
  • दोबारा से एक लंबी-गहरी सांस लेते और छोड़ते हुए अपने सिर और छाती को जमीन से उठाएं।
  • अपनी ठोड़ी को अपने दाएं घुटने से लगाएं। आसन में रहें और लंबी गहरी सांसे लेते रहें।
  • सांस छोड़ते हुए अपने घुटने को हाथों से कसकर पकड़ें।
  • सांस लेते हुए, ढीला छोड़ दे। सांस छोड़ते हुए, वापस जमीन पर आ जाएं और विश्राम करें।
  • यह प्रक्रिया बाए पैर से भी करें और फिर दोनों पैरों के साथ करें। 4-5 बार दुहराएं।

सेतु बंधासन

इस से पीठ की मास-पेशियां मजबूत होती हैं। यह उच्च रक्तचाप, ऑस्टियोपोरोसिस, साइनस, ऑस्टिओ आर्थरिटिस तथा फेफड़ों को खोलने तथा श्वास रोगों में विशेषलाभकारी हैं।

सेतु बंधासन विधि

  • पीठ के बल लेट कर घुटनों को मोड़ लें। घुटने और पैर एक सीध में रहें।
  • दोनों पैरों के बीच लगभग 10इंच का फासला हो। हाथ शरीर से सटे हुए और हथेलियां जमीन पर।
  • सांस लेते हुए, धीरे से अपनी पीठ के निचले, मध्य और फिर सबसे ऊपरी हिस्से को जमीन से उठाएं।
  • धीरे से अपने कंधों को अंदर की ओर लें। ठोड़ी को हिलाए बिना छाती को ठोड़ी से लगाएं।
  • इस दौरान शरीर के निचले हिस्से को स्थिर रखें। दोनों जांघें एक साथ रहें।
  • चाहें तो इस दौरान आप अपने हाथों के सहारे शरीर के ऊपरी हिस्से को उठा सकते हैं।
  • अपनी कमर को अपने हाथों कासहारा भी दे सकते हैं।
  • आसन को 1-2 मिनट बनाएं रखें और सांस छोड़ते हुए आसन से बाहर आ जाएं।
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