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जानिए योग से कैसे करें हाई बीपी कंट्रोल

बीपी की समस्या होने पर सबसे ज्यादा डाइट का ध्यान रखें। इसके साथ ही इसमें योगाभ्यास काफी सहायक होता हैं।

जानिए योग से कैसे करें हाई बीपी कंट्रोल

नई दिल्ली. बदलती कार्यशैली और खान-पान की आदतों से आजकल उच्च रक्तचाप यानी हाई बीपी की समस्या होना कॉमन है। अगर इसके प्रति सतर्क रहा जाए, तो आप इस समस्या से काफी हद तक बचे रह सकते हैं। अगर आपका ब्लड प्रेशर हाई रहता है, तो इसके लिए जरूरी है कि आप सबसे पहले किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों जैसे सिगरेट, बीड़ी या शराब से दूर रहें। बीपी की समस्या होने पर सबसे ज्यादा डाइट का ध्यान रखें। इसके साथ ही इसमें योगाभ्यास काफी सहायक होता हैं।

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चूंकि इससे हृदय-फेफड़ों की मांसपेशियां लोचदार रहने से हृदय में रक्तसंचार सहज होता है। योगाभ्यास से यह लोच चौबीस घंटे बना रहता है क्योंकि योग में शरीर गर्म नहीं किया जाता तथा शरीर के सामान्य तापमान पर ही दैनिक योगाभ्यास से लचीलापन आता है। यह अन्य व्यायाम की विधा में संभव नहीं है। अगर आपको हाई बीपी की शिकायत है तो स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए योगाभ्यास बहुत फायदेमंद साबित होता है। जानिए कुछ ऐसे आसनों के बारे में जो बीपी कंट्रोल रखते हैं।

अनुलोम-विलोम
कमर और गर्दन सीधी रखकर हवादार कमरे में बैठें। एक नथुने से धीरे-धीरे लंबी और गहरी श्वांस फेफड़ों में भरें और धीरे-धीरे दूसरे नथुने से लेने के दोगुने समय में बाहर निकालें। फिर उसी नथुने से श्वांस लेकर पहले वाले नथुने से धीरे-धीरे इसी प्रकार निकालें। इस प्रकार 1:2 के अनुपात में 10 से 15 बार श्वांस-प्रश्वांस नियमित करें।
बहुत लाभ होगा।
मार्जरासन
मार्जरासन करने के लिए चौपाए की तरह घुटनों और हाथों के बल जमीन पर हो जाएं। अब इसी अवस्था में गर्दन-कमर को ऊपर-नीचे कम से कम 10 बार करें। यह आसन हृदय और फेफड़ों की मांसपेशियों को लोचदार बनाता है।
शशकासन
इस आसन को करने के लिए पहले वज्रासन में बैठ जाएं। अब सामने झुकें। हाथों को लंबा रखें। माथा हो सके तो जमीन पर रखें। 10 से 15 बार श्वांस-प्रश्वांस लेने तक इसी स्थिति में रहने का प्रयास करें। यह आसन बीपी को नियंत्रण में रखने में बहुत लाभकारी है।
शवासन
शवासन एक मात्र ऐसा आसन है, जिसे हर आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं। यह करने में अत्यंत सरल भी है। पूरी सजगता के साथ किया जाए तो तनाव दूर होता है, उच्च रक्तचाप सामान्य होता है, अनिद्रा को दूर किया जा सकता है। श्वांस की स्थिति में हमारा मन शरीर से जुड़ा हुआ रहता है, जिससे शरीर में किसी प्रकार के बाहरी विचार उत्पन्न नहीं होते। इस कारण से हमारा मन पूर्णत: आरामदायक स्थिति में होता है, तब शरीर स्वत: ही शांति का अनुभव करता है।
आंतरिक अंग सभी तनाव से मुक्त हो जाते हैं, जिससे रक्त संचार सुचारू रूप से प्रवाहित होने लगता है और जब रक्त सुचारू रूप से चलता है तो शारीरिक और मानसिक तनाव घटते हैं। विशेषकर जिन लोगों को उच्च रक्तचाप और अनिद्रा की शिकायत है, ऐसे रोगियों के लिए शवासन अधिक लाभदायक सिद्ध होता है।
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