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बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं के हार्मोन्स में आते रहते हैं बदलाव, हर समस्या से निजात दिलाएंगे ये योग

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) (21 जून, 2018) की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस साल योग दिवस चौथी बार मनाया जाएगा। योग दिवस का प्रमुख कार्यक्रम उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होगा।

बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं के हार्मोन्स में आते रहते हैं बदलाव, हर समस्या से निजात दिलाएंगे ये योग

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) (21 जून, 2018) की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस साल योग दिवस चौथी बार मनाया जाएगा। योग दिवस का प्रमुख कार्यक्रम उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होगा। आज की इस रिपोर्ट में हम कुछ योग के बारे में बताने जा रहे हैं, जो महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

महिलाओं के शरीर में उम्र के साथ कई किस्म के हार्मोनल चेंजेज होते रहते हैं। यह नेचुरल प्रोसेस है।

लेकिन कई बार महिलाओं को बढ़ती उम्र और अंसतुलित जीवनशैली के कारण हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या न हो, इसके लिए कुछ योगासन प्रभावी हो सकते हैं। जानिए, इन योगासनों के बारे में।

सूर्य नमस्कार

हार्मोन को बैलेंस करने के लिए नियमित सूर्य नमस्कार का अभ्यास बहुत प्रभावी है। इससे पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है। साथ ही शरीर की सभी प्रणालियां जैसे पाचन, श्वसन, प्रजनन, तंत्रिका और अंतःस्रावी संतुलित रूप में काम करती हैं।

इतना ही नहीं, इस आसन के नित अभ्यास से मासिक धर्म भी नियमित रहते हैं। जब शरीर की विभिन्न ग्रंथियां और अंगों की कार्यप्रणाली व्यवस्थित हो जाती है, तो इससे शरीर में हार्मोन स्वतः ही बैलेंस हो जाते हैं।

इसके अतिरिक्त नियमित सूर्य नमस्कार से मानसिक शांति बनी रहती और तनाव के स्तर को भी कम किया जा सकता है। इसके साथ ही आपको बताते चलें कि तनाव भी हार्मोन को असंतुलित होने की एक बड़ी वजह है।

जब आप मानसिक रूप से रिलैक्स होते हैं, तो आपके शरीर में हैप्पी हार्मोंस रिलीज होते हैं, जो आपके हार्मोंस को बैलेंस करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रतिदिन सुबह सूर्य नमस्कार के सभी बारह अवस्थाओं का अभ्यास जरूर करना चाहिए।

शवासन

हार्मोनल बैलेंस के लिए शवासन का अभ्यास भी लाभकारी होता है। इससे आपकी बॉडी में रिलैक्सिंग इफेक्ट आता है। इसके लिए आप सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और शरीर को सीधा रखते हुए, उसे ढीला छोड दें।

इस बात का ध्यान रहे कि इस दौरान आपके शरीर में किसी भी प्रकार की हलचल न हो। साथ ही आपके दोनों पैरों के बीच कुछ दूरी होनी चाहिए।

दोनों हाथ बगल में सीधे होने चाहिए। आप कुछ देर इस अवस्था में रुकें। इस आसन से आपके शरीर को आराम मिलता है, रीढ़ की हड्डी का एलाइनमेंट भी ठीक होता है।

अनुलोम-विलोम

शवासन के बाद प्राणायाम करें। इनमें अनुलोम-विलोम काफी लाभकारी है। यह पूरे शरीर में रक्त और ऑक्सीजन के संचालन को दुरुस्त करता है, जिसके कारण आपके शरीर में हार्मोन का स्तर संतुलित रहता है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले स्वच्छ और हवादार जगह पर बैठ जाएं। अब अपने दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली को मोड़कर प्राणायाम मुद्रा बनाएं।

अपने दाएं हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें और बाएं नाक से गहरी सांस लें। सांस लेने के बाद बाईं तरफ के नाक को दबाएं और दाईं तरफ की नाक से सांस छोड़ें।

सांस छोड़ने के बाद बाईं तरफ की नाक से फिर दोबारा सांस लें। सांस लेने के दौरान दाईं तरफ की नाक बंद होनी चाहिए। गहरी सांस लेने के बाद दाईं तरफ की नाक से सांस छोड़ें।

अब इस प्रक्रिया को कम से कम बारह बार दोहराएं। इसके बाद इसी प्रक्रिया को विपरीत दिशा में कम से कम दस से बारह बार करें।

(ये रिपोर्ट मोहन कार्की, योग गुरू से बातचीत के आधार पर बनाई गई है।)

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