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दुनिया के ऐसे रहस्य जिन्हें आज तक कोई नहीं सुलझा सका

इन सभी जगह पर अभी भी रहस्य छिपा हुआ है।

दुनिया के ऐसे रहस्य जिन्हें आज तक कोई नहीं सुलझा सका

नई दिल्ली. आज हम आपको बताने जा रहे हैं दुनिया की कुछ ऐसे रहस्य के बारे में जिनके होने का रहस्य आज तक कोई नहीं सुलझा सका और जिसने भी कोशिश की उसका क्या हुआ हाल आप खुद ही जानिए...

“जैक द रिपर” नाम को अब तक न जाने कितनी फ़िल्मों, नाटकों और सीरियल्स में देखा और सुना जा चुका है। इस कुख्यात कातिल ने 18वीं सदी के अंत में लंदन पूर्व के इलाके में 11 औरतों को मौत के घाट उतार दिया था। उनमें से सारी उस जमाने की वैश्याएं हुआ करती थीं। यह बेहद ख़तरनाक कातिल उन औरतों के शरीर को इस कदर तहस-नहस कर देता था कि उन्हें कोई पहचान भी नहीं सकता था। मगर अचंभे की बात यह है कि इसे कभी भी पकड़ा नहीं जा सका।

वृंदावन- वृंदावन का एक मंदिर अपने आप ही खुलता और बंद हो जाता है। कहते हैं कि निधिवन परिसर में स्थापित रंगमहल में भगवान कृष्ण रात में शयन करते हैं। रंगमहल में आज भी प्रसाद के तौर पर माखन-मिश्री रोजाना रखा जाता है। मान्यता के अनुसार, यहां रात के समय कोई नहीं रहता है। इंसान छोड़िए, पशु-पक्षी भी नहीं। ऐसा बरसों से लोग देखते आए हैं, लेकिन रहस्य के पीछे का सच धार्मिक मान्यताओं के सामने छुप-सा गया है। यहां के लोगों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति इस परिसर में रात में रुक जाता है तो वह तमाम सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।

बरमूडा ट्रायएंगल- बरमूडा ट्रायएंगल के नाम से जाना जाने वाला यह इलाका। मियामी, बरमूडा और पोर्टो रिको के बीच पड़ता है। इस इलाके से गुजरने वाले पायलट बताते हैं कि यहां कई हवाई जहाज गायब हो चुके हैं, साथ ही कई पानी के जहाज भी समंदर में गायब हो चुके हैं। अलग-अलग लोग इसके लिए एलियन्स और गैसीय प्रेशर को जिम्मेदार ठहराते हैं, मगर अब तक इसके पीछे के वास्तविक कारण को कोई नहीं जान सका है।

बिगफुट- इसे लोग सासक्वैच के नाम से भी जानते हैं। नीगल् लोगों की मानें तो बिगफुट यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा के बर्फीले पर्वतों में रहने वाला जीव है। इसके रंगरूप को देख कर कुछ इसे गोरिल्ला बताते हैं, तो कुछ इसके चलने के अंदाज़ से इसे मानव बताते हैं, मगर ये अब तक रहस्य ही बना हुआ है।

असीरगढ़ का किला- महाभारत के अश्वत्थामा तो आपको याद होंगे। कहा जाता है कि अश्वत्थामा का वजूद आज भी है। दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया। ऐसा कहा जाता है कि पिछले लगभग 5 हजार वर्षों से अश्वत्थामा भटक रहे हैं। बुरहानपुर के अलावा मप्र के ही जबलपुर शहर के गौरीघाट (नर्मदा नदी) के किनारे भी अश्वत्थामा के भटकने का उल्लेख मिलता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कभी-कभी वे अपने मस्तक के घाव से बहते खून को रोकने के लिए हल्दी और तेल की मांग भी करते हैं। इस संबंध में हालांकि स्पष्ट और प्रामाणिक आज तक कुछ भी नहीं मिला है।

कैलाश पर्वत- इसे दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत माना जाता है। यहां अच्छी आत्माएं ही रह सकती हैं। इसे अप्राकृतिक शक्तियों का केंद्र माना जाता है। इसके साथ ही यहां हिम मानव को देखे जाने की चर्चाएं होती रहती हैं। इनका वास हिमालय में होता है। लोगों का कहना है कि हिमालय पर यति के साथ भूत और योगियों को देखा गया है, जो लोगों को मारकर खा जाते हैं।

एलियंस का रहस्य- वैज्ञानिक शोध से यह पता चला कि 10 हजार ई.पू. धरती पर एलियंसउतरे और उन्होंने पहले इंसानी कबीले के सरदारों को ज्ञान दिया और फिर बाद में फिर राजाओं को अपना संदेशवाहक बनाया और धरती पर कई सारे लाभ के काम किए। कोई कहता है एलियन हमारे लिए दोस्त की तरह है और किसी का मानना है एलियन का होना हमारे लिए किसी खतरे से खाली नहीं। न ही वैज्ञानिक और न ही किसी मनुष्य ने इसे अबतक देखा है यह भी अभी तक रहस्य बना हुआ है।

टाइम मशीन- टाइम मशीन अभी भी एक कल्पना बनी हुई है। ऐसा कहा जाता था कि वेज्ञानिको ने एक ऐसी टाइम मशीन बना ली है जिससे कोई भी मनुष्य अपने भूतकाल और भविष्य में जा सकता है। लेकिन आज तक इस टाइम मशीन को दुनिया के सामने नहीं लाया गया।

यम का द्वार- चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत में दारचेन से 30 मिनट की दूरी पर है यह यम का द्वार। ये पवित्र कैलाश पर्वत के रास्ते में पड़ता है। हिंदू मान्यता अनुसार, इसे मृत्यु के देवता यमराज के घर का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह कैलाश पर्वत की परिक्रमा यात्रा के शुरुआती प्वाइंट पर है। तिब्बती लोग इसे चोरटेन कांग नग्यी के नाम से जानते हैं, जिसका मतलब होता है दो पैर वाले स्तूप। ऐसा कहा जाता है कि यहां रात में रुकने वाला जीवित नहीं रह पाता। ऐसी कई घटनाएं हो भी चुकी हैं, लेकिन इसके पीछे के कारणों का खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।

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