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वर्ल्ड टीबी डे: जानलेवा हो सकता है ट्यूबरक्लोसिस, जानें टीबी के लक्षण-उपचार के बारे में सब कुछ

श्रीबालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली के रेस्पिरेटरी मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. ज्ञानदीप मंगल के मुताबिक अगर टीबी का समय पर उपचार नहीं किया जाए तो कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जिनमें एमडीआर (मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट) ट्यूबरक्लोसिस, मेनिंजाइटिस या सीएनएस टीबी, क्रोनिक या सुपरेटिव लंग डिजीज, हड्डी और जोड़ों की समस्याएं, लिवर और किडनी से संबंधित बीमारियां आदि शामिल हैं।

अन्य कारक कमजोर प्रतिरक्षा और स्वच्छता का अभाव हो सकता है, जिससे इस बीमारी को बढ़ावा मिलता है। इसलिए मजबूत प्रतिरक्षा बनाए रखने और टीबी के शिकार लोगों के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी जाती है।

स्वच्छता संबंधी कुछ सामान्य तरीकों जैसे खांसते वक्त अपने मुंह को ढंकना, भीड़-भाड़ वाली जगहों में थूकने से परहेज करना और उचित ढंग से चिकित्सा कराना आदि को अपनाया जाना चाहिए।

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