Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

वर्ल्ड टीबी डे: जानलेवा हो सकता है ट्यूबरक्लोसिस, जानें टीबी के लक्षण-उपचार के बारे में सब कुछ

रोग की पहचान, रोगी के मेडिकल हिस्ट्री और फिजिकल टेस्ट जिसमें लसिका ग्रंथियों की सूजन की जांच और स्टेथोस्कोप द्वारा श्वांस की आवाज के आधार पर होता है। इसके लिए सबसे अधिक प्रचलित टेस्ट में त्वचा, रक्त और बलगम की जांच तथा छाती का एक्स रे है।

ट्यूबरक्लोसिस क्रोनिक संक्रमण से होने वाली बीमारी है, जो शुरुआत में फेफड़ों को संक्रमित करती है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया द्वारा होती है। द्वितीय स्तर पर यह रक्त के माध्यम से लसिका ग्रंथियों, मेरुदंड और पेट को प्रभावित कर सकता है। अत्यंत कम स्थितियों में दूसरे अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।

Next Story