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सावधान ! बार-बार मुस्कुराने और बोलने में होने वाली परेशानी को कर रहें हैं इग्नोर, तो हो सकते हैं ब्रेन अटैक के शिकार

29 अक्टूबर को पूरी दुनिया में वर्ल्ड स्ट्रोक डे मनाया जाएगा। बहुत तनाव लेने, बीपी, शुगर और कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल में ना रखने और अपनी डाइट का ध्यान ना रखने पर आप ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन अटैक के शिकार हो सकते हैं। हालांकि यह बेहद घातक रोग है, लेकिन ऐसा होने पर उसके लक्षणों को पहचान कर समय रहते अगर सही ट्रीटमेंट करवाया जाए तो पेशेंट की जान बचाई जा सकती है। ब्रेन स्ट्रोक के बारे में जानिए विस्तार से।

सावधान ! बार-बार मुस्कुराने और बोलने में होने वाली परेशानी को कर रहें हैं इग्नोर, तो हो सकते हैं ब्रेन अटैक के शिकार

29 अक्टूबर को पूरी दुनिया में वर्ल्ड स्ट्रोक डे मनाया जाएगा। बहुत तनाव लेने, बीपी, शुगर और कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल में ना रखने और अपनी डाइट का ध्यान ना रखने पर आप ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन अटैक के शिकार हो सकते हैं। हालांकि यह बेहद घातक रोग है, लेकिन ऐसा होने पर उसके लक्षणों को पहचान कर समय रहते अगर सही ट्रीटमेंट करवाया जाए तो पेशेंट की जान बचाई जा सकती है। ब्रेन स्ट्रोक के बारे में जानिए विस्तार से।

आजकल की अनियमित जीवनशैली के कारण कम उम्र में ही न जाने कितने लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होने लगी हैं। भारत में जिस प्रकार हार्ट अटैक, कैंसर जैसे रोगों से हर साल लाखों लोग ग्रसित हो रहे हैं, उसी तरह से ब्रेन स्ट्रोक यानी मस्तिष्क आघात भी लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है।

पहले यह समस्या केवल वृद्धावस्था में ही देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मुख्य कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शराब, धूम्रपान और मादक पदार्थों की लत है। इसके अलावा आरामतलब जीवनशैली, मोटापा, जंक फूड का सेवन और तनाव भी इसकी संभावना को बढ़ाते हैं।

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स्ट्रोक का कारण

दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के न्यूरो-सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित होने या गंभीर रूप से कम होने के कारण स्ट्रोक होता है।

मस्तिष्क के ऊतकों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी होने पर कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं, जिसके कारण पेशेंट की मृत्यु या स्थायी विकलांगता हो सकती है।

इलाज में देरी होने पर लाखों न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और मस्तिष्क के अधिकतर कार्य प्रभावित होते हैं। इसलिए रोगी को समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान करना बहुत जरूरी है।

स्ट्रोक के लक्षण

पीएसआरआई हॉस्पिटल, दिल्ली के न्यूरो सर्जन डॉ. सुमित गोयल के अनुसार समय रहते स्ट्रोक के लक्ष्णों को पहचानना और जितनी जल्दी हो सके इसका इलाज करवाना जरूरी है। स्ट्रोक के लक्षणों को आसानी से पहचानने के लिए उसे एक शब्द ‘फास्ट’ (FAST) से प्रकट किया जा सकता है।

फ(F): (फेस) अगर व्यक्ति के फेस पर साइड स्ट्रोक के लक्षण दिखते हैं, उसे बोलने में दिक्कत होती है, तो उस व्यक्ति को जितना ज्यादा हो सके मुस्कुराना चाहिए, क्योंकि मुस्कुराने से हमारे फेस के सभी मसल्स मूवमेंट करते हैं।

•अ(A): (आर्म) व्यक्ति का अगर एक हाथ कमजोर या सुस्त हो, तो अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं और ये ध्यान दें कि क्या एक हाथ पूरी तरह से ऊपर जाने में असमर्थ है।

•स(S): (स्पीच) स्ट्रोक के लक्षणों में व्यक्ति को बोलने में काफी दिक्कत होती है। ऐसे व्यक्ति को एक ही वाक्य को बार-बार दोहराते रहना चाहिए। जब तक कि वह उस वाक्य का सही उच्चारण न कर ले।

•ट(T): (टाइम) अगर व्यक्ति में ऐसा एक भी लक्षण नजर आता है तो समय रहते किसी नजदीकी अस्पताल के स्ट्रोक यूनिट में अपना इलाज तुरंत करवाना चाहिए। समय पर इलाज करा लेने से बीमारी एक सीमित समय में ही दूर हो सकती है।

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उपचार

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजुल अग्रवाल के अनुसार इस्केमिक और हेमोरैजिक स्ट्रोक अलग-अलग कारणों से होते हैं, इसलिए इनके उपचार की विधियां भी अलग-अलग होती हैं।

1.इस्केमिक स्ट्रोक

इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार के लिए मेडिकेशन और सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है। इस स्ट्रोक में मुख्य रूप से रक्त के थक्के को तोड़ने या उसे आर्टरी से हटाने की कोशिश की जाती है, ताकि सेरीब्रल आर्टरी में दूसरे थक्के को बनने से रोका जा सके। इसके लिए एस्पिरिन और टिश्यू प्लाज्मिनोजेन एक्टिवेटर (टीपीए) इंजेक्शन दिया जाता है।

थक्के को खत्म करने में टीपीए बेहद असरकारक साबित होता है, लेकिन इस इंजेक्शन को स्ट्रोक के 4 घंटे के भीतर देना होता है। यह इंजेक्शन कैथेटर के जरिए सीधा मस्तिष्क यानी सेरीब्रल आर्टरी में दिया जाता है। इसके अतिरिक्त प्लैक को हटाने के लिए एंजियोप्लास्टी का भी इस्तेमाल किया जाता है।

हेमोरेजिक स्ट्रोक

इसके उपचार के लिए सबसे पहले मरीज को कुछ दवाइयां दी जाती हैं, ताकि मस्तिष्क के ऊपर पड़ने वाला दबाव कम हो, बीपी कम हो और रक्त नलिकाओं को सिकुड़ने से बचाया जा सके। इसके बाद रक्त नलिकाओं की मरम्मत करने के लिए सर्जरी की जाती है। ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक

इसके उपचार के लिए कैरोटिड एंडरटेरेक्टोमी का ही इस्मेमाल किया जाता है। इस सर्जरी के जरिए मरीज के सेरीब्रल आर्टरी में जमे रक्त के थक्के को बाहर निकाल लिया जाता है।

रहें अलर्ट

स्ट्रोक के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर ट्रीटमेंट मिलना है। एक स्ट्रोक के बाद हर दूसरे स्ट्रोक में तेजी से मस्तिष्क कोशिकाएं मृत होने लगती हैं, इसलिए स्ट्रोक होने पर रोगी को निकटतम उपचार केंद्र में जल्द से जल्द ले जाया जाना चाहिए।

बचाव के उपाय

1.बीपी, डायबिटीज और अपने वजन को नियंत्रण में रखें।

2.बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा के इस्तेमाल से बचें।

3.अपने आहार में फल और सब्जी भरपूर मात्रा में शामिल करें।

4.लो कोलेस्ट्रॉल और लो सैचुरेटेड फैट डाइट लें।

5.अल्कोहल का सेवन न करें।

6.स्मोकिंग से परहेज करें।

7.नियमित व्यायाम करें।

क्या कहते हैं आंकड़े

देश में हर साल ब्रेन स्ट्रोक के लगभग 15 लाख नए मामले दर्ज किए जाते हैं। स्ट्रोक भारत में समय से पहले मृत्यु और विकलांगता का एक महत्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है। इसके अलावा यह क्रोनिक एडल्ट डिसएबिलिटी का भी एक कारण है।

आंकड़ों के मुताबिक 100 में से लगभग 25 ब्रेन स्ट्रोक रोगियों की आयु 40 वर्ष से नीचे होती है। हार्ट अटैक के बाद यह दुनिया भर में मौत का दूसरा सबसे आम कारण है।

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