Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

वर्ल्ड स्ट्रोक डे 2015: जानिए ब्रेन स्ट्रोक के कारण-लक्षण और उपचार

यह ब्रेन में रक्त की आपूर्ति बाधित होने की वजह से होता है।

वर्ल्ड स्ट्रोक डे 2015:  जानिए ब्रेन स्ट्रोक के कारण-लक्षण और उपचार
X
सेरेब्रोवैस्कुलर एक्सिडेंट (एसीवीए), सरेब्रोवैस्कुलर इंसल्ट (सीवीआई), स्ट्रोक या ब्रेन अटैक के नाम से जाना जाता है। यह ब्रेन में रक्त की आपूर्ति बाधित होने की वजह से होता है। ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतने पर मस्तिष्क को बहुत ज्यादा क्षति पहुंच सकती है और यह मरीज के लिए घातक हो सकता है। यही वजह है कि स्ट्रोक होने पर शीघ्र उपचार कराने की जरूरत होती है। जानते हैं, बे्रन स्ट्रोक के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें।
प्रकार
इस्केमिक स्ट्रोक
यह स्ट्रोक का सबसे सामान्य प्रकार है। लगभग 85 प्रतिशत लोगों को इसी प्रकार का स्ट्रोक होता है। यह तब होता है, जब मस्तिष्क को जोड़ने वाली धमनी यानी आर्टरी बंद हो जाती है या संकरी हो जाती है। इस वजह से मस्तिक को पर्याप्त मात्रा में रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती है। आमतौर पर आर्टरी में इस तरह के अवरोध उत्पन्न होने का कारण रक्तका थक्का जम जाना होता है। रक्तका यह थक्का या तो मस्तिष्क को जोड़ने वाली आर्टरी में जम जाता है या फिर वह बहकर मस्तिष्क में पहुंच जाता है और वहां की आर्टरी को संकरा कर देता है। आर्टरी में जब फैट का जमाव, जिसे प्लैक कहते हैं, होता है तो रक्त के थक्के बन जाते हैं। यही थक्के ब्रेन अटैक का मुख्य कारण बनते हैं।
हेमोरैजिक स्ट्रोक
इस तरह के अटैक तब होते हैं, जब मस्तिष्क में स्थित आर्टरी से रक्त रिसने लगता है या आर्टरी फट जाती है। यह हेमोरैजिक रक्त मस्तिष्क की कोशिकाओं पर दबाव डालते हैं, जिससे वे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। हालांकि ऐसा मस्तिष्क के संपूर्ण भाग में नहीं होता है, बल्कि उसके मध्य भाग या सतह के पास होता है। ये रक्त नलिकाएं मस्तिष्क के मध्य भाग या उसकी सतह के पास फट जाती हैं या रिसने लगती हैं। इस कारण रक्त मस्तिष्क और स्कल के बीच स्थित जगह में बहकर जाने लगता है। आर्टरी के टूटने-फूटने का मुख्य कारण हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप, ट्रॉमा यानी दिमागी हलचल, रक्त को पतला करने वाली दवाइयों का सेवन और रक्त नलिकाओं के दीवार का कमजोर होना होता है।
ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए)
टीआईए इस्केमिक और हेमोरैजिक स्ट्रोक से अलग होता है। इस अटैक में केवल कुछ समय के लिए मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसमें इस्केमिक स्ट्रोक के समान ही आर्टरी में रक्त का थक्का बन जाता है। यह अटैक भी उतना ही गंभीर होता है, जितना बाकी दूसरे होते हैं, और इसके होने पर भी शीघ्र उपचार की आवश्यकता होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह स्ट्रोक भविष्य में होने वाले स्ट्रोक के लक्षण होते हैं, जो यह बताते हैं कि मरीज के मस्तिष्क की कोई आर्टरी आंशिक रूप से बाधित यानी ब्लॉक्ड है या फिर हृदय में रक्तका थक्का बन रहा है।
प्रमुख लक्षण
स्ट्रोक अचानक होता है और इसके लक्षण भी उसी समय बिना किसी पूर्व सूचना के दिखाई देते हैं। स्ट्रोक के मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं-
- मरीजों का दुविधा में होना और बोलने और किसी बात को समझने में परेशानी होना।
- सिरदर्द, कभी-कभी मरीज का अचेत हो जाना भी संभव है, उल्टी होना।
- चेहरा, बांह या पैर का सुन्न हो जाना और उसका एक ओर झुक जाना।
- एक या दोनों आंखों से दिखने में कठिनाई होना।
- चलने में परेशानी होना, शिथिल पड़ जाना और को-ऑर्डिनेशन की कमी होना।
उपचार
जैसा कि हम जानते हैं कि इस्केमिक और हेमोरैजिक स्ट्रोक अलग-अलग कारणों से होते हैं, इसलिए इनके उपचार की विधियां भी अलग-अलग होती हैं।
इस्केमिक स्ट्रोक: इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार के लिए मेडिकेशन और सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है। इस स्ट्रोक में मुख्य रूप से रक्त के थक्के को तोड़ने या उसे आर्टरी से हटाने की कोशिश की जाती है, ताकि आर्टरी में दूसरे थक्के को बनने से रोका जा सके। इसके लिए एस्पिरिन और टिश्यू प्लाज्मिनोजेन एक्टिवेटर (टीपीए) इंजेक्शन दिया जाता है। थक्के को खत्म करने में टीपीए बेहद असरकारक साबित होता है। लेकिन इस इंजेक्शन को स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने के 4 से 5 घंटे के भीतर देना होता है। यह इंजेक्शन कैथेटर के जरिए सीधा मस्तिष्क यानी ब्रेन की आर्टरी में दिया जाता है। कई बार सर्जन खुद ही कैथेटर के जरिए अपने हाथों से थक्के को उसकी जगह से बाहर निकाल देते हैंै। यह सर्जरी भविष्य में होने वाले स्ट्रोक और टीआईए से बचाव के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त प्लैक को हटाने के लिए सर्जन कई बार एंजियोप्लास्टी का भी इस्तेमाल करते हैं।
हेमोरैजिक स्ट्रोक: इस अटैक के उपचार के लिए सबसे पहले मरीज को कुछ दवाइयां दी जाती हैं, ताकि मस्तिष्क के ऊपर पड़ने वाला दबाव कम हो, बीपी कम हो और रक्त नलिकाओं को सिकुड़ने से बचाया जा सके। इसके बाद सर्जन रक्त नलिकाओं की मरम्मत करने के लिए सर्जरी करते हैं। इसके लिए रक्त नलिका की सतह पर छोटे क्लैंप्स डाले जाते हैं या फिर उसे डिटैचेबल क्वॉयल से भरा जाता है ताकि रक्त का बहना बंद हो सके और टूट-फूट से बचाव हो सके।
ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक: इस अटैक के उपचार के लिए भी डॉक्टर कैरोटिड एंडरटेरेक्टोमी का ही इस्मेमाल करते हैं। इस सर्जरी के जरिए मरीज के बे्रन आर्टरी में जमा रक्त के थक्के को बाहर निकाल लिया जाता है।
बचाव के उपाय
- निषेध की हुई दवाइयों (इलिसिट ड्रग्स) के इस्तेमाल से बचें।
- अपने आहार में फल और सब्जी भरपूर मात्रा में शामिल करें। लो कोलेस्ट्रॉल और लो सैटुरेटेड फैट डाइट लें।
- नियमित व्यायाम करें।
- बीपी नियंत्रण में रखें।
- डायबिटीज नियंत्रण में रखें।
- वजन नियंत्रण में रखें।
- अल्कोहल का सेवन न करें।
- स्मोकिंग से परहेज करें।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story