Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर डॉक्टर की राय, भूलकर भी इग्नोर ना करें ये लक्षण

नकारात्मक भावनाएं केवल मानसिक रूप से ही परेशान नहीं करती हैं बल्कि इनका शरीर के विभिन्न अंगों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इसे दबाना भी स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। जानिए भावनाएं किस तरह से स्वास्थ्य को प्रभावित करतीं हैं।

वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर डॉक्टर की राय, भूलकर भी इग्नोर ना करें ये लक्षण

नकारात्मक भावनाएं केवल मानसिक रूप से ही परेशान नहीं करती हैं बल्कि इनका शरीर के विभिन्न अंगों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इसे दबाना भी स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। जानिए भावनाएं किस तरह से स्वास्थ्य को प्रभावित करतीं हैं।

हमारे जीवन में भावनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। हम इन्हीं की बदौलत खुश रहते हैं और इन्हीं के चलते परेशान रहते हैं। भावनाएं भले अदृश्य हों या कुछ लोग उन्हें मनोवैज्ञानिक धारणाएं भर समझते हों, लेकिन हमारे समूचे वजूद में वे केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।

स्वास्थ्य पर उनका खास असर होता है। अच्छी भावनाएं जो हमें खुश रखती है, वे हमें सेहतमंद भी रखती हैं और गलत भावनाएं हमें तनाव और गुस्से से भर देती हैं, हमारी सेहत के लिए भी नुकसानदायक हैं।

इसलिए आज हम आपको वो खास तरीके बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को हमेशा हेल्दी रख सकती हैं।

यह भी पढ़ें : बदलते मौसम में गले के इंफेक्शन को करना है दूर , तो अपनाएं ये खास घरेलू नुस्खें

मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के खास तरीके :

1.सकारात्मक भावनाओं का करें स्वागत

हम अकसर अपनी भावनाओं को लेकर सजग नहीं रहते या दूसरे शब्दों में कहें तो उनकी तमाम बार अनदेखी करते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकती है।

देखा जाए तो हमारा शरीर एक ‘वाहन’ मात्र ही तो है। जिस तरह हम अपनी कार का रख-रखाव करते हैं, उसी तरह हमें अपने शरीर पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है। कहने का मतलब यह कि हमें खुश और स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक भावनाओं का स्वागत करना चाहिए।

2.नकारात्मक भावनाओं से दूर

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हमें ज्यादातर समय नकारात्मक भावनाओं के साथ गुजारना पड़ता है। ये हम पर इस कदर हावी रहती हैं कि हम चाहकर भी इनके दुष्प्रभाव से बच नहीं पाते। गुस्सा, चिंता, अवसाद, अपराधबोध, शर्म ये सभी भावनाएं हमारे अंदर एक अंतर्निहित डर से पैदा होती हैं।

ये सभी भावनाएं हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती हैं। इसकी पुष्टि विभिन्न स्टडीज से भी हुई है। आज जिस तरह की भागम-भाग वाली जीवनशैली है, उस कारण हम पर नकारात्मक भावनाएं ज्यादा हावी रहती हैं।

इससे हमारा मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसलिए ऐसी भावनाओं से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।

यह भी पढ़ें : इन तरीकों के सुपर फूड्स से आंखों को बनाएं हेल्दी

3.न दबाएं अपनी भावनाएं

कुछ भावनाओं को सामाजिक धारणाओं का हिस्सा बना दिया गया है। जैसे लड़कों के संबंध में कहा जाता है कि उन्हें रोना नहीं चाहिए। अगर वे किसी बात पर आहत होकर कभी रोने लगते हैं, तो इस पर न केवल उन्हें डांटा जाता है बल्कि उन पर व्यंग्य भी किया जाता है।

यही वजह है कि पुरुष अकसर अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते हैं। भावनाओं को इस तरह व्यक्त न कर पाने पर या उन्हें दबाकर रखने पर इसका सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

जब हम भावनाओं को किसी वजह से भी दबाते हैं, तो इससे ऐसा महसूस होता है, मानो हमारी समूची ऊर्जा खत्म हो गई हो।

4.शरीर पर भी दुष्प्रभाव

हमारी हर भावना का हमारे शरीर पर गहरा असर होता है। मसलन ज्यादा गुस्सा होने से इसका नकारात्मक असर हमारे लीवर पर पड़ता और लीवर संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। इसी तरह लगातार उदासी के घेरे में रहने से हमारे फेफड़े खराब हो जाते हैं।

इससे श्वास संबंधी समस्या होने लगती हैं। इसी तरह डर के चलते किडनी और बड़ी आंत की सेहत पर फर्क पड़ता है। इसका दुष्प्रभाव दिल पर भी पड़ता है। इससे हमारे कई अंग सुचारू रूप से काम नहीं कर पाते हैं।

कहने का मतलब यह है कि हमारी भावनाएं, हमारे स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित करती हैं इसलिए इनके प्रति भी हमें सजग रहना चाहिए।

Next Story
Top