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वर्ल्ड हेल्थ डेः ऐसे करें असली-नकली दवा की पहचान

इन दिनों नकली दवाओं यानी डुप्लीकेट मेडिसिन का कारोबार काफी बढ़ गया है। ऐसे में कहीं आप भी फेक दवा न खरीद लें, इससे बचने के लिए अलर्ट रहना जरूरी है। कुछ बातों का ध्यान रखकर इनसे बचे रह सकते हैं।

वर्ल्ड हेल्थ डेः ऐसे करें असली-नकली दवा की पहचान

बीते कई दिनों से लगातार थकान और कमजोरी महसूस करने के बाद बैंक कर्मी विनय कस्बे के एक नर्सिंग होम में गया। डॉक्टर ने चेकअप करने के बाद एडमिट होने की सलाह दी। विनय नर्सिंग होम में भर्ती हो गया। उसके परिजनों ने एक दवा की दुकान पर परचा दिखाकर दवाओं सहित सारा जरूरी सामान ला दिया। इंट्रावेनस ड्रिप शुरू कर दी गई।

लेकिन स्वस्थ होने की बजाय कुछ घंटों के बाद विनय को गंभीर डायरिया, सांस लेने में तकलीफ और तेज पेट दर्द की शिकायत हो गई। डॉक्टर ने पूरी कोशिश की, लेकिन विनय को बचा नहीं सके। अगले दिन सुबह ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। मृत्यु की वजह-मल्टीऑर्गन फैल्योर और टॉक्सिक शॉक बताया गया। डॉक्टर हैरान थे। जांच से पता चला कि दुकान से लाई गई एक दवा नकली थी, जो रक्त प्रवाह में घुलकर जान लेवा साबित हुई। ऐसी घटनाओं के बारे में आपने भी सुना या पढ़ा होगा।

नकली दवाओं का कारोबार

नकली दवाओं का नासूर हमारे देश में ही नहीं पूरी दुनिया में लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। विकासशील देशों में यह समस्या ज्यादा विकराल है। सरकारी रिपोर्ट का मानना है कि बाजार में उपलब्ध दवाओं में से 0.4 फीसदी नकली और करीब 8 फीसदी दवाएं निम्नकोटि की होती हैं।

लेकिन गैर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बाजार में मौजूद 12 से 25 फीसदी दवाएं नकली हो सकती हैं। मोटे अनुमान के अनुसार हर साल नकली दवाओं के सेवन से दुनिया में करीब 1 मिलियन लोगों की मृत्यु हो जाती है।

वर्ल्ड कस्टम ऑर्गेनाइजेशन की मानें, तो नकली दवा उद्योग 200 बिलियन डॉलर का है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ब्रांडेड दवाओं के नाम पर एक बड़ा हिस्सा (करीब 30 फीसदी) नकली माल बेचा जाता है।

क्या होता है इनमें

नकली या निम्न गुणवत्ता की दवा बनाने वाले बेहद चालाक होते हैं। ये लोग इस्तेमाल की जा चुकी सीरींज में पानी भर देते हैं, एक्सपायरी हो चुकी दवा पर नया लेबल लगा देते हैं या कैप्सूल में चॉक का पावडर भर देते हैं।

नकली दवाओं में या तो बीमारी का इलाज करने वाले तत्व पाए ही नहीं जाते या बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं। कई लालची कारोबारी इसमें हानिरहित चीजें मिलाते हैं, ताकि आसानी से पकड़ में न आएं।

कई बार असली दवा निर्माता द्वारा किसी गड़बड़ी की वजह से बाजार से वापस ली गई दवाएं भी इन कारोबारियों द्वारा दोबारा बाजार में पुश कर दी जाती है। एक मेडिसिन एक्सपर्ट बताते हैं, ‘आज से 10-15 साल पहले आमतौर पर महंगी दवाएं ही नकली बनाई जाती थीं लेकिन अब कफ सीरप, विटामिन सप्लीमेंट्स और पेन किलर दवाएं भी बहुतायत में डुप्लीकेट बनाई जा रही हैं।

रीसाइकल्ड हास्पिटल वेस्ट

नकली दवा के अलावा हानिकारक और जानलेवा रिसाइकल्ड हॉस्पिटल वेस्ट का धंधा भी बहुत चलता है। अस्पतालों से फेंकी गई दवाएं, सीरींज, रूई, तौलिए, ड्रिप चढ़ाने के सेट आदि कई चीजें नए रैपर और नई पैकिंग में लपेट कर फिर से बाजार में खपा दा जाती हैं, जिनसे संक्रमण फैलने की बहुत संभावना होती है। इनका इस्तेमाल करने पर प्रयोगकर्ता गंभीर रुप से बीमार हो सकता है या उसकी जान तक जा सकती है।

रहें सावधान

एक जागरूक उपभोक्ता के तौर पर नकली दवाओं से बचने के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं-

•-प्रतिष्ठित और पंजीकृत दवा विक्रेता से ही दवा लें।

•-दवा की खरीद पर बिल जरूर लें।

•-थोक भाव की दुकान पर सस्ती दवा मिलती हो लेकिन बिल न मिलता हो, तो हरगिज न खरीदें।

•-बिल पर दवा का बैच नं. और एक्सपायरी डेट जरूर लिखी हो, यह चेक कर लें।

-अविश्वसनीय डिस्काउंट पर दवा मिल रही हो, तो अलर्ट हो जाएं।

•-दवा की पैकिंग समुचित रुप से सील की हुई है या नहीं, चेक कर लें।

•-दवा की पैकिंग पर समस्त तथ्य मैनुफेक्चरिंग तिथि, एक्सपायरी तिथि और निर्माता का नाम-पता स्पष्ट रुप से लिखा है या नहीं देख लें।

•-लिखावट या स्पेलिंग गलत हो, तो सचेत हो जाएं।

•-दवा के सेवन के बावजूद आराम न मिल रहा हो या तकलीफ बढ़ गई हो तो डॉक्टर को दवा जरूर दिखा लें।

-प्रिंटिंग हेजी या फ्लैट हो और संदेह उत्पन्न करती हो, तो डॉक्टर से दिखवा लें।

•-शक की स्थिति में दवा कंपनी की कस्टमर हेल्पलाइन पर पूरी जानकारी दें।

-जरूरत पड़ने पर फोन की मदद से दवा के लेबल पर छपे बार कोड की स्पष्ट तस्वीर लेकर कंपनी को भेज कर आप दवा के असली या नकली होने की तस्दीक कर सकते हैं।

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