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वर्ल्ड हेल्थ डे: हर चार में से एक बच्चा डिप्रेशन का शिकार

डिप्रेशन एक बहुत गंभीर और आम बीमारी है।

वर्ल्ड हेल्थ डे: हर चार में से एक बच्चा डिप्रेशन का शिकार

हर साल 'वर्ल्ड हेल्थ डे' 7 अप्रैल को सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हेल्थ के प्रति जागरूकता फैलाना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) हर साल 'वर्ल्ड हेल्थ डे' यानि ग्लोबल हेल्थ अवेरनेस डे आयोजित करता है। 1948 से डब्ल्यूएचओ ने पहले वर्ल्ड हेल्थ डे की शुरुआत की थी। ताकि भविष्य रोग मुक्त बनाया जा सके।

इस दिन को स्वास्थ्य से जुड़े अगल-अगल थीम के साथ मनाया जाता है। 2017 का थीम डिप्रेशनः लेट्स टॉक (Depression: Let's talk) रखा गया है। डिप्रेशन से गैस एवं एसीडिटी की समस्या बढ़ती है।

डब्ल्यूएचओ ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक भारत में 13 से 15 साल की उम्र का हर 4 में से 1 बच्चा अवसाद यानी डिप्रेशन का शिकार है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया के 10 देशों में से भारत में सबसे ज्यादा आत्महत्या की जाती है।

6 अप्रैल को जारी की गई रिपोर्ट कहती है कि भारत की जनसंख्या 131.11 करोड़ है जिसमें से 13 से 15 साल की उम्र के किशोरों की संख्या 7.5 करोड़ है। यह कुल जनसंख्या का 5.8% है। पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं।

डिप्रेशन एक बहुत गंभीर और आम बीमारी है, जिससे दुनिया की लगभग 10% आबादी प्रभावित हैं। यदि इसे बिना इलाज के छोड़ दिया जाए, तो यह आपके जीवन के हर पहलु पर भारी दुष्प्रभाव डाल सकता है। ऐसा न होने दें। अपने डिप्रेशन से लड़ें। टाइम पर इलाज कराएं। ज़िंदगी में पॉजिटीव सोचेंगे तो सब अच्छा होगा।

हर किसी को हर साल अपना बॉडी चेकअप करना चाहिए। लोगों का सोचना होता है बिना बीमारी टेस्ट कराना बेकार है। लेकिन मनुष्य के शरीर में बीमारी कभी भी जन्म ले सकती है। इसलिए हमें हर साल फुल बॉडी चेकअप कराना चाहिए। जिससे बीमारी का समय पर इलाज हो सके।

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