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वर्ल्ड हेल्थ-डे 2019 : अगर 50 साल के बाद भी युवाओं को देनी है फिटनेस में मात, तो ऐसे रखें अपना ख्याल

आमतौर पर लोग किसी बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं। इससे वह फिजिकल या मेंटल प्रॉब्लम बहुत सीरियस हो जाती है। किसी भी डिजीज की सीरियस कंडीशन से बचने के लिए जरूरी है कि हम मेंटल और फिजिकल हेल्थ के हर सिंपटम के प्रति अवेयर रहें। कुछ कॉमन फिजिकल-मेंटल डिजीजेज के सिंपटम्स के बारे में जानिए।

वर्ल्ड हेल्थ-डे 2019 : अगर 50 साल के बाद भी युवाओं को देनी है फिटनेस में मात, तो ऐसे रखें अपना ख्याल
World Health Day 2019 : आज के दौर में बिजी लाइफस्टाइल और फास्ट फूड के बढ़ते चलन की वजह से अनेक तरह की बीमारियों की चपेट में लोग आ रहे हैं। हमारी बॉडी किसी भी बड़ी बीमारी का संकेत छोटी-मोटी तकलीफ के रूप में जरूर देती है। लेकिन अकसर लोग लापरवाही के कारण छोटी-मोटी तकलीफों को इग्नोर कर देते हैं। जबकि हेल्दी लाइफ के लिए इन इंडिकेशन को समझकर उपचार कराना चाहिए। यहां हम आपको कुछ कॉमन मेंटल और फिजिकल प्रॉब्लम्स के बारे में बता रहे हैं।

फिजिकल डिजीजेज

नई दिल्ली स्थित सहगल नियो अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जे. रावत का कहना है कि कई बार छोटे फिजिकल प्रॉब्लम्स को इग्नोर करने दुष्परिणाम यह होता है कि बीमारी गंभीर हो जाती है। इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही बीमारी का ईलाज करवाना चाहिए।

सिर दर्द:

अगर किसी व्यक्ति को बहुत तेज सिर दर्द विशेषकर सिर के पिछले तरफ दर्द हो, चक्कर, उल्टियां आ रही हों और बर्दाश्त से बाहर हो- तो यह ब्रेन ट्यूमर होने या आर्टिरीज में ब्लीडिंग होने का संकेत देता है। ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है, आंख प्रभावित हो सकती है। अचानक डबल विजन, धुंधला या एक आंख से दिखना बंद होने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। ऐसे में डॉक्टर को तुरंत कंसल्ट करना चाहिए। शरीर के दाएं या बाएं हिस्से में अचानक कमजोरी महसूस हो, तो यह पैरालिसिस का कारण भी बन सकता है।

मेनिनजाइटिस :

अचानक तेज बुखार आना, मस्तिष्क और रीढ़ के बीच की हड्डी में सूजन, गर्दन में अकड़न, शरीर पर रैशेज होना, सिर दर्द, उल्टी या
चक्कर आना, देखने में प्रॉब्लम होना, बेहोशी छाना- मेनिनजाइटिस या दिमागी बुखार के लक्षण हैं। ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

वेट लॉस :

डाइट ठीक होने के बावजूद अगर किसी व्यक्ति का वजन बिना एक्सरसाइज किए तेजी से कम हो रहा है, तो यह हाइपर थाइरॉयड या डायबिटीज होने का लक्षण हो सकता है। उसे फीयोक्रोमोसाइटोमा ब्रेन ट्यूमर भी हो सकता है, जिसमें वजन तेजी से कम होता है। वजन कम होने के साथ अगर भूख भी कम हो जाए तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है।

पेट में तेज दर्द :

डायबिटीज या ब्लड प्रेशर के मरीज को भोजन के बाद अचानक पेट में तेज दर्द हो, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। यह अपेंडिक्स या आंत में सूजन का संकेत भी हो सकता है।

गॉल ब्लैडर स्टोन:

40 साल से ज्यादा की उम्र की महिला और पुरुष को पेट के ऊपरी हिस्से में खाना खाने के बाद दर्द हो रहा है, तो गॉल ब्लैडर में सूजन या स्टोन हो सकता है। उम्रदराज लोगों को यूरीन में ब्लड आ रहा हो, तो यह ब्लैडर कैंसर का संकेत हो सकता है। अगर पेट में दर्द हो या किसी एक तरफ दर्द हो, उल्टी की फीलिंग हो, पसीना बहुत आ रहा हो, फीलिंग होने पर भी यूरिन ना आ रहा हो, तो यह किडनी में स्टोन का संकेत हो सकता है।

हार्ट डिजीज:

अचानक सांस फूलना खासतौर पर लेटने में ज्यादा दिक्कत हो, पसीना बहुत आ रहा है, तो यह हार्ट फेल्योर होने का संकेत हो सकता है। यह हार्ट डिजीज के लक्षण हैं, जिन्हें इग्नोर करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। अगर किसी को लेट कर सांस लेने में दिक्कत आ रही हो या सांस फूल रही हो, तो यह अस्थमा भी हो सकता है।

डायबिटीज:

बार-बार यूरीन डिसचार्ज के लिए जाना, ज्यादा पानी पीने के बावजूद शरीर में पानी की कमी होना, जरूरत से ज्यादा वजन कम होना या बढ़ना, बार-बार भूख लगना। पेट भरा हुआ होने के बावजूद कमजोरी महसूस होना, मूडी होना और छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना,आलस्य का बढ़ना, अधिक नींद आना, हाथ-पैर में सूजन आना और पेट का फूलना आदि डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर:

इस बीमारी की दो अवस्थाएं होती हैं- एक उदासी का और दूसरा, खुशी या तेजी का। इस डिसऑर्डर से पीड़ित के व्यवहार में बहुत जल्दी परिवर्तन आते हैं। कभी बहुत खुश होता है, तो कुछ समय में डिप्रेशन से घिर जाता है। तेजी की अवस्था को मेनिया कहते हैं, जिसके लक्षणों में बड़ी-बड़ी बातें करना, ऊल-जलूल योजनाएं बनाना, अपने आपको शक्तिमान या भगवान समझना, बहुत कम सोना, फिजूल खर्ची करना, बड़ी-बड़ी चीजों की मांग करना शामिल है। कुछ मरीजों में नशे का उपयोग करने से भी ये लक्षण देखने को मिलते हैं।

मेंटल डिजीजेज

नई दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के मनोचिकित्सक डॉ. प्रशांत गोयल का कहना है कि आज के दौर में बहुत से लोग मेंटल प्रॉब्लम्स से ग्रस्त रहते हैं, लेकिन वे अकसर नजरअंदाज करते रहते हैं। कोई भी एब्नॉर्मल सिंपटम नजर आते ही तुरंत उसका ट्रीटमेंट कराना चाहिए।

डिप्रेशन:

मानसिक बीमारियों में डिप्रेशन सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। इसके सिंपटम्स में मन उदास रहना, बेवजह चिड़चिड़ापन होना, रुलाई छूटना, शरीर में बेहद कमजोरी और सुस्ती होना, शरीर में दर्द होना, मरीज का किसी काम मे मन ना लगना, पढ़ने-लिखने, लोगों से मिलने-जुलने का मन नहीं करना शामिल हैं। ज्यादातर लोगों में नींद की गड़बड़ी भी देखने को मिलती है। देर रात तक नींद नहीं आना या बहुत सुबह नींद खुल जाना, भूख में कमी होना, खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना, दिमाग में नकारात्मक विचार आना, भविष्य अंधकारमय नजर आने से असहाय महसूस करना, खुद को दोषी मानना भी इसके लक्षण हैं। अगर ये लक्षण मरीज को दो सप्ताह से अधिक दिखाई दें, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

एंग्जाइटी डिसऑर्डर:

आमतौर पर बेचैनी या घबराहट सबको होती है, लेकिन बिना किसी बीमारी के जब यह एंग्जाइटी ज्यादा हो तो इससे नॉर्मल लाइफ में परेशानी होने लगती है। तब यह एंग्जाइटी डिसऑर्डर कहलाता है। बेचैनी, घबराहट, एक जगह पर टिक न पाना, एकाग्रता में कमी, छोटी-छोटी बात पर फिजूल चिंता, दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में कठिनाई होना, हाथ-पैर में कंपकंपी होना, बार-बार यूरीन या स्टूल की फीलिंग होना, हाथ-पैर सुन्न होना, शरीर में थकावट होना, कमजोरी आना, नींद न आना इसके लक्षण हैं।

सिजोफ्रेनिया:

साइकोस्टिंग या सिजोफ्रेनिया भी एक मनोविकार है। जिसमें कानों में आवाज आना, खुद बड़बड़ाना, मुस्कुराना, अजीब-अजीब बातें करना या व्यवहार करना, दूसरों पर शक करना कि सब लोग मेरे पीछे पड़े हुए हैं, दूसरे व्यक्ति केवल उनके बारे में बातें कर रहे हैं और नुकसान पहुंचाने की प्लानिंग कर रहे हैं। चिड़चिड़ापन और गुस्सा ज्यादा होना, नींद न आना, आक्रामक होना, तोड़-फोड़ करना, आस-पास के लोगों को भी चोट पहुंचाने की कोशिश करना इसके सिंपटम्स हो सकते हैं।

थाइरॉयड:

कब्ज होना, हाथ-पैर का ठंडा रहना, प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना, थकान रहना, स्किन का ड्राई होना, डिप्रेशन होना, किसी काम में मन नहीं
लगना, याद्दाश्त कमजोर होना, बाल झड़ना, मांस-पेशियों और जोड़ों में दर्द रहना थायरॉयड के लक्षण हो सकते हैं।

डिमेंशिया या अल्जाइमर:

इसमें उम्रदराज मरीज अकसर रिसेंट मेमोरी लॉस यानी वर्तमान में क्या हो रहा है, भूलते जाते हैं। लेकिन 25 साल पहले की बातें यानी रिमोट मेमोरी याद रहती है। वर्तमान की तारीख, दिन महीने जैसी चीजें याद नहीं रहतीं। अपने परिवार के सदस्य, उनका नाम, कहां रहते हैं-कुछ याद नहीं रहता।
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