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#WorldDrugDay भारत के 40 प्रतिशत कालेज में लड़के-लड़कियां करते हैं नशा, चौंकाने वाला है पूरा आंकड़ा

भारत में नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों में लगभग 40 प्रतिशत कालेज छात्र हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या भी काफी है और स्थिति यह है कि कालेजों के अंदर ही बड़ी आसानी से नशीले पदार्थ उपलब्ध हो जाते हैं।

#WorldDrugDay  भारत के 40 प्रतिशत कालेज में लड़के-लड़कियां करते हैं नशा, चौंकाने वाला है पूरा आंकड़ा
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आज वर्ल्ड ड्रग डे है। भारत में नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों में लगभग 40 प्रतिशत कालेज छात्र हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या भी काफी है और स्थिति यह है कि कालेजों के अंदर ही बड़ी आसानी से नशीले पदार्थ उपलब्ध हो जाते हैं। नशा चाहे किसी भी चीज का हो, जानलेवा होता है। मादक पदार्थों का नशा तो लोगों को बुरी तरह पंगु बना देता है।

नशीले पदार्थों के दुरूपयोग की समस्या विश्वव्यापी बन चुकी है। इनका सेवन मानवता के प्रति सबसे बड़े अपराध का रूप धारण कर चुका है। भारत में भी मादक पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। यह केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रही है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अफीम, चरस, गांजा, हेरोइन आदि के अलावा इंजेक्शन के जरिये नशे का इस्तेमाल भी होने लगा है।

कुछ युवक मादक पदार्थों से होने वाली अनुभूति को अनुभव करने के लिए, कुछ रोमांचक अनुभवों के लिए तो कुछ मानसिक तौर पर परेशानी अथवा हताशा की स्थिति में इनका सेवन शुरू करते हैं। मानव जीवन की रक्षा के लिए बनाई जाने वाली कुछ दवाओं का उपयोग भी लोग अब नशा करने के लिए करने लगे हैं।

कोई व्यक्ति इन मादक पदार्थों की गिरफ्त में एक बार फंस जाए तो उसका इससे बाहर निकल पाना बेहद कठिन हो जाता है। मादक पदार्थ शरीर की सुन्दरता को नष्टकर खोखला बनाते हैं। इनका उपयोग युवा पीढ़ी की सृजनशीलता को मिटा रहा है तथा देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को पंगु बना रहा है।

एक बार मादक पदार्थों की लत लग जाए तो व्यक्ति इनके बिना रह नहीं पाता। यही नहीं, उसे पहले जैसा नशे का प्रभाव पैदा करने के लिए और अधिक मात्रा में मादक पदार्थ लेने पड़ते हैं। इस तरह व्यक्ति इनका गुलाम बनकर रह जाता है। अधिकांश लोगों में गलत धारणाएं विद्यमान हैं कि मादक पदार्थों के सेवन से व्यक्ति की सृजनशीलता बढ़ती है

और इससे व्यक्ति में सोच-विचार की क्षमता, एकाग्रता तथा यौन सुख बढ़ता है लेकिन वास्तविकता यही है कि नशे के शिकार लोगों की सोच-विचार की क्षमता और इसकी स्पष्टता खत्म हो जाती है तथा उनके कार्यों में भी कोई तालमेल नहीं रहता। इनके सेवन से कुछ समय के लिए संकोच की भावना जरूर मिट जाती है लेकिन अंतत: इससे शरीर की सामान्य कार्यक्षमता में गिरावट आती है।

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