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सावधान ! अगर डायबिटीज को किया इग्नोर, तो दिल, किडनी और रेटिना की हो सकती है गंभीर बीमारी

आज दुनिया में World Diabeties Day 2018 यानि विश्व मधुमेह दिवस मनाया जा रहा है। जिससे दुनिया में डायबिटीज (शुगर) की बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं जैसे, दिन भर खुद को थका हुआ महसूस करता है, चोट का लंबे समय में ठीक होना, इसके अलावा बार-बार भूख और प्यास का लगना, वजन का तेजी से कम होना आदि।

सावधान ! अगर डायबिटीज को किया इग्नोर, तो दिल, किडनी और रेटिना की हो सकती है गंभीर बीमारी
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आज दुनिया में World Diabeties Day 2018 यानि विश्व मधुमेह दिवस मनाया जा रहा है। जिससे दुनिया में डायबिटीज़ (शुगर) की बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं जैसे, दिन भर खुद को थका हुआ महसूस करता है, चोट का लंबे समय में ठीक होना, इसके अलावा बार-बार भूख और प्यास का लगना, वजन का तेजी से कम होना आदि।
लेकिन अगर डायबिटीज़ (शुगर) की बीमारी में लापरवाही बरती जाए, तो ये दिल,किडनी और रेटिना आदि कई और बीमारियों की मुख्य वजह बन जाती है। ऐसे में आज हम आपको डायबिटीज़ (शुगर) के प्रकार, इससे होने वाले रोग और इसको कंट्रोल करनें के बारे में बता रहे हैं। जिससे आप समय रहते इस बीमारी के असर को कम कर सकें।

क्या होती है डाइबिटीज

डाइबिटीज यानि शहद या शुगर, दरअसल हमारे खून में कुछ मात्रा में शर्करा(चीनी) पाई जाती इसे मेडिकल भाषा में इन्सुलिन भी कहा जाता है। जिसके बढ़ने या कम होने पर डाइबिटीज़ की बीमारी हो जाती है।
इन्सुलिन पैनक्रीयास से बनने वाली एक हॉरमोन है, इसका काम है भोजन के हज़म होने के बाद जो ग्लूकोज़ मिलता है उसको कोशिकाओं में भेजकर ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करना। इसके अनियंत्रण से ग्लूकोज़ का कोई काम नहीं हो पाता और वह रक्त में रह जाता है। ज़्यादा ग्लूकोज़ इधर-उधर बिखर जाता है।

डाइबिटीज़ के प्रकार

1. डाइबिटीज़ टाइप 1

इसे इन्सुलिन डिपेन्डेन्ट या जुविनाइल डाइबिटीज़ कहा जाता हैं। ये बीमारी आमतौर पर युवावस्था में होती है। इस बीमारी में शरीर के इन्सुलिन स्तर को बनाए रखने के लिए बाहरी स्रोतों का उपयोग किया जाता है।

2.डाइबिटीज़ टाइप 2

नॉन-इन्सुलिन डिपेन्डेन्ट डाइबिटीज़ या एडॉल्ट ऑनसेट डाइबिटीज़, ये बीमारी अक्सर मध्यम आयु वर्ग के लोगों को होती है। इसमें व्यक्ति में अचानक मोटापा बढ़ने लगता है। जिसे एक्सरसाइज़ और संतुलित आहार से नियंत्रित किया जा सकता है।

3. जेसटेश्नल डाइबिटीज़

ये डाइबिटीज़ बीमारी अक्सर गर्भावास्था के दौरान महिलाओं में होती है। जिसमें लापरवाही बरतने का असर मां और बच्चे दोनों पर ही पड़ता है।

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डायबिटीज़ में इन्सुलिन के स्तर में बदलाव होने पर होते हैं ये रोग

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