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विश्व कैंसर दिवसः भारत में तंबाकू के सेवन से बढ़ रही कैंसर के मरीजों की संख्या

बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, सुपारी, शराब और जंक फूड जैसी चीजें भारतीयों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी हैं।

विश्व कैंसर दिवसः भारत में तंबाकू के सेवन से बढ़ रही कैंसर के मरीजों की संख्या
जयपुर. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को पनपने से रोकने के लिए तंबाकू के सेवन पर नियंत्रण रखना एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, सुपारी, शराब और जंक फूड जैसी चीज़ें हमारे लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन अगर आप इन चीज़ों का सेवन नहीं करते हैं, तो कैंसर को होने से रोक सकते हैं।
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रोफेसर और सर्जन डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने वर्ल्ड कैंसर डे के मौके पर कहा कि “कई अध्ययन और शोध ने प्रमाणित करते हुए कहा है कि देश में तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों पर 10 प्रतिशत दाम बढ़ाने से उसके उपभोग में सात प्रतिशत की कमी आ सकती है। ख़ासतौर पर बीड़ी उपभोग में 9.1 प्रतिशत एवं सिगरेट सेवन में सात प्रतिशत की कमी आ सकती है”।
तंबाकू बन रहा सबसे बड़ा कारण
वायॅस ऑफ टोबैको विक्टिम्स (वीओटीवी) की राजस्थान पैट्रन यूनिट व सवाई मानसिंह अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ एवं सर्जन डॉ. पवन सिंघल ने कहा कि “कैंसर का प्रभाव प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पाद हैं”।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों द्वारा किए गए शोध से सामने आया है कि सिगरेट और बीड़ी में चार हज़ार तरह के कैमिकल होते हैं। इनमें 60 कैमिकल ऐसे हैं, जो सीधे कैंसर जैसी बीमारी को बढ़ावा देते हैं। भारत में करीब 10 हज़ार खरब सिगरेट व बीड़ी जलाई जाती है। अगर बीड़ी या सिगरेट के एक हिस्से को एक लीटर पानी में डालकर उसमें मछली छोड़ दी जाए तो वह मर जाएगी।

डॉ. सिंघल ने कहा कि “भारतीय चिकित्सा अनुसंधान (आईसीएमआर) की रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरुषों में 50 प्रतिशत और स्त्रियों में 25 प्रतिशत कैंसर की वज़ह तंबाकू है। धुआं छोड़ने वाले तंबाकू में 3000 से अधिक कैमिकल्स पाए जाते हैं। इनमें से 29 कैमिकल ऐसे हैं, जिनके सेवन से कैंसर पैदा हो सकता है। मुंह के कैंसर के मरीजों की सबसे ज़्यादा संख्या भारत में है। फेफड़े के कैंसर और मुंह के कैंसर के 90 प्रतिशत केस, मुख्य कारण तंबाकू की वज़ह से सामने आ रहे हैं”।
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