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World Cancer Day : वर्ल्ड कैंसर डे 4 फरवरी को, कैंसर के लक्षण, कारण और कैंसर का इलाज

इररेग्युलर लाइफस्टाइल, अनहेल्दी डाइट और टोबैको या एल्कोहल के सेवन के कारण कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में इससे बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट जरूरी है। इसके साथ ही कैंसर के आरंभिक लक्षणों को लेकर कॉन्शस रहने की भी जरूरत है। समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो पूरा ट्रीटमेंट संभव है। इस बारे में डिटेल में जानिए।

World Cancer Day : वर्ल्ड कैंसर डे 4 फरवरी को, कैंसर के लक्षण, कारण और कैंसर का इलाज

World Cancer Day

इररेग्युलर लाइफस्टाइल, अनहेल्दी डाइट और टोबैको या एल्कोहल के सेवन के कारण कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में इससे बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट जरूरी है। इसके साथ ही कैंसर के आरंभिक लक्षणों को लेकर कॉन्शस रहने की भी जरूरत है। समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो पूरा ट्रीटमेंट संभव है। इस बारे में डिटेल में जानिए।
भारत समेत पूरी दुनिया में कैंसर सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारी बन गई है। एक अनुमान के मुताबिक अगले साल यानी सन 2020 तक कैंसर के 17 लाख से अधिक नए मामले सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के तेजी से बढ़ने का कारण गलत लाइफस्टाइल को अपनाना है, जिसकी शुरुआती डायग्नोसिस और प्रबंधन से इससे बचना और उबरना संभव है। शायद इसलिए इस बार वर्ल्ड कैंसर डे का थीम भी ‘आई एम एंड आई विल’ रखी गई है यानी मरीज प्रबल इच्छाशक्ति से इस जानलेवा रोग को मात दे सकता है।

बढ़ते मामलों का कारण

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक अगले चार साल के दौरान कैंसर से जुड़ी मौतों के मामले 7.36 लाख से बढ़कर 8.8 लाख तक पहुंच सकते हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि जागरूकता के अभाव में अपर्याप्त डायग्नोसिस होने के कारण कैंसर के 50 प्रतिशत मरीज तीसरे या चौथे चरण में पहुंच जाते हैं, जिस वजह से मरीज के बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है।
जहां पुरुषों में प्रोस्टेट, मुंह, फेफड़ा, पेट, बड़ी आंत का कैंसर कॉमन होते हैं तो वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर के ज्यादातर मामले देखने को मिलते है। इस बारे में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजी,डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, कैंसर के मामलों का तेजी से बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बदलता लाइफस्टाइल, प्रदूषण, खान-पान में मिलावट और तंबाकू या धूम्रपान के सेवन का बढ़ता चलन है।

क्या कहती है रिपोर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि हर साल कैंसर की वजह से 80 लाख से भी अधिक लोगों की मौत हो जाती है। कई फिल्मी सितारों के कैंसरग्रस्त होने की खबर मिलती रहती है लेकिन सही समय पर इलाज शुरू हो जाने से वे कैंसर से उबर जाते हैं। ऐसा तभी संभव है, जब नियमित जांच के द्वारा शुरुआती चरण में ही इसकी पहचान कर ली जाए।

शुरुआती लक्षण

डॉक्टर्स के अनुसार शरीर के किसी हिस्से में अचानक गांठ बन जाए या किसी अंग से ब्लीडिंग होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और जांच करानी चाहिए। शरीर के किसी अंग में अचानक वृद्धि या त्वचा के रंग में बदलाव भी इसके लक्षण हो सकते हैं।

तुरंत कराएं टेस्ट

यूरीन और ब्लड टेस्ट कराने पर असामान्य स्थिति सामने आए तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में कॉमन ब्लड टेस्ट के दौरान श्वेत रक्त कोशिकाओं के प्रकार या संख्या में भी अंतर आ सकता है। इसके आलावा सीटी स्कैन, बोन स्कैन, एमआरआई, पीईटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे के विकल्प भी उपलब्ध हैं।
लेकिन कैंसर कंफर्मेशन के लिए बायोप्सी टेस्ट ही एकमात्र तरीका है। इसमें कोशिकाओं का सैंपल लेकर जांच की जाती हैं। कैंसर कंफर्म होने के बाद कैंसर का स्टेज निर्धारित किया जाता है ताकि इलाज के विकल्पों को डिसाइड किया जा सके। कैंसर के लक्षणों की पहचान एक से चार स्टेज तक हो सकती है।

कैंसर डायग्नोसिस

बायोप्सी टेस्ट: शरीर के किसी हिस्से में लंप हो जाए तो उसमें कैंसर के पनपने की संभावना का पता लगाने के लिए लंप का एक टुकड़ा लिया जाता है और इस दौरान लंप में मौजूद सेल्स और टिश्यूज का लैब में टेस्ट किया जाता है, जिससे कैंसर की पुष्टि होती है।
इमेजिंग टेस्ट:
कैंसर की पुष्टि के लिए लंप का इमेजिंग टेस्ट भी किया जाता है। इस प्रक्रिया में माइक्रोस्कोप के द्वारा कैंसर का पता लगाया जाता है।

हेल्दी डाइट है कारगर

डॉक्टर्स का मानना है कि हेल्दी डाइट कैंसर के रिस्क फैक्टर को कम करने में बहुत मददगार होता है। इस बारे में एक्शन कैंसर हॉस्पिटल, दिल्ली में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. जे.बी.शर्मा कहते हैं, ‘कैंसर से बचने और उबरने के उपायों में नियमित जांच, हेल्दी लाइफस्टाइल, धूम्रपान न करना, शुद्ध और पौष्टिक खान-पान, फलों-सब्जियों का ज्यादा सेवन, स्वच्छ आबोहवा, व्यायाम और नियमित दिनचर्या का पालन शामिल हैं।
-विभिन्न तरह के वेजीटेबल्स, फ्रूट्स, सोया, नट्स, होल ग्रेन और बींस से भरपूर प्लांट बेस्ड डाइट कैंसर से लड़ने में काफी हद तक मददगार हो सकती है।
•-प्लांट बेस्ड फूड में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
•-फलों में एंटीऑक्सीडेंट जैसे बीटा केरोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और सेलेनियम होते हैं। ये विटामिन कैंसर से बचाव करते हैं और शरीर में सेल्स को बेहतर ढंग से फंक्शन करने में मदद करते हैं।
•-लाइकोपीन से भरपूर टमाटर, अमरूद, वाटरमेलन, प्रोस्टेट कैंसर के रिस्क फैक्टर को कम करते हैं।

कैंसर ट्रीटमेंट

कैंसर ट्रीटमेंट कई प्रकार से किया जा सकता है। यह कैंसर के प्रकार और उसके स्टेज के अनुसार ही किया जाता है। इसके लिए कंडीशन के बेस पर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, हॉर्मोन थेरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, प्रिसिशन मेडिसिन ट्रीटमेंट किया जाता है।

फर्टिलिटी हो सकती है प्रभावित

मेडिकवर फर्टिलिटी सॉल्यूशन की क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. श्वेता गुप्ता का कहना है कि कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं लेकिन आधुनिक चिकित्सा की बदौलत इससे बचने की दर में भी इजाफा हुआ है। हालांकि कैंसर का इलाज कराने से पिता या माता बनने की क्षमता यानी प्रजनन क्षमता कमजोर पड़ जाती है।
सर्जरी, कीमोथेरापी या रेडियोथेरापी जैसे उपचार से ओवेरियन रिजर्व या स्पर्म घट सकते हैं। ऐसे लोग यदि कैंसर का इलाज कराने के बाद समय पर काउंसिलिंग और इलाज शुरू करा लें तो उनमें फर्टिलिटी बचाए रखने की संभावना अधिक रहती है। पुरुषों के लिए जहां स्पर्म, बैंक में सुरक्षित रखने का विकल्प है, वहीं महिलाओं के लिए अंडाणु को फ्रीज रखना उपयुक्त विकल्प है।
ये सुविधाएं किसी फर्टिलिटी सेंटर में मिल जाती हैं जहां इलाज शुरू कराने से पहले संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा यदि स्पर्म बहुत ही कम रहे तो डोनर समूहों जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। इसके लिए ऑन्कोलॉजिस्ट, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, फैमिली फिजिशियन, साइकोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट, काउंसलर से डिसकस किया जा सकता है।
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